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शुक्रवार, 20 मई 2011

"चाँद को बादलों से रिहा कीजिए" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"


  

कुछ सुना कीजिए, कुछ कहा कीजिए!
मौन इतना कभी मत रहा कीजिए!!

गम को मिल-बाँटकर, बोझ हल्का करो,
बात पर बेहिचक तप्सरा कीजिए!

जिन्दगी एक मुश्किल भरा फलसफा,
प्यार से दिल लगाकर पढ़ा कीजिए!

मुद्दतों बाद गुलशन में गुल हैं खिले,
देख कर के बगीचा हँसा कीजिए!

दिल नहीं कम है दैरो-हरम से प्रिये!
रोज ही इसमें आते रहा कीजिए!

गैर तुम भी नहींगैर हम भी नही,
चाँद को बादलों से रिहा कीजिए!

"रूप" थोड़े ही दिन का तो मेहमान है,
शीत-गर्मी भी कुछ तो सहा कीजिए!

49 टिप्‍पणियां:

  1. "रूप" थोड़े ही दिन का तो मेहमान है,
    शीत-गर्मी भी कुछ तो सहा कीजिए!

    shashtri ji

    man anand se bhar gaya ,behatriin gazal rahi,,,,, yun kahiye ki man or aatma ek ho gayii

    bandhaii swikaren is khoobsurat gazal par or khas taur se is makte pe (I think makta hi kahte hai shayad akhiri sher ko )

    उत्तर देंहटाएं
  2. जिन्दगी एक मुश्किल भरा फलसफा,
    प्यार से दिल लगाकर पढ़ा कीजिए!
    मुद्दतों बाद गुलशन में गुल हैं खिले,
    देख कर के बगीचा हँसा कीजिए!
    वाह! क्या बात है! बहुत खूब लिखा है आपने! सटीक पंक्तियाँ!

    उत्तर देंहटाएं
  3. गैर तुम भी नहीं, गैर हम भी नही,
    चाँद को बादलों से रिहा कीजिए!

    "रूप" थोड़े ही दिन का तो मेहमान है,
    शीत-गर्मी भी कुछ तो सहा कीजिए!

    बहुत अच्छी बात कही सर!

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  4. abhi abhi light aai.twitter me access kiya to aapki itni khoobsurat ghazal ke darshan hue.really subhaan allaah.aapki ye ghazal to seedhe dil me utar gai.post karne ke liye aabhar.

    उत्तर देंहटाएं
  5. मन नहीं कम है दैरो-हरम से प्रिये!
    रोज ही इसमें आते रहा कीजिए! in lino ka to jabab nahi.

    उत्तर देंहटाएं
  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  7. गैर तुम भी नहीं, गैर हम भी नही,
    चाँद को बादलों से रिहा कीजिए!

    "रूप" थोड़े ही दिन का तो मेहमान है,
    शीत-गर्मी भी कुछ तो सहा कीजिए.kya kahun main itane sunder shabdon ke saath itanaa achcha ahesaas liye bahut hi anoothi gajal.badhaai aapko.

    उत्तर देंहटाएं
  8. शास्त्री जी
    प्रणाम !
    आपका ग़ज़लकार तरक़्क़ी पर है मुबारकबाद !
    हर शे'र कबिले-तारीफ़ है … क्या बात है !
    बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  9. बेहद खुबसुरत कविता है
    मुद्दतों बाद गुलशन में गुल हैं खिले
    ,देख कर के बगीचा हँसा कीजिए!

    उत्तर देंहटाएं
  10. जिन्दगी एक मुश्किल भरा फलसफा,
    प्यार से दिल लगाकर पढ़ा कीजिए!

    गैर तुम भी नहीं, गैर हम भी नही,
    चाँद को बादलों से रिहा कीजिए!

    शास्त्री जी आप जब बॉलीवुड के चमकते सितारे बन जायेंगे तो चाँद तो बादलों से रिहा होकर भी आपका 'रूप' देख फिर छिप जायेगा.अब तो हम न कुछ सुनेंगें न कुछ कहेंगें बस आप को प्यार से दिल लगा कर पढा करेंगें.

