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शनिवार, 21 जुलाई 2012

"ढाई आखर नही व्याकरण चाहिए" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!
आज एक पुरानी रचना पोस्ट कर रहा हूँ!

मोक्ष के लक्ष को मापने के लिए,
जाने कितने जनम और मरण चाहिए।
प्रीत की पोथियाँ बाँचने के लिए-
ढाई आखर नही व्याकरण चाहिए।।

लैला-मजनूँ को गुजरे जमाना हुआ,
किस्सा-ए हीर-रांझा पुराना हुआ,
प्यार का राग आलापने के लिए,
शुद्ध स्वर, ताल, लय, उपकरण चाहिए।
प्रीत की पोथियाँ बाँचने के लिए-
ढाई आखर नही व्याकरण चाहिए।।

सन्त का पन्थ होता नही है सरल,
पान करती सदा मीराबाई गरल,
कृष्ण और राम को जानने के लिए-
सूर-तुलसी सा ही आचरण चाहिए।
प्रीत की पोथियाँ बाँचने के लिए-
ढाई आखर नही व्याकरण चाहिए।।

सच्चा प्रेमी वही जिसको लागी लगन,
अपनी परवाज में हो गया जो मगन,
कण्टकाकीर्ण पथ नापने के लिए-
शूल पर चलने वाले चरण चाहिए।।
प्रीत की पोथियाँ बाँचने के लिए-
ढाई आखर नही व्याकरण चाहिए।।

झर गये पात हों जिनके मधुमास में,
लुटगये हो वसन जिनके विश्वास में,
स्वप्न आशा भरे देखने के लिए-
नयन में नींद का आवरण चाहिए।
प्रीत की पोथियाँ बाँचने के लिए-
ढाई आखर नही व्याकरण चाहिए।।

15 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर लिखा, लेखनी ने कल लिखा हो या फिर आज , वही लय और ताल लिए होती हें आपकी कविताएँ.

    उत्तर देंहटाएं
  2. है पुरानी पर खूबसूरत लगी ... आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही सुंदर ...
    शब्द शब्द सच्चे प्रेम में डुबकी लगाकर निकली हुई लगती है ..

    सत्य कहा आपने ...
    प्रीत की पोथियाँ बाँचने के लिए-
    ढाई आखर नही व्याकरण चाहिए।।

    उत्तर देंहटाएं
  4. नीति-नियम व्याकरण का, सबसे अधिक महत्त्व ।

    बिन इसके समझे नहीं, सार तत्व सा सत्व ।

    सार तत्व सा सत्व, दृष्टि सम्यक मिल जाती ।

    मिट जाते सब भरम, प्रेम रसधार सुहाती ।

    नीति नियम लो जान, जान के दुश्मन बन्दे ।

    सुन आशिक नादान, बड़े जालिम ये फंदे ।।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत खूबसूरत ... .सार्थक कथन

    उत्तर देंहटाएं
  6. रचना में दम है | बहुत दिनों बाद कहीं टिपण्णी करने का दिल कर गया|

    उत्तर देंहटाएं
  7. नियम नीति के साथ,याद रखो व्याकरण
    इसके बिना लेखनी का,न सुधरे आचरण,,,,,,

    सार्थक प्रस्तुति,,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  8. Sundar...
    Kafi dino baad aaya aapke blog par aur itni achi kavita padhne ko mili

    उत्तर देंहटाएं
  9. भवनिष्ठता प्रशंसनीय है ....

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुंदर !!
    प्रीत की पोथियाँ बाँचने के लिए-
    ढाई आखर नही व्याकरण चाहिए।।

    जो नहीं सीख पाये आप वो बात यहाँ बता गये
    ये व्याकरण ही तो हमें कोई भी नहीं सिखा गये

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुन्दर
    बेहतरीन रचना...
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  12. कृष्ण और राम को जानने के लिए-
    सूर-तुलसी सा ही आचरण चाहिए।
    प्रीत की पोथियाँ बाँचने के लिए-
    ढाई आखर नही व्याकरण चाहिए।।

    बहुत खूब ..

    उत्तर देंहटाएं
  13. सरल नहीं है प्रीत की पोथियाँ बांचना,
    प्रेम की अग्नि में होम हो जाना पड़ता है...
    हाँ, ये बात और है कि होम होने के बाद जो सौंदर्य निखरता है, उसकी छटा ही निराली होती है...

    उत्तर देंहटाएं

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