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बुधवार, 4 जुलाई 2012

"दुष्ट-बणिक के हाथों में" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


मानव दानव बन बैठा है, जग के झंझावातों में।
दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।।

होड़ लगी आगे बढ़ने की, मची हुई आपा-धापी,
मुख में राम बगल में चाकू, मनवा है कितना पापी,
दिवस-रैन उलझा रहता है, घातों में प्रतिघातों में।
दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।।

जीने का अन्दाज जगत में, कितना नया निराला है,
ठोकर पर ठोकर खाकर भी, खुद को नही संभाला है,
ज्ञान-पुंज से ध्यान हटाकर, लिपटा गन्दी बातों में।
दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।।

मित्र, पड़ोसी, और भाई, भाई के शोणित का प्यासा,
भूल चुके हैं सीधी-सादी, सम्बन्धों की परिभाषा।
विष के पादप उगे बाग में, जहर भरा है नातों में।
दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।।

एक चमन में रहते-सहते, जटिल-कुटिल मतभेद हुए,
बाँट लिया गुलशन को, लेकिन दूर न मन के भेद हुए,
खेल रहे हैं ग्राहक बनकर, दुष्ट-बणिक के हाथों में।
दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।।

16 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर शास्त्री जी....

    बहुत बढ़िया रचना...कड़वे सच को बयाँ करती रचना.

    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  2. मानव दानव बन बैठा है, जग के झंझावातों में।
    दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।।
    सत्य को उजागर करती सार्थक अभिव्यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर प्रस्तुति |
    बढ़िया |
    बधाई गुरु जी ||

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर गहन प्रस्तुति!

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह मेरे खींची फोटू यहाँ शोभामान हो रही है...

    http://deepakmystical.blogspot.in/2012/01/blog-post_25.html

    उत्तर देंहटाएं
  6. मित्र, पड़ोसी, और भाई, भाई के शोणित का प्यासा,
    भूल चुके हैं सीधी-सादी, सम्बन्धों की परिभाषा।
    विष के पादप उगे बाग में, जहर भरा है नातों में।
    दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।।

    .एक कटु सत्य का यथार्थ चित्रण ..

    उत्तर देंहटाएं
  7. दीपक बाबा जी आपका यह चित्र मुझे गूगल सर्च से मिला था। मुझे अच्छा लगा। आपने बहुत सुन्दर चित्र खींचा है।
    आभारी हूँ!

    उत्तर देंहटाएं
  8. ज़िंदगी के कटु सत्य का बहुत सुन्दर चित्रण...

    उत्तर देंहटाएं
  9. जीने का अंदाज नया है ,आया नया जमाना है
    भूल गए सब रिश्ते नाते,लेकिन हमे निभाना है

    MY RECENT POST...:चाय....

    उत्तर देंहटाएं
  10. सटीक !
    सूरज चंदा को मनाया जाये
    क्यों ना पहले के जैसे
    काम पर लगाया जाये
    महौल को विटामिन बी
    का टानिक पिलाया जाये।

    उत्तर देंहटाएं
  11. जीने का अन्दाज सिखाती रणभेरी कविता..

    उत्तर देंहटाएं
  12. जीवन के यथार्थ को चित्रित करती रचना।

    उत्तर देंहटाएं

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