    उत्तर देंहटाएं
  11. "मौन इतना कभी मत रहा कीजिए"
    sar,ab to 45 degrree jhelane ka bhi sahas aa gaya hai hammein.jeevan ki kitab ko pyar se padhane ka sujhw behad umda hai.sari samasya hi khatm.
    behtareen gajal ke dwara sundar dandesh.

    उत्तर देंहटाएं
  12. जिन्दगी एक मुश्किल भरा फलसफा,
    प्यार से दिल लगाकर पढ़ा कीजिए!
    बहुत खूबसूरत गज़ल ...

    उत्तर देंहटाएं
  13. गैर तुम भी नहीं, गैर हम भी नही,
    चाँद को बादलों से रिहा कीजिए!

    "रूप" थोड़े ही दिन का तो मेहमान है,
    शीत-गर्मी भी कुछ तो सहा कीजिए

    ..............
    aaine dekhte hain ,beshaq dekhen
    khud se na koi bewafa kijiye

    kinaara mil jaayega aapko magar
    lahron ko chir kar badha kijiye

    "रूप" थोड़े ही दिन का तो मेहमान है,
    शीत-गर्मी भी कुछ तो सहा कीजिए

    शीत-गर्मी भी कुछ तो सहा कीजिए


    sunder....

    उत्तर देंहटाएं
  14. आईने देखते हैं ,बेशक देखें
    खुद से न कोई बेवफा कीजिये

    किनारा मिल जाएगा, आपको मगर
    लहरों को चीर कर बढा कीजिये


    "रूप" थोड़े ही दिन का तो मेहमान है,
    शीत-गर्मी भी कुछ तो सहा कीजिए

    शीत-गर्मी भी कुछ तो सहा कीजिए

    उत्तर देंहटाएं
  15. जिन्दगी एक मुश्किल भरा फलसफा,
    प्यार से दिल लगाकर पढ़ा कीजिए!

    शास्त्री जी अब आपसे ईर्ष्या होने लगी है कि ... मैं ऐसा क्यूं नहीं लिख सकता?

    उत्तर देंहटाएं
  16. गैर तुम भी नहीं, गैर हम भी नही,
    चाँद को बादलों से रिहा कीजिए!
    एक एक शे’र पर दिल क़ुर्बान!
    बाक़ी मुझे कुछ नहीं पता। तकनीकी बातें समीक्षक महोदय जाने। हमारा तो बए मन ख़ुश होगया
    कई बार गुनगुना लिए और क्या चाहिए हमें।

    उत्तर देंहटाएं
  17. कुछ सुना कीजिए, कुछ कहा कीजिए!
    मौन इतना कभी मत रहा कीजिए!!

    खूबसूरत मतले के साथ बेहतरीन ग़ज़ल !

    उत्तर देंहटाएं
  18. वाह वाह बहुत ही खूबसूरत...
    आजकल गज़लों पर मेहरबान हैं आप :)

    उत्तर देंहटाएं
  19. दादा उर्दू के मुश्किल शब्दो का अर्थ भी दे दिया कीजिये तभी पूरा मजा लिया जा सकेगा

    उत्तर देंहटाएं
  20. दिल नहीं कम है दैरो-हरम से प्रिये!
    रोज ही इसमें आते रहा कीजिए!

    क्या बात है शास्त्री जी,खूब कहा आपने.

    उत्तर देंहटाएं
  21. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (21.05.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

    उत्तर देंहटाएं
  22. जिन्दगी एक मुश्किल भरा फलसफा,
    प्यार से दिल लगाकर पढ़ा कीजिए!
    waah

    उत्तर देंहटाएं
  23. बहुत सुंदर |

    " चाँद से कोई बात नहीं होती ,
    थोड़े से अँधेरे से रात नहीं होती"

    उत्तर देंहटाएं
  24. कुछ सुना कीजिये ,कुछ कहा कीजिये ,
    मौन इतना कभी मत ,रहा कीजिये .बेहतरीन भाव और अंदाज़े बयाँ!
    यहाँ तो हाल ये है -
    गैरों से कहा तुमने ,गैरों को सुना तुमने ,
    कुछ हमसे कहा होता कुछ हमसे सुना होता .

