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रविवार, 1 जुलाई 2012

"एक दिन कुँवर प्रणव सिंह के साथ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सितारगंज उपचुनाव के लिए मा.मुख्यमन्त्री विजय बहुगुणा के 
चुनाव प्रचार में सरकार के कई विधायक शामिल हुए 
और उनके लिए वोट माँगे।
आज सुबह से ही सितारगंज में 
कांग्रेस के चुनाव कार्यालय में गहमा-गहमी थी। 
मैं भी अपने मित्र और प्रदेश कांग्रेस के व्यापार प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष 
वीरेन्द्र टण्डन के साथ कार्यालय में पहुँच गया। 
यहाँ सबसे पहले हमारी मुलाकात गढ़वाल के विधायक 
सुबोध उनियाल से हुई। 
तभी मुझे हरिद्वार के विधायक और वन विकास निगम के अध्यक्ष 
मा. कुँवर प्रणव सिंह चैम्पियन का फोन आया कि 
शास्त्री जी मैं भी सितार गंज पहुँच रहा हूँ। 
उनकी प्रैस वार्ता की व्यवस्था हमने कार्यालय के पास ही बने 
मयंक होटल में करा दी।
इसके बाद हम लोग  कुँवर प्रणव सिंह चैम्पियन को 
ऐतिहासिक गुरूद्वारा नानकमत्ता साहिब में ले गये। 
वहाँ जाकर सबसे पहले हम लोग डेरा कार सेवा में गये 
जहाँ जत्थेदार बाबा तरसेम सिंह ने 
अध्यक्ष जी का स्वागत गया। 
इसके बाद मुख्य गुरूद्वारा में मत्था टेका। 
यहाँ के मैनेजर स. रंजीत सिंह ने 
मा. मन्त्री जी को सरोपा भेट किया।
इसके बाद मैनेजर स.रंजीत सिंह ने गुरूद्वारा परिसर में बने 
अज़ायबघर में स्थित चित्रों के इतिहास को विस्तार से बताया।
इस अवसर पर कुँवर साहिब ने गुरूद्वारा नानकमत्ता साहिब से जुड़े,
ऐतिहासिक स्थलों- 
दूधवाला कुआँ, 
बाउली साहिब 
और ऐतिहासिक पीपल साहिव के भी दर्शन किये।
इसके बाद हम लोग पुनः सितारगंज को प्रस्थान कर गये 
और चुनाव प्रचार में लग गये।
जहाँ उत्तराखण्ड के मा. मुख्यमन्त्री विजय बहुगुणा, 
उनके भाई शेखर बहुगुणा 
और उत्तराखण्ड पर्देश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष 
मा. यशपाल आर्य भी हमारे साथ थे।

10 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय शास्त्री जी ...इसी बहाने हम भी सब जगह का दर्शन कर लिए ...साहित्य ..राजनीति ..और कौन कौन सी नीति में हैं आप ..
    भ्रमर ५

    उत्तर देंहटाएं
  2. क्या बात है!!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 02-07-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-928 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  3. जमा सितारे इक जगह, जमा रहे हैं रंग ।

    चैम्पियन के साथ से, जीत चुनावी जंग ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. लगता है आज कल चुनावी शिरकत ज्यादा बढ़ गई है,,,

    MY RECENT POST...:चाय....

    उत्तर देंहटाएं
  5. पुन्य का काम है आवभगत करना . .बहुत सुन्दर है . बहुत बढ़िया प्रस्तुति .. .कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai

    रविवार, 1 जुलाई 2012
    कैसे होय भीति में प्रसव गोसाईं ?

    डरा सो मरा
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  6. दोहा कविता छोड़ कर, करने लगे प्रचार
    बहुगुणा, को जिताने का बना रहे आधार

    बना रहे आधार, लिया साथ चैम्पियन
    गुरुद्वारा में घुमा,पहुच गए सितार गंज

    विजय,शेखर,यशपाल,नेता थे भारी भारी
    शास्त्री लगते,राजनीत के पुराने खिलाड़ी,,,
    चर्चा मंच पर देखें,,,,

    उत्तर देंहटाएं

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