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शनिवार, 28 जुलाई 2012

"घास खाना जानते हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


हम गधे इस देश के है, घास खाना जानते हैं।
लात भूतों के सहजता से, नहीं कुछ मानते हैं।।

मुफ्त का खाया हमॆशा, कोठियों में बैठकर.
भाषणों से खेत में, फसलें उगाना जानते हैं।

कृष्ण की मुरली चुराई, गोपियों के वास्ते,
रात-दिन हम, रासलीला को रचाना जानते हैं।

राम से रहमान को, हमने लड़ाया आजतक,
हम मज़हव की आड़ में, रोटी पकाना जानते हैं।

देशभक्तों को किया है, बन्द हमने जेल में,
गीदड़ों की फौज से, शासन चलाना जानते हैं।

सभ्यता की ओढ़ चादर, आ गये बहुरूपिये,
छद्मरूपी रूपसे, दौलत कमाना जानते हैं।

20 टिप्‍पणियां:

  1. राम से रहमान को, हमने लड़ाया आजतक,
    हम मज़हव की आड़ में, रोटी पकाना जानते हैं।

    एक दम सही लिखा हैं ......सटीक लेखन

    उत्तर देंहटाएं
  2. देशभक्तों को किया है, बन्द हमने जेल में,
    गीदड़ों की फौज से, शासन चलाना जानते हैं।

    अच्छी बात है.

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह शाश्त्री जी आप की लेखनी ने सार्थकता की ताकत को बखूबी वयां किया है
    आपकी लेखनी को हमारा कोटि कोटि नमन !
    हृदय तक इन शव्दों की पुकार पहुँच गयी है
    मुफ्त का खाया हमॆशा, कोठियों में बैठकर.
    भाषणों से खेत में, फसलें उगाना जानते हैं।

    कृष्ण की मुरली चुराई, गोपियों के वास्ते,
    रात-दिन हम, रासलीला को रचाना जानते हैं।

    राम से रहमान को, हमने लड़ाया आजतक,
    हम मज़हव की आड़ में, रोटी पकाना जानते हैं।

    देशभक्तों को किया है, बन्द हमने जेल में,
    गीदड़ों की फौज से, शासन चलाना जानते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  4. देशभक्तों को किया है, बन्द हमने जेल में,
    गीदड़ों की फौज से, शासन चलाना जानते हैं।

    सुंदर व्यंग्य व कटाक्ष ....

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत खूब बढ़िया कटाक्ष,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  6. राम से रहमान को, हमने लड़ाया आजतक,
    हम मज़हव की आड़ में, रोटी पकाना जानते हैं।

    देशभक्तों को किया है, बन्द हमने जेल में,
    गीदड़ों की फौज से, शासन चलाना जानते हैं।

    राजनीतिक विद्रूप पर बेहतरीन टिपण्णी .

    उत्तर देंहटाएं
  7. हम गधे भारत के हैं ,हम घास खाना जानतें हैं ,

    जो मिलेगा हुक्म हम उसको बजाना जानतें हैं .

    उत्तर देंहटाएं
  8. उत्कृष्ट प्रस्तुति आज बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  9. मुफ्त का खाया हमॆशा, कोठियों में बैठकर.
    भाषणों से खेत में, फसलें उगाना जानते हैं।

    गज़ब गज़ब गज़ब पूरी रचना शानदार

    उत्तर देंहटाएं
  10. छद्मरूपी “रूप” से, दौलत कमाना जानते हैं।

    --- ये रूप क्या व कौन है.....

    उत्तर देंहटाएं
  11. हम तो हैं बिल्कुल ये ही वाले !

    उत्तर देंहटाएं
  12. सुंदर व्यंग्य .....सुंदर रचना |

    उत्तर देंहटाएं

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