    उत्तर देंहटाएं
  25. जिन्दगी एक मुश्किल भरा फलसफा,
    प्यार से दिल लगाकर पढ़ा कीजिए!


    आजकल ग़ज़लों का मौसम चल रहा है. वह भी एक से एक बढ़कर.
    --

    उत्तर देंहटाएं
  26. जिन्दगी एक मुश्किल भरा फलसफा,
    प्यार से दिल लगाकर पढ़ा कीजिए!
    शास्त्री जी जी नमस्ते ! व्यस्तता के कारण देर से आने के लिए माफ़ी चाहता हूँ.
    बहुत खूबसूरत गज़ल ......आभार

    उत्तर देंहटाएं
  27. गैर तुम भी नहीं, गैर हम भी नही,चाँद को बादलों से रिहा कीजिए....सुन्दर अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  28. aadarniy sir
    bahut bahut aanand aaya aapki is jivan se bhari post ko padhkar .jise aapne badi hi khubsurati ke saath har panktiyonse bodh karaya hai.
    जिन्दगी एक मुश्किल भरा फलसफा,
    प्यार से दिल लगाकर पढ़ा कीजिए!
    vaise to har panktiyan kuchh na kuchh sandesh de rahi hain bade hi mohak andaaz me
    par ye pankti jyada hi man ko bhaii.
    bahut bahut hardik badhai v
    sadar naman
    poonam

    उत्तर देंहटाएं
  29. गैर तुम भी नहीं, गैर हम भी नही,
    चाँद को बादलों से रिहा कीजिए!
    जबरदस्त गज़ल

    उत्तर देंहटाएं
  30. 'चाँद को बादलों से रिहा कीजिए!'
    मगर यह फरियाद किससे है,चाँद को जो कैद किये हैं वे ही मुंसिफ हैं,वे ही मुलजिम हैं इसलिए रिहाई तो मुमकिन नहीं दिखती !

    उत्तर देंहटाएं
  31. चाँद को बादलों से रिहा करने की मांग दिल को छू गयी . खास अंदाज़ की इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए
    बहुत-बहुत बधाई. हार्दिक शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  32. गैर तुम भी नहीं, गैर हम भी नही,
    चाँद को बादलों से रिहा कीजिए!

    वाह शास्त्री जी आजकल तो गज़ल मे भी चार चाँद लगा रहे हैं………………बेजोड लेखन का उत्कृष्ट नमूना है आपकी आज की गज़ल्…………गुनगुनाते रहने वाली।

    उत्तर देंहटाएं
  33. जिन्दगी एक मुश्किल भरा फलसफा,
    प्यार से दिल लगाकर पढ़ा कीजिए!
    मुद्दतों बाद गुलशन में गुल हैं खिले,
    देख कर के बगीचा हँसा कीजिए!


    बेहद शानदार लाजवाब गज़ल...
    एक-एक शे’र लाजवाब....

    उत्तर देंहटाएं
  34. ग़ज़ल पढ़ी तो झुक गया आसमाँ भी
    चाँद हो तो रोज़ इस पे चढ़ा कीजिए

    Nice .

    उत्तर देंहटाएं
  35. गैर तुम भी नहीं, गैर हम भी नही,
    चाँद को बादलों से रिहा कीजिए!
    .....वाह! क्या बात है....
    देवेंद्र गौतम

    उत्तर देंहटाएं
  36. "रूप" थोड़े ही दिन का तो मेहमान है,
    शीत-गर्मी भी कुछ तो सहा कीजिए
    बहुत सुंदर, बहुत बढ़िया अंदाज़ ।

    उत्तर देंहटाएं

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