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सोमवार, 30 जुलाई 2012

"उलट-पलटकर देख ज़रा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


हर सिक्के के दो पहलू हैं, उलट-पलटकर देख ज़रा।
बिन परखे क्या पता चलेगा, किसमें कितना खोट भरा।।

हर पत्थर हीरा बन जाता, जब किस्मत नायाब हो,
मोती-माणिक पत्थर लगता, उतर गई जब आब हो,
इम्तिहान में पास हुआ वो, तपकर जिसका तन निखरा।
बिन परखे क्या पता चलेगा, किसमें कितना खोट भरा।।

नंगे हैं अपने हमाम में, नागर हों या बनचारी,
कपड़े ढकते ऐब सभी के, चाहे नर हों या नारी,
पोल-ढोल की खुल जाती तो, आता साफ नज़र चेहरा।
बिन परखे क्या पता चलेगा, किसमें कितना खोट भरा।।

गर्मी की ऋतु में सूखी थी, पेड़ों-पौधों की डाली,
बारिश के मौसम में, छा जाती झाड़ी में हरियाली,
पानी भरा हुआ गड्ढा भी, लगता सागर सा गहरा।
बिन परखे क्या पता चलेगा, किसमें कितना खोट भरा।।

14 टिप्‍पणियां:

  1. बिन परखे क्या पता चलेगा, किसमें कितना खोट भरा।।

    बिल्कुल सत्य वचन परखने के बाद ही तो असली पहचान होती है

    उत्तर देंहटाएं
  2. मित्र! ठीक कहा आप ने-सच है कि -
    बिना कसे कब 'सोना'-'पीतल में पाता है भेद कोंई |
    पैनी आँख से मिल पाती है किसी नाव में छेड़ कोई||
    भीतर पता क्या 'मन' में लोग छिपाए बैठे हैं-
    पढ़ें पोथियाँ म्प्ती मोटी, चाहे पढ़ लें वेद कोंई ||
    सही परख की है आप ने |

    उत्तर देंहटाएं
  3. मित्र आप ने बिल्कुल सही बात कही है !मेरा समर्थन इस तरह है --
    बिना कसे कब 'सोना'-'पीतल'में पाता है भेद कोंई ?
    पैनी आँख से मिल पाता है किसी 'नाव' में 'छेद' कोंई ||
    भीतर पता नहीं क्या 'मन'में लोग छिपाये बैठे हैं-
    पढ़ें पोथियाँ मोटी मोटी चाहे पढ़ लें 'वेद' कोंई ||
    सही परख की है आप ने |

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार को ३१/७/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चामंच पर की जायेगी आपका स्वागत है

    उत्तर देंहटाएं
  5. सही बात है परखे बिना कैसे पता ,कौन खरा कौन खोटा........

    बढ़िया रचना.
    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  6. बिलकुल सही बात बिना बरते खोट का कैसे पता चलेगा बहुत बढ़िया प्रस्तुति शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  7. खोटा यदि सिक्का होता,चलता नही बाजार में
    एक हाथ ताली नही बजती,राजनीति संसार में,,,,,

    बढ़िया प्रस्तुति शास्त्री जी,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  8. बढ़िया प्रस्तुति शास्त्री जी,आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आया,मन प्रसन्न हो गया आपको साधुबाद.

    मनोज जैसवाल

    उत्तर देंहटाएं
  9. पोल-ढोल की खुल जाती तो, आता साफ नज़र चेहरा।
    बिन परखे क्या पता चलेगा, किसमें कितना खोट भरा।...

    waah....Great expression...

    .

    उत्तर देंहटाएं
  10. जीवन का सत्‍य कई परतों के अन्‍दर छिपा रहता है, कभी आसानी से तो कभी मुश्किल से सामने आता है।

    उत्तर देंहटाएं
  11. पोल-ढोल की खुल जाती तो, आता साफ नज़र चेहरा।
    बिन परखे क्या पता चलेगा, किसमें कितना खोट भरा।।...वाह: बढ़िया प्रस्तुति शास्त्री जी,,,,आभार

    उत्तर देंहटाएं

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