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गुरुवार, 26 मई 2011

"सितारे टूट गये हैं...." (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

क्यों नैन हुए हैं मौन,
आया इनमें ये कौन?

कि आँसू रूठ गये हैं...!
सितारे टूट गये हैं....!!

थीं बहकी-बहकी गलियाँ,
चहकी-चहकी थीं कलियाँ,
भँवरे करते थे गुंजन,
होठों का लेते चुम्बन,
ले गया उड़ाकर निंदिया,
बदरा बन छाया कौन,
कि सपने छूट गये हैं....!
सितारे टूट गये हैं....!!

जब वो बाँहे फैलाते,
हम खुद को रोक न पाते,
बढ़ जाती थी तब धड़कन
अंगों में होती फड़कन,
खो गया हिया का चैन,
कि छाले फूट गये हैं....!
सितारे टूट गये हैं....!!

रसभरी प्रेम की बतियाँ,
हँसती-गाती वो रतियाँ,
मदमस्त हवा के झोंखे,
आने से किसने रोके,
आशिक बनकर दिन-रैन,
जवानी लूट गये हैं।
सितारे टूट गये हैं....!!

33 टिप्‍पणियां:

  1. थीं बहकी-बहकी गलियाँ,चहकी-चहकी थीं कलियाँ,
    भँवरे करते थे गुंजन,होठों का लेते चुम्बन,
    ले गया उड़ाकर निंदिया,बदरा बन छाया कौन

    सुन्दर,अनुपम प्रस्तुति.
    माँ सरस्वती की कृपा है आपपर.

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut rochak shrangaar ras se autprot laajabab geet.suparb.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं
  4. यह तो आपने एक नई शुरूआत कर दी है!
    --
    चित्रपट के लिए आपके गीत
    शीघ्रातिशीघ्र स्वीकृत होंगे,
    इस बात का कोई दूसरा विकल्प नहीं है!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत रसीला गीत है यह और इसे फ़िल्मी पार्टी ने ले भी लिया है क्योंकि फ़िल्म वालों को तो श्रृंगार रस की तलाश रहती ही है और अच्छे गीतों को उनके यहां टोटा पड़ गया है। फ़िल्मों में आजकल जो गीत ग़ज़ल प्रयोग किए जा रहे हैं उनके बोल बहुत आसान होते हैं और यह ख़ूबी भी इस गीत में है।
    आपकी ख़ुशी का यह क्षण आपको मुबारक हो। ख़ुशी का कोई छोटे से छोटा पल भी छोटा नहीं होता।
    इसे एन्जॉय करना चाहिए आपको।
    आपने अपनी ख़ुशी हमारे साथ शेयर की, इसके लिए हम आपके शुक्रगुज़ार हैं।

    कट्टरपंथी विचारधारा का एक और नमूना!

    उत्तर देंहटाएं
  6. जब वो बाँहे फैलाते,
    हम खुद को रोक न पाते,
    बढ़ जाती थी तब धड़कन
    अंगों में होती फड़कन,
    खो गया छबीला रसिया,
    कि छाले फूट गये हैं....

    बहुत सुन्दर भावमयी रचना..अद्भुत शब्दों और भावों का प्रवाह..

    फिल्म जगत में आपका प्रवेश मंगलमय हो और साहित्यिक रचनाएँ भी फिर से फिल्म जगत में अपना स्थान पायें यही हार्दिक शुभकामना है..बहुत बहुत बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  7. जब वो बाँहे फैलाते,
    हम खुद को रोक न पाते,
    बढ़ जाती थी तब धड़कन
    अंगों में होती फड़कन,
    खो गया हिया का चैन,
    कि छाले फूट गये हैं....!
    सितारे टूट गये हैं....!!

    बहुत सुंदर रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुंदर, बहुत सुंदर।

    बदल रहे समय का स्पष्ट प्रभाव प्रेम की अवधारणा पर देखने को मिलता है। एक ओर जहां नैतिकताओं और मर्यादाओं से लुकाछिपी है तो दूसरी ओर स्वच्छंदताओं के लिए नया संसार बनाने का प्रयास है।

    उत्तर देंहटाएं
  9. अच्छी कविता है !
    ! जय गणेश !
    HTTP://ADHYATMJYOTISHDARSHAN.BLOGSPOT.COM/

    उत्तर देंहटाएं
  10. निःशब्द हूँ शास्त्री जी - वाह वाह लाजवाब

    "खो गया हिया का चैन,
    कि छाले फूट गये हैं....!
    सितारे टूट गये हैं....!!"

    उत्तर देंहटाएं
  11. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  12. जब वो बाँहे फैलाते,
    हम खुद को रोक न पाते,
    बढ़ जाती थी तब धड़कन
    अंगों में होती फड़कन,
    खो गया हिया का चैन,
    कि छाले फूट गये हैं....!
    सितारे टूट गये हैं....!!
    बहुत ही सुंदर गीत लिखा हे शास्त्री जी ...मुबारक हो आपको यह नई राह गुजर ..

    उत्तर देंहटाएं
  13. बिलकुल सही ! बहुत सुन्दर कविता का प्रवाह मानो झरना फूट रहा हो
    फिल्म जगत में आपका प्रवेश मंगलमय हो
    और साहित्यिक रचनाएँ भी फिर से फिल्म जगत में अपना स्थान पायें
    यही हार्दिक शुभकामना है..
    बहुत बहुत बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  14. भावाभिव्यक्ति ने हिंदी के सौंदर्य को मुखरित कर दिया है.अनुपम रचना का रसास्वादन कराने हेतु आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  15. खूबसूरत दिल की गहराइयों तक उतर जाने वाली कलम चलाई है आपने गुरु जी!

    उत्तर देंहटाएं
  16. फिर तो बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें अब तो आपके गीत फ़िल्मो मे भी सुनाई देंगे।

    उत्तर देंहटाएं
  17. रसभरी प्रेम की बतियाँ,
    हँसती-गाती वो रतियाँ,
    मदमस्त हवा के झोंखे,
    आने से किसने रोके,
    bahut sunder geet.badhaai aapko philmo main bhi geet prastut karane ke liye.wakai badiyaa geet haai sabko pasand aayegaa.shubkamnaayen.


    please visit my blog and leave a comments also.

    उत्तर देंहटाएं
  18. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति... बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  19. मै आपसे माफ़ी चहुँगा.
    मै लगातार यहाँ नहीं आ पाता हूँ.
    रचना बहुत खूबसूरत है.

    उत्तर देंहटाएं

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