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सोमवार, 2 मई 2011

"कुण्डलियाँ-चीयर्स बालाएँ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


चीयर्स बालाएँ 

(१)
सुन्दरियाँ इठला रहीं, रन वर्षा के साथ।
अंग प्रदर्शन कर रहीं, हिला-हिला कर हाथ।।
हिला-हिला कर हाथ, खूब मटकाती कन्धे।
खुलेआम मैदान, इशारे करतीं गन्दे।।
कह मयंक कविराय, हुई नंगी बन्दरियाँ।
लाज-हया को छोड़, नाचती हैं सुन्दरियाँ।। 

(२)
आई कैसी सभ्यता, फैला कैसा रोग।
रँगे विदेशी रंग में, भारत के अब लोग।।
 भारत के अब लोग, चले हैं राह वनैली,
उपवन में उग रही, आज है घास विषैली।।
कह मयंक कविराय, वतन में आँधी छाई।
घटे बदन के वसन, सभ्यता कैसी आई।।

33 टिप्‍पणियां:

  1. आज की विद्रूपताओं पर गहरा कटाक्ष किया है…………बहुत बढिया।

    उत्तर देंहटाएं
  2. भारत के अब लोग, चले हैं राह वनैली,

    उपवन में उग रही, आज है घास विषैली ।।

    बहुत सटीक अभिव्यक्ति .... सचमुच जो कुछ हो रहा है वह हमारी संस्कृति के विपरीत है ....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही प्रभावशाली एवं सत्य को आईना दिखाती दोनों ही कुण्डलियाँ वर्तमान स्थित पर करारा कटाक्ष हैं !

    उत्तर देंहटाएं
  4. आज की विद्रूपताओं पर गहरा कटाक्ष किया है…………बहुत बढिया।

    Vandana ji se sahmat.

    उत्तर देंहटाएं
  5. uttam..........

    bahut sundar !

    kundliyan bhi aur sundariyan bhi

    उत्तर देंहटाएं
  6. जोरदार कटाक्ष, पर हम नहीं सुधरेंगे ....

    उत्तर देंहटाएं
  7. aapki dono kundaliyan vyangaatmaak bhaav se autprot bahut uttam lagi.sach me bheed jutaane ke liye itne nimn star tak gir jaayenge ye prabandhak sharm aati hai sochkar.match pahle bhi hote the tab kya darshak kum aate the???shasti ji meri kavita satya ka vlupt astitv ko aapke precious comment ka intjaar hai.next post tabhi daalungi.

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सटीक कटाक्ष...बहुत सुन्दर कुण्डलियाँ..

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुन्दर कुंडलिया ... एक अच्छा सन्देश ..और समाज में फैले इस अर्धनग्नता के रोग पर एक सही और गहरा कटाक्ष ... बल्कि जो लाज छोड़ दे वो सुंदरी की श्रेणी में कहीं भी नहीं...

    उत्तर देंहटाएं
  10. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  11. सटीक और तीखा कटाक्ष ....अच्छी प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  12. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 03- 05 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  13. आज के हालात पर बहुत गहरा कटाक्ष ... अति सुंदर

    उत्तर देंहटाएं
  14. बेहद प्रभावशाली कुंडलियाँ.

    उत्तर देंहटाएं
  15. नया तन्त्र है ट्वेन्टी ट्वेन्टी,
    रूहें घूमे भटकी भटकी।

    उत्तर देंहटाएं
  16. लाज-हया को छोड़, नाचती हैं सुन्दरियाँ।।
    bahut sahi vivran......

    उत्तर देंहटाएं
  17. शास्त्री जी इस घोर कलियुग में
    कैसा अनर्थ कर रहें हैं आप
    चीयर्स बालाओं पर कुण्डलियाँ लिख
    उनके दीवानों का क्यूँ ले रहें है शाप
    बंदरों से पूछो बंदरियायें क्या होती हैं
    आप क्या जाने उनकी मस्त अदाएं
    किस किस को डुबोती हैं.

    बलात्कार,नारी शोषण आदि क्या अश्लीलता इनमें
    सहायक नहीं ? परन्तु, मजे के नाम पर सभी तो
    इसमें डूबे हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  18. उन लोगों की बुद्धि पर तरस आता है जो खेल के लिए ऐसी सुन्दरियों का मैदान पर होना आवश्यक समझते हैं ...

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत सटीक अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

    उत्तर देंहटाएं
  20. बहुत तीखी और कटाक्षमय कुंडलियां...
    एकदम ठीक कहा है आपने...

    उत्तर देंहटाएं
  21. बहुत ही प्रभावशाली आज की इन बालाओं का सही आईना दिखाती कुन्डलियाँ। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  22. बहुत सुन्दर ठंग से आज के माहोल पर कटाक्ष किया है ।

    उत्तर देंहटाएं
  23. वाह, क्या बात है!
    --
    बंदरियाँ, सुंदरियाँ और कुंडलियाँ
    का तालमेल बहुत प्रभावशाली है!

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  24. शाश्त्री जी आपके द्वारा दी गई बंदरियों के फोटो को बन्दर तांक झाँक में लगे हैं,जरा संभाल कर रख लीजियेगा ,फोटो ही उडा न ले जाएँ.

    उत्तर देंहटाएं
  25. 'कह मयंक कविराय , हुई नंगी बन्दरियाँ |

    लाज हया को छोड़ , नाचती हैं सुंदरियां |

    .................................बहुत सटीक रचना शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  26. रूपचंद्र जी,
    सभ्यता संस्कृति की विद्रूपता पर बहुत अच्छा कटाक्ष किया है. सच है कि हमारे देश की संकृति ऐसी न थी लेकिन ये भी सच है कि आज लोग इनको पसंद कर रहे तभी ये क्रिकेट के मैदान में नाच रही. बदलाव हमारी सोच में हो तभी तो संस्कृति बचे. बहुत अच्छा likha है, बधाई स्वीकारें.

    उत्तर देंहटाएं
  27. आज के भोंडे प्रदर्शन पर तीखा प्रहार !

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  28. उत्तम कुंडलियों के द्वारा सटीक विश्लेषण...

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  29. सत्य हे --और सत्य को उजागर करना हमारा कर्तव्य है
    यह हमारी संस्क्रति नही है ?

    उत्तर देंहटाएं
  30. सच बात है ,अत्यंत अशोभनीय एवं किसी भी दृष्टि से रोचक तो नहीं ही लगती हैं ये "चियर-गर्ल्स"

    उत्तर देंहटाएं

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