"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

गुरुवार, 19 मई 2011

"ग़ज़ल-...न शह-मात होती" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


न मजमून लिखते, न कुछ बात होती
बताओ तो कैसे मुलाकात होती

अगर दोस्ती है तो शिकवे भी होंगे
न शक कोई होता, न कुछ घात होती

अगर तुम न प्यादे को आगे बढ़ाते
न शह कोई पड़ती, न फिर मात होती

दिखाता न सूरत अगर चाँद अपनी
न फिर ईद होती न सौगात होती

अगर तुम न छुप-छुपके मिलते चमन में
सुहानी न फिर चाँदनी रात होती

अगर "रूप" अपना दिखाते न दिलवर
न बिजली चमकती न बरसात होती

27 टिप्‍पणियां:

  1. अगर तुम न छुप-छुपके मिलते चमन में
    सुहानी न फिर चाँदनी रात होती
    वाह दादा वाह

    उत्तर देंहटाएं
  2. अगर "रूप" अपना दिखाते न दिलवर
    न बिजली चमकती न बरसात होती

    Wah !!!

    Nice .

    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/05/main-problem.html

    उत्तर देंहटाएं
  3. अगर "रूप" अपना दिखाते न दिलवर
    न बिजली चमकती न बरसात होती "

    यह रूप का ही कमाल है शस्त्री जी !
    वरना न इश्क होता न जुदाई होती ,
    न मिलते न कोई बात होती ..

    बहुत ताजगी भरी है आपकी नज्म !!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. दिखाता न सूरत अगर चाँद अपनी
    न फिर ईद होती न सौगात होती

    अगर तुम न छुप-छुपके मिलते चमन में
    सुहानी न फिर चाँदनी रात होती

    wah kya kahne bahut pyaari ghazal.prastuti ke liye aabhar.

    उत्तर देंहटाएं
  5. "न मजमून लिखते,न कुछ बात होती
    बताओ तो कैसे मुलाकात होती"
    शास्त्री जी,सच को सामने रखकर रोमांटिक होना तो कोई आपसे सीखे. सही कहा आपने प्यादे को अगर न बढ़ने दिया जाए तो शह-मात का खेल तो हो ही नहीं पायेगा.छुप-छुप के मिलने में जो मजा है उसकी दूसरी मिशाल कहाँ? यथार्थ के पोट्रेट पर उकेरी गई रूमानी तस्वीर सी है आपकी गजल.

    उत्तर देंहटाएं
  6. अगर तुम न छुप-छुपके मिलते चमन में
    सुहानी न फिर चाँदनी रात होती

    waha bahut khub....kya andaz hai aapke likhne ka....bahut hi badiya

    उत्तर देंहटाएं
  7. दिखाता न सूरत अगर चाँद अपनी
    न फिर ईद होती न सौगात होत

    बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति…………शानदार गज़ल्।

    उत्तर देंहटाएं
  8. अगर "रूप" अपना दिखाते न दिलवर
    न बिजली चमकती न बरसात होती

    वाह ..आज कल बहुत खूबसूरत गज़ल बन रही हैं ...

    उत्तर देंहटाएं
  9. शास्त्री जी आप तो ग़ज़ल में भी जलवे दिखा रहे हैं| प्रणाम|

    उत्तर देंहटाएं
  10. तभी मैं कहूँ भाई जी कि 'खटीमा' में बिजली क्यों चमकी और बरसात क्यूँ हुई.हमारी भाभीजी का 'रूप' ही कुछ ऐसा है न .
    बहुत बहुत बधाई हों भाई जी

    उत्तर देंहटाएं
  11. दिखाता न सूरत अगर चाँद अपनी
    न फिर ईद होती न सौगात होती

    ....बहुत खूब!...बेहतरीन गज़ल..आभार

    उत्तर देंहटाएं
  12. उम्दा गजल ! आभार एवं शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  13. aaha ! kya baat hai........

    naya navela she'r

    अगर तुम न प्यादे को आगे बढ़ाते
    न शह कोई पड़ती, न फिर मात होती

    bahut khoob shaastri ji.....

    badhaai

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर गजल….अगर तुम न छुप-छुपके मिलते चमन में
    सुहानी न फिर चाँदनी रात होती

    उत्तर देंहटाएं
  15. बेहतरीन गज़ल, न बिजली चमकती न बरसात होती।

    उत्तर देंहटाएं
  16. दोस्ती में सब कुछ जायज के सिवा घात के क्योंकि फिर तो वह दोस्ती कहाँ रही ?
    रोमांस का पक्ष सुन्दर है !

    उत्तर देंहटाएं
  17. न मजमून लिखते न कुछ बात होती ,
    बताओ तो कैसे मुलाक़ात होती .
    "न यूं दिन निकलता न यूं रात होती ,
    अगर तुम न होते हवालात होती "मयंक साहब !आदत सी हो गई है छेड़ खानी की ।
    आदत से मजबूर हूँ क्षमा करें . आपका हक़ बनता है .

    उत्तर देंहटाएं
  18. अगर तुम न प्यादे को आगे बढ़ाते
    न शह कोई पड़ती, न फिर मात होती
    लाजवाब!!

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails