"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

गुरुवार, 12 जुलाई 2012

"सावन के दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


जंगल में मंगल हुआ, हरा-भरा परिवेश।
वन की आभा दे रही, हमको ये सन्देश।१।

बालक बैठे ले रहे, वर्षा का आनन्द।
भीनी-भीनी आ रही, पौधों में से गन्ध।२।

सावन आया झूम के, पड़ती सुखद फुहार।
तन-मन को शीतल करे, बहती हुई बयार।३।

मक्का फूली खेत में, पके डाल पर आम।
जामुन गदराने लगी, डाली पर अभिराम।४।

चारों ओर बिछा हुआ, हरा-हरा कालीन।
पौधों को जीवन मिला, खुश हैं जल में मीन।५।

बया चहकती नीड़ में, चिड़िया मौज मनाय।
पौध धान की शान से, लहर-लहर लहराय।६।

काँवड़ लेने चल पड़े, भक्त शम्भु के द्वार।
बम-भोले के नाम की, होती जय-जयकार।७।

मानसरोवर जा रहे, जत्थों में कुछ लोग।
शिवजी को कैलाश में, चले लगाने भोग।८।

14 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी प्रस्तुति का असर ।

    बनी है शुक्रवार की खबर ।

    उत्कृष्ट प्रस्तुति चर्चा मंच पर ।।

    आइये-

    सादर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह वाह बहुत सुन्दर दोहे सावन की ऋतु सार्थक हो उठी शब्दों में

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह...
    बढ़िया दोहे...

    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह! वाह! बहुत सुन्दर दोहे...

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर दोहे हैं शास्त्री जी...आपसे प्रेरित होकर मैंने भी लिखे हैं..पंखुडियां पर http://archanat18.blogspot.in/2012/07/blog-post_12.html

    उत्तर देंहटाएं
  6. सावन के दोहो से सजी,पढ़ने में है श्रेष्ट
    हर दोहे अच्छे लगे ,बढ़िया सुन्दर बेस्ट,,,,,,

    बहुत सुंदर प्रस्तुति,,,,

    RECENT POST...: राजनीति,तेरे रूप अनेक,...

    उत्तर देंहटाएं
  7. चले लगाने भोग,भक्त अपने भगवन को
    प्रभु वंदन में महादेव को स्व अर्पण को

    उत्तर देंहटाएं
  8. मक्का फूली खेत में, पके डाल पर आम।
    जामुन गदराने लगी, डाली पर अभिराम।४

    बहुत सुन्दर सावन काव्यात्मक दोहावली .

    उत्तर देंहटाएं
  9. चित्र और शब्द, दोनों ही मस्ती टपका रहे हैं।

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails