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सोमवार, 16 जुलाई 2012

"आज फिर सत्रह दोहे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

1400 वीं पोस्ट
भारत माँ के वास्तेहुए पुत्र बलिदान।
ऐसे बेटों पर सदामाता को अभिमान।१।

दिल से जो है निकलतीवो ही करे कमाल।
बेमन से लिक्खी हुईकविता बने बबाल।२।

राजनीति के खेल मेंकुटिल चला जो चाल।
उसकी जय-जयकार हैउसका ही सब माल।३।

चलते-चलते सफर मेंबन जाते संयोग।
कुछ सुख को देते यहाँकुछ फैलाते रोग।४।

फल-सब्जी को खाइएनिखर जाएगा रंग।
तला-भुना खाकर नहींहोता निर्मल अंग।५।

सीमित शब्दों में कहोसीधी-सच्ची बात।
जली-कटी कहकर कभीदेना मत आघात।६।

उपादान के मर्म कोसमझाते हम आज।
धर्म और सत्कर्म सेसुधरे देश-समाज।७।

अनाचार को देखकरलोग हो रहे मौन।
नौका लहरों में फँसीपार लगाये कौन।८।

तीन पंक्तियाँ कर रही, दिल पर सीधा वार।
जापानी है हाईकू, करता तीखी मार।९।

सदा कलम से हारतीतोप और तलवार।
सबसे तीखी विश्व मेंशब्दों की है मार।१०।

जो दिल से निकले वहीसच्चे हैं अशआर।
सच्चे शेरों से सभीकरते प्यार अपार।११।

मानव दानव बन रहाकरता कृत्य जघन्य।
सजा मौत से कम नहींइनको हो अनुमन्य।१२।

जिसकी जैसी सोच हैवैसी उसकी होड़।
कोई मद्धम चल रहाकोइ लगाता दौड़।१३।

हास और परिहास सेमिलता है आनन्द।
लम्बे जीवन के लिएसूत्र यही निर्द्वन्द।१४।

सोच-सोच में हो गईअपनी उम्र तमाम।
थोड़ी सी है ज़िन्दगीकैसे होंगे काम।१५।

सावन सूखा हो रहानहीं बरसते नीर।
निर्धनश्रमिक-किसान कामन हो रहा अधीर।१६।

मिल जाता जब किसी कोउसके मन का मीत।
अंग-अंग में थिरकताप्यारभरा संगीत।१७।

16 टिप्‍पणियां:

  1. सावन है बारिश
    बाहर बादल बरसते हैं
    अंदर बनते हैं
    दोहे खूबसूरत
    यहाँ बरसते हैं
    बार बार बरसते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बढ़िया दोहे-
    एक पंथ दो काज |
    संग्रह भी जरुरी है-
    सादर ||

    उत्तर देंहटाएं
  3. वैसे राजनीति सत्ता का कोई नहीं हमें ज्ञान

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपके मिलेजुले दोहों की धार बहुत तेज़ रहती हैं

    उत्तर देंहटाएं
  5. एक से बढकर एक दोहे, बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर.बहुत बढ़िया दोहे...

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत बढ़िया सार्थक दोहे....

    आपका आभार
    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत बढ़िया सार्थक दोहे....

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत खूब दोहे शास्त्री जी। आपने लगभग हर क्षेत्र मे अपना अनुभव न दोहों के माध्यम से दर्शाया है। बहुत ही सुंदर प्रस्तुती। प्रतीक संचेती

    उत्तर देंहटाएं
  10. थोडा अर्थ भी खोले ताकि अन्‍य को समझ मे आये शानदार पोस्‍ट
    युनिक ब्ला{ग ----- फेसबुक टाईमलाईन

    उत्तर देंहटाएं
  11. सदा कलम से हारती, तोप और तलवार।
    सबसे तीखी विश्व में, शब्दों की है मार !

    सच कहा आपने ...
    आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  12. ये हैं सेहत के नुस्खे शास्त्री जी ,परिवेशी दोहे तो हैं ही सार्थक व्यंजना लिए हैं जीवन और जगत की अपने पूरे परिवेश की .

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत ही सुन्दर और प्रेरक दोहे, १४०० वीं पोस्ट के लिये बधाई..

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत ही प्रेरक और सार्थक दोहे तो है ही..साथ में धारदार भी, १४०० वीं पोस्ट के लिये बधाई..

    उत्तर देंहटाएं

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