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शनिवार, 7 मई 2011

"दर्शन पाकर धन्य हुआ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


 
इन्तजार जिसका था, उसके दर्शन पाकर धन्य हुआ।
तप करने के बाद भक्त का, आराधन अनुमन्य हुआ।।

प्रश्नपत्र थे कठिन, मगर हल करना भी थी मजबूरी,
तन और मन से मैंने, अपनी शक्ति लगा दी थी पूरी,
अब तो जाना-पहचाना सा, दुर्गम-सुगम अरण्य हुआ।
तप करने के बाद भक्त का, आराधन अनुमन्य हुआ।।

एक झलक पाने को, जाने कितने जन्म लिए मैंने,
अमृत की चाहत में, जाने कितने गरल पिये मैंने,
श्रापों से जब मुक्त हुआ तो, प्यार अगाध अनन्य हुआ।
तप करने के बाद भक्त का, आराधन अनुमन्य हुआ।।

मैं हूँ लीन साधना में, जग कहता है मुझको पागल,
रस-छन्दों से भर दी तुमने, मेरे शब्दों की छागल,
नामरूपथा पर कुरूप था, अब कुछ-कुछ लावण्य हुआ।
तप करने के बाद भक्त का, आराधन अनुमन्य हुआ।। 

19 टिप्‍पणियां:

  1. itni pyaari aradhna ki pahli tippani kar mai bhi dhanya hui.bahut bhaavpoorn aradhna.naman.

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  2. "एक झलक पाने को, जाने कितने जन्म लिए मैंने ,

    अमृत की चाहत में,जाने कितने गरल पिए मैंने,

    ........................................................................

    .......................................................................

    नाम 'रूप' था पर कुरूप था, अब कुछ-कुछ लावण्यहुआ |

    तप करने के बाद भक्त का, आराधन अनुमन्य हुआ |"



    .......................अंतस्तल से माँ का आराधन

    ....सुमधुर ,ह्रदयश्पर्सी, लयबद्ध ,छंदबद्ध,प्रवाहपूर्ण एवं पूर्ण समर्पण भाव का सुन्दर गीत

    उत्तर देंहटाएं
  3. साक्षात् सरस्वती माँ के दर्शन हुए ..सुन्दर गीत

    उत्तर देंहटाएं
  4. एक झलक पाने को, जाने कितने जन्म लिए मैंने,
    अमृत की चाहत में, जाने कितने गरल पिये मैंने,
    श्रापों से जब मुक्त हुआ तो, प्यार अगाध अनन्य हुआ।
    तप करने के बाद भक्त का, आराधन अनुमन्य हुआ।।
    अत्यंत सुन्दर पंक्तियाँ! ख़ूबसूरत और दिल को छू लेने वाली गीत!

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  5. आपकी यह रचना पढ़कर मैं भी धन्य हुआ...

    उत्तर देंहटाएं
  6. तप करने के बाद भक्त का, आराधन अनुमन्य हुआ।।
    अत्यंत सुन्दर पंक्तियाँ!

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  7. माँ की असीम कृपा है आप पर और ये इसी प्रकार बनी रहे…………बेहद खूबसूरत आराधना है……………।

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  8. आदरणीय डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री जी
    नमस्कार !
    सुन्दर पंक्तियाँ.....ख़ूबसूरत गीत!

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  9. माँ की कृपा इसी प्रकार बनी रहे हम सब पर

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  10. इसी तरह दर्शन होते रहे ...तथास्तु !देवी की कृपा बनी रहे

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  11. बहुत बढ़िया ....सुंदर स्तुति माँ शारदा की .....

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  12. नाम“रूप”था पर कुरूप था, अब कुछ-कुछ लावण्य हुआ। तप करने के बाद भक्त का, आराधन अनुमन्य हुआ।।
    मन मगन हों गया शास्त्री जी आपकी भक्तिमय प्रस्तुति को पढ़ कर.आपके भक्ति भाव अनुपम है.सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बहुत बहुत आभार.

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  13. भक्ति भाव से परिपूर्ण गीत.. हमेशा की तरह!!

    उत्तर देंहटाएं

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