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बुधवार, 25 जुलाई 2012

"उन्हें हम प्यार करते हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


हमारा ही नमक खाते, हमीं पर वार करते हैं।
जहर मॆं बुझाकर खंजर, जिगर के पार करते हैं।।

शराफत ये हमारी है, कि हम बर्दाश्त करते हैं,
नहीं वो समझते हैं ये, उन्हें हम प्यार करते हैं।

हमारी आग में तपकर, कभी पिघलेंगे पत्थर भी,
पहाड़ों के शहर में हम, चमन गुलज़ार करते हैं।

कहीं हैं बर्फ के जंगल, कहीं ज्वालामुखी भी हैं,
कभी रंज-ओ-अलम का हम, नहीं इज़हार करते हैं।

अकीदा है छिपा होगा, कोई भगवान पत्थर में,
इसी उम्मीद में हम, रोज ही बेगार करते हैं।

नहीं है रूप से मतलब, नहीं है रंग की चिन्ता,
तराशा है जिसे रब ने, उसे स्वीकार करते हैं।

24 टिप्‍पणियां:

  1. सर बहुत सुन्दर शव्दों से सजी है आपकी गजल
    उम्दा पंक्तियाँ .........
    हमारा ही नमक खाते, हमीं पर वार करते हैं।
    जहर मॆं बुझाकर खंजर, जिगर के पार करते हैं।।

    शराफत ये हमारी है, कि हम बर्दाश्त करते हैं,
    नहीं वो समझते हैं ये, उन्हें हम प्यार करते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सबसे सुन्दर गजलों में
    से एक है यह गजल ||
    कृपया अकीदा का शाब्दिक
    अर्थ लिखने का कष्ट करें ||
    आभार गुरु जी ||

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया गज़ल शस्त्री जी...
    कहीं हैं बर्फ के जंगल, कहीं ज्वालामुखी भी हैं,
    कभी रंज-ओ-अलम का हम, नहीं इज़हार करते हैं।
    लाजवाब शेर..
    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  4. हमारा ही नमक खाते, हमीं पर वार करते हैं।
    जहर मॆं बुझाकर खंजर, जिगर के पार करते हैं।। bhaut hi acchi abhivaykti.....

    उत्तर देंहटाएं
  5. हमारी आग में तपकर, कभी पिघलेंगे पत्थर भी,
    पहाड़ों के शहर में हम, चमन गुलज़ार करते हैं।

    बहुत सुंदर बात कही है इन पंक्तियों में. दिल को छू गयी. आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत बढ़िया सर जी...
    सभी शेर बेहतरीन है..
    बेहतरीन गजल :-)

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सराहनीय प्रस्तुति.ब्लॉग जगत में ऐसी आती रहनी चाहिए.आभार हमें आप पर गर्व है कैप्टेन लक्ष्मी सहगल

    उत्तर देंहटाएं
  8. क्या बात है...एक-एक शेर चुनिन्दा लगा...

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत शानदार ग़ज़ल शानदार भावसंयोजन हर शेर बढ़िया है आपको बहुत बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  10. नहीं है “रूप” से मतलब, नहीं है रंग की चिन्ता,
    तराशा है जिसे रब ने, उसे स्वीकार करते हैं।
    बहुत बढ़िया रचा है हर बंद .

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...
    बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!
    शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  12. हाँ शास्त्री जी पाकिस्तान विचारधारा के बहुत सारे लोग हैं इस देश में जिनकी वजह से आतंक वाद सफल हो रहा है इस देश में .बढिया कटाक्ष किया है आपने इन लोगन पर ,इनमे कई सेकुलर भी मिलेंगें आपको .

    उत्तर देंहटाएं
  13. Shamshir Khaal Par Rakhkar..,
    Jabaan Ko Khaar Karate Hain..,
    Bujhaakar Shamme-Khanjar..,
    Jigar Ke Paar Karate Hain.....

    उत्तर देंहटाएं
  14. हम तो कहते कि मंदिर में रहता खुदा
    जो मंदिर में है न बो इससे जुदा
    नाम लेते ही अक्सर असर ये हुआ
    बातें बिगड़ी छड़ों में बनाई गयीं
    ख्याल बहुत सुन्दर है और निभाया भी है आपने उस हेतु बधाई
    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/

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  15. हमारी आग में तपकर, कभी पिघलेंगे पत्थर भी,
    पहाड़ों के शहर में हम, चमन गुलज़ार करते हैं।

    बहुत खूब..

    उत्तर देंहटाएं
  16. Hamaari Ye Sharaafat Hai Jajb Ham Jajbaat Karate Haib..,
    Na Samajhe Jo Vafaadaari Vo Dil Aajaar Karate Hain.....

    उत्तर देंहटाएं
  17. Sholon Men Hi Sulagakar Kabhi Pighalenge Ye Patthar..,
    Ham Sarsar Sharoron Men Chaman Khaarjaar Karate Hain.....

    उत्तर देंहटाएं
  18. Akidaa Posh Judaa Hogaa Koi Sange Khudaa Hogaa..,
    Isi Ummid Men Mam Roje Iftaar Karate Hain.....

    उत्तर देंहटाएं

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