"घर आयी है राजदुलारी"बैशाखी के पावन पर्व पर मेरे शिष्य सुरेन्द्र 'मुल्हिद' के घर प्यारी बिटिया इस अवसर पर 'मुल्हिद' जीऔर उनकी धर्मपत्नी कोढेरों शुभकामनाएँ! 'सिफत' को शुभाशीष के साथ-साथ यह रचना भी उपहार में दे रहा हूँ!![]() कितनी कोमल-कितनी प्यारी। घर आयी है राजदुलारी।। दीवारें कितनी उदास थीं सूना-सूना घर-आँगन था, प्यारी बिटिया बिना तुम्हारे, खाली-खाली सा जीवन था, चहक उठा है उपवन सारा- महक उठी है बगिया सारी। घर आयी है राजदुलारी।। पहली बार पिता बनने का, तुमसे ही सौभाग्य मिला है, जीवन के इस वीराने में, चम्पा जैसा सुमन खिला है, गूँज उठी शहनाई जैसी, नन्ही कलिका की किलकारी। घर आयी है राजदुलारी।। देता शुभआशीष तुम्हें मैं, सदा स्वस्थ-प्रसन्न रहो तुम, 'मुल्हिद' समतल-भूतल में, बनकर जल की धार बहो तुम, तुम बहार बनकर आयी हो, 'सिफत' तुम्हीं तो हो फुलवारी। घर आयी है राजदुलारी।। |
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मिला सिफत को ढेर सा, गुरुवर का आशीष |
जवाब देंहटाएंगुरु नानक की है कृपा , हो सबसे इक्कीस || ,
वाह शास्त्री जी ममतामय फोटो चित्र और विवरण, साथ ही आपकी काव्यमय आशीर्वचन, आनन्द आ गया.
जवाब देंहटाएंवाकई आनन्दमयी है सिफत !
जवाब देंहटाएंकिसे अधिक सुन्दर कहूँ -सिफ़त या उससे प्रेरित कविता !
जवाब देंहटाएंसिफत को सस्नेह आशीर्वाद,,,और बहुत२ प्यार,,,,,,
जवाब देंहटाएंबढिया है
जवाब देंहटाएंसुंदर :)
जवाब देंहटाएंममतामय फोटो चित्र और विवरण,
जवाब देंहटाएंसिफत को सस्नेह आशीर्वाद..............
और बहुत२ प्यार.......
बहुत प्यारी है सिफत.... सुंदर पंक्तियाँ रची हैं आपने....
जवाब देंहटाएंप्यारी प्यारी राजदुलारी...ढेर सारा प्यार...
जवाब देंहटाएंभावमय करते शब्दों का संगम ... अनुपम प्रस्तुति ।
जवाब देंहटाएंमुबारक हो !
जवाब देंहटाएंप्यार और दुलार !
सिफ़त को ढेरों आशीर्वाद ………
जवाब देंहटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंaadarneey guru ji
जवाब देंहटाएंaapka aashirwaad paa ke meri bitiya dhanya ho gayee aur aap sabhi ke ashirwaad se wo bahut unnati kare yehi meri kaamna hai, aapko mil ke jeevan safal ho gaya!
aabhaar!
शास्त्री जी आपके लिए .....बहुत खूब ...और सिफत के लिए शुभ आशीष
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