"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 31 मई 2011

"झूमर जैसे लहराते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

तपती हुई दुपहरी में, झूमर जैसे लहराते हैं।
कंचन जैसा रूप दिखाते, अमलतास भा जाते हैं।।
जब सूरज झुलसाता तन को, आग बरसती है भूपर।
ये छाया को सरसाते हैं, आकुल राही के ऊपर।।

स्टेशन और सड़क किनारे, कड़ी धूप को सहते हैं।
लू के गर्म थपेड़े खा कर, खुलकर हँसते रहते हैं।।

शाखाओं पर बैठ परिन्दे, मन ही मन हर्षाते हैं।
इनके पीले-पीले गहने, उनको बहुत लुभाते हैं।।
दुख में कैसे मुस्काते हैं, ये जग को बतलाते हैं।
सहना सच्चा गहना होता है, सीख यही सिखलाते हैं।।

43 टिप्‍पणियां:

  1. ...अमलतास का सुन्दर वर्णन

    जलती लू में भी मनभावन
    पीत वर्ण का ओज प्रखर
    जाने कितनी रचनाओं में
    अमलतास हो गया अमर

    उत्तर देंहटाएं
  2. जितने सुन्दर अमलतास उतना सुन्दर वर्णन.

    उत्तर देंहटाएं
  3. अमलतास को भी शब्द दे दिये……………बहुत सुन्दर रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  4. अमलतास को दि‍ल से महसूस कि‍या है आपने... आजकल लोगों को ऐसी फुर्सत कम ही होती है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. "तपती हुई दुपहरी में, झूमर जैसे लहराते हैं।
    कंचन जैसा रूप दिखाने, अमलतास आ जाते हैं।।"
    शास्त्री जी,आपकी प्राकृतिक छतरी का जवाब नहीं.कंचन जैसा रूप तो है ही,हीरे जैसा दिल भी साथ है.
    प्रकृति से बड़ा गुरु तो न हुआ है ,न ही आगे होगा.

    "दुख में कैसे मुस्काते हैं, यह जग को बतलाते हो।
    धीरज सच्चा गुण होता है, सीख यही सिखलाते हो।।"

    उत्तर देंहटाएं
  6. गर्मी के मौसम और अमलतास को बिल्कुल जीवंत कर दिया है आपने. प्रकृति की ओर लौट चलने का सन्देश है इस रचना में. बहुत ही सार्थक कविता. बधाई!
    ----देवेंद्र गौतम

    उत्तर देंहटाएं
  7. Maano aapne mere dil ki baat kah di hai.

    Aur khoob kahi hai aapne.
    asal men main out of station hun aajkal.
    bas aise hi roman men kar diya comment ki gair hazir n rahun .

    उत्तर देंहटाएं
  8. प्रकृति की अनुपम छटा को शब्दों में बड़ी ही खूबसूरती आपने ढाला है!
    आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह!! अमलतास का काव्यमय चित्रांकन

    उत्तर देंहटाएं
  10. adbhut ,, aap ka socne ka najariye bahut komal hai,, aap jaise insaan aaj k bheed bhare mahol me bahut kam milte hai,, aapki soch mahan hai,,

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत बढिया कविता और चित्र तो गजब ही ढा रहे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  12. garmi se hai sabka bura haal
    phir bhi hamne liya iska maza hazaar........ye hai jindagi

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुन्दर रचना..जैसे गर्मी के मौसम में ठंडी बयार आगई...फोटो भी बहुत सुन्दर.. आभार

    उत्तर देंहटाएं
  14. इस झूमर का क्या कहना ! बहुत खूब !

    वैसे ये जो स्टेशन वाला चित्र है ,वो कहाँ का है ? शायद म. प्र. के किसी स्टेशन का ?

    उत्तर देंहटाएं
  15. इसकी तो फली भी बड़े काम की होती है...

    उत्तर देंहटाएं
  16. अमलतास का तो वैसे भी बहुत महत्व है इंसान के जीवन में ... चित्रों के साथ सजी लाजवाब रचना है ...

    उत्तर देंहटाएं
  17. सुंदर चित्रों के साथ बहुत ही सुंदर रचना । धन्यवाद ।

    उत्तर देंहटाएं
  18. दुख में कैसे मुस्काते हैं, ये जग को बतलाते हैं।
    सहना सच्चा गहना होता है, सीख यही सिखलाते हैं।।

    बहुत सुन्दर रचना प्रेरणादायक ..

