जंगल में मंगल हुआ, हरा-भरा परिवेश। वन की आभा दे रही, हमको ये सन्देश।१। बालक बैठे ले रहे, वर्षा का आनन्द। भीनी-भीनी आ रही, पौधों में से गन्ध।२। सावन आया झूम के, पड़ती सुखद फुहार। तन-मन को शीतल करे, बहती हुई बयार।३। मक्का फूली खेत में, पके डाल पर आम। जामुन गदराने लगी, डाली पर अभिराम।४। चारों ओर बिछा हुआ, हरा-हरा कालीन। पौधों को जीवन मिला, खुश हैं जल में मीन।५। बया चहकती नीड़ में, चिड़िया मौज मनाय। पौध धान की शान से, लहर-लहर लहराय।६। काँवड़ लेने चल पड़े, भक्त शम्भु के द्वार। बम-भोले के नाम की, होती जय-जयकार।७। मानसरोवर जा रहे, जत्थों में कुछ लोग। शिवजी को कैलाश में, चले लगाने भोग।८। |
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वाह वाह बहुत सुन्दर दोहे सावन की ऋतु सार्थक हो उठी शब्दों में
जवाब देंहटाएंवाह ... बहुत खूब।
जवाब देंहटाएंवाह...
जवाब देंहटाएंबढ़िया दोहे...
सादर
अनु
वाह! वाह! बहुत सुन्दर दोहे...
जवाब देंहटाएंसादर
क्या बात है
जवाब देंहटाएंबढिया दोहे
बहुत सुंदर दोहे हैं शास्त्री जी...आपसे प्रेरित होकर मैंने भी लिखे हैं..पंखुडियां पर http://archanat18.blogspot.in/2012/07/blog-post_12.html
जवाब देंहटाएंसावन के दोहो से सजी,पढ़ने में है श्रेष्ट
जवाब देंहटाएंहर दोहे अच्छे लगे ,बढ़िया सुन्दर बेस्ट,,,,,,
बहुत सुंदर प्रस्तुति,,,,
RECENT POST...: राजनीति,तेरे रूप अनेक,...
चले लगाने भोग,भक्त अपने भगवन को
जवाब देंहटाएंप्रभु वंदन में महादेव को स्व अर्पण को
मक्का फूली खेत में, पके डाल पर आम।
जवाब देंहटाएंजामुन गदराने लगी, डाली पर अभिराम।४
बहुत सुन्दर सावन काव्यात्मक दोहावली .
आनन्द आ गया !
जवाब देंहटाएंचित्र और शब्द, दोनों ही मस्ती टपका रहे हैं।
जवाब देंहटाएंkhoobsoorat dohe guru jee!
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