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रविवार, 22 जुलाई 2012

"आई तीजो हरियाली" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


बरस रहे हैं जमकर बादल, धरा हुई है मतवाली।
शुरू हुए रमजान मुकद्दस, आई तीजो हरियाली।।

अब आँगन में नहीं, पड़े छत के कुण्डे में झूले हैं,
सखियों के संग झूलीं बाला, मन खुशियों से फूले हैं,
मेंहदी रची हथेली, अधरों पर लगती प्यारी लाली।
शुरू हुए रमजान मुकद्दस, आई तीजो हरियाली।।

मेघ-मल्हारों के गानों से, चहका है घर और आँगन,
सोंधी-सोंधी गन्ध समायी, महका सारा वन-उपवन,
पुरवय्या के झोंके पाकर, झूम रही डाली-डाली।
शुरू हुए रमजान मुकद्दस, आई तीजो हरियाली।।

बैठी हुई घरों में अपने, बुलबुल गातीं राग मधुर,
लहराते हैं धान खेत में, झींगुर बजा रहे नूपुर,
टर्र-टर्र मेढक चिल्लाते, घटा देख काली-काली।
शुरू हुए रमजान मुकद्दस, आई तीजो हरियाली।।

परदेसों में साजन जिनके, उनको विरह सताता है,
रिमझिम मस्त फुहारों वाला, पानी आग लगाता है,
भँवरों का मीठी गुंजन भी, लगती जैसे हो गाली।
शुरू हुए रमजान मुकद्दस, आई तीजो हरियाली।।

16 टिप्‍पणियां:

  1. वाह....
    बहुत सुन्दर...
    मनभावन रचना..
    शुभकामनाएं
    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  2. बैठी हुई घरों में अपने, बुलबुल गातीं राग मधुर,
    लहराते हैं धान खेत में, झींगुर बजा रहे नूपुर,
    टर्र-टर्र मेढक चिल्लाते, घटा देख काली-काली।
    शुरू हुए रमजान मुकद्दस, आई तीजो हरियाली।।

    bahut badhiya

    उत्तर देंहटाएं
  3. बरस रहे हैं जमकर बादल, धरा हुई है मतवाली।
    शुरू हुए रमजान मुकद्दस, आई तीजो हरियाली।।बहुत सुन्दर परिवेशीय रचना यूं फिलवक्त भारत में सूखे की आशंका है . .कृपया यहाँ भी पधारें -

    ram ram bhai

    सोमवार, 23 जुलाई 2012

    अमरीका नहीं देखा उसने जिसने लास वेगास नहीं देखा

    http://veerubhai1947.blogspot.de/
    तथा यहाँ भी -

    कैसे बचा जाए मधुमेह में नर्व डेमेज से
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.co

    उत्तर देंहटाएं
  4. सोंधी सोंधी गंध समायी

    महका सारा वन उपवन

    आयी तीजो हरियाली

    बहुत ही बढिया वर्णन है सावन का

    शहर में वो आनंद तो नहीं है लेकिन

    आपकी इस कविता ने मुझे मेरे गाँव

    पहुंचा दिया धन्यवाद ।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर...
    मनभावन रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल २४/७/१२ मंगल वार को चर्चा मंच पर चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आप सादर आमंत्रित हैं

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह ... बहुत ही भावमय करती प्रस्‍तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह !! तीज और रमजान आ गए...पाक- पवित्र वातावरण है !!
    बेहद सुंदर रचना !!

    उत्तर देंहटाएं
  9. शुरू हुए रमजान मुकद्दस, आई तीजो हरियाली।।

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  10. बरस रहे हैं जमकर बादल, धरा हुई है मतवाली।
    शुरू हुए रमजान मुकद्दस, आई तीजो हरियाली।।

    sab milkar sath rahen
    yhi paigam de rahe hain tyohar.

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत मनभावन प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं

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