    उत्तर देंहटाएं
  19. दुख में कैसे मुस्काते हैं, ये जग को बतलाते हैं।
    सहना सच्चा गहना होता है, सीख यही सिखलाते हैं।।
    bahut saarthak rachanaa sunder chitron ke saath badhaai aapko.

    उत्तर देंहटाएं
  20. रेल-काव्य, प्लेटफार्म में अमलतास।

    उत्तर देंहटाएं
  21. एक उम्दा रचना के लिए बधाइयाँ ...

    उत्तर देंहटाएं
  22. बहुत सुंदर चित्र, ओर अति सुंदर रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  23. कविता की हर पंक्तियों में और चित्रों में होड़ सी लगी है...मैं सुंदर हूँ।
    ..वाह!

    उत्तर देंहटाएं
  24. दुख में कैसे मुस्काते हैं, ये जग को बतलाते हैं।
    सहना सच्चा गहना होता है, सीख यही सिखलाते हैं।।

    इतना सुंदर वर्णन अमलतास का ...बहुत गहरी बात से जोड़ता हुआ और उतना ही सुंदर चित्र ..!! मन को प्रभावित कर रही है आपकी रचना ..!!ati uttam kriti.

    उत्तर देंहटाएं
  25. chitra bhi bahut sunder hain aur rachna to laajabab hai.sahansheelta ki prerna deti hui rachna bahut achchi lagi.

    उत्तर देंहटाएं
  26. जितने सुन्दर अमलतास उतना सुन्दर वर्णन.

    उत्तर देंहटाएं
  27. बहुत सुन्दर रचना,ठंडी बयार फोटो भी बहुत सुन्दर.. आभार

    उत्तर देंहटाएं
  28. यह कविता वास्तव में बहुत अच्छी है
    और बालकविता के मानकों पर अकदम खरी उतरती है!
    --
    आश्चर्य की बात है कि
    इसे बालकविता का लेबल क्यों नहीं दिया गया?

    उत्तर देंहटाएं
  29. भयंकर गर्मी के आलम में कविता बहुत सुकून दे रही है !

    उत्तर देंहटाएं
  30. "तपती हुई दुपहरी में, झूमर जैसे लहराते हैं।
    कंचन जैसा रूप दिखाने, अमलतास आ जाते हैं।।"
    शास्त्री जी गर्मी के महीने में यह रचना ठंडक दे रही है , धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  31. इस कविता को
    बालकविता लेबल में डालने के लिए
    बच्चे आपके आभारी रहेंगे!

    उत्तर देंहटाएं
  32. वाह! शास्त्री जी क्या बात है! जितनी सुन्दर तस्वीरें उतनी ही ख़ूबसूरत रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  33. प्रकृति का सानिध्य कराती सुन्दर रचना
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  34. अमलतास का सुन्दर वर्णन है। ....बहुत ही सार्थक कविता. ...आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  35. प्रकृति के अनुपम छटा कोआप ने अपने शब्दों मे विखेर दिया … बहुत ही सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  36. रवि जी ने कई बार इस कविता का लिंक भेजा , किन्तु संयोग कि मैं आपकी इस इतनी सुन्दर कविता को अत्यंत विलम्ब से देख सका . चित्र भी बहुत मनभावन हैं .रवि जी ने लिखा है कि आश्चर्य की बात है कि इसे बालकविता का लेबल क्यों नहीं दिया गया?

    कदाचित कंचन,आकुल ,भूपर ,सरसाते ,शाखाओं जैसे क्लिष्ट शब्दों के आ जाने से आपने इसे किशोरों अथवा बड़ों के अधिक उपयुक्त समझा होगा . अत:मैं आपसे पूर्णत : सहमत हूँ .फ़िलहाल ... आपकी यह कविता पाठ्य कविता अधिक है जो किशोरों का भी प्रचुर रसास्वादन करेगी .

    आपको हार्दिक बधाई और रवि जी को साभार

    उत्तर देंहटाएं
  37. नागेश जी,
    मैंने केवल एक ही बार इस कविता का लिंक आपको भेजा था!
    --
    आज फिर से याद दिलाने पर आपने अपनी प्रतिक्रिया दी, इसके लिए आभार!
    --
    पर आप तो भ्रम की स्थिति बनाकर चले गए!
    जिन शब्दों को आपने कठिन बताया है,
    मेरे विचार से वे बाल-वर्ग के लिए उतने कठिन नहीं हैं!
    --
    शास्त्री जी अब इसे बालकविता का लेबल दे चुके हैं!

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails