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शनिवार, 21 मई 2011

"गीत-...मन्द-मन्द मुस्काती हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

मन के नभ पर श्यामघटाएँ, अक्सर ही छा जाती हैं।
तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।।

निन्दिया में आभासी दुनिया, कितनी सच्ची लगती है,
परियों की रसवन्ती बतियाँ, सबसे अच्छी लगती हैं,
जन्नत की मृदुगन्ध हमारे, तन-मन को महकाती है।
तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।।

दिखा दिया है कोना-कोना, घुमा-घुमाकर उपवन में,
बिछा दिया है सुखद बिछौना, अरमानों के आँगन में,
अब तो दिन में भी आँखों की, पलकें बन्द हो जातीं हैं।
तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।।

दबे पाँव वो आ जाती हैं, बिना किसी भी आहट के,
सुन्दर सुमन खिला जाती हैं, वो अलिन्द में चाहत के,
चम्पा की कलियाँ बनकर वो, मन्द-मन्द मुस्काती हैं।
तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।।

20 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूबसूरत कविता ......तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से ,स्वप्न सलोने लाती हैं ....beautiful ...वाह ....
    आप के ब्लॉग में follower बनने का लिंक नहीं है क्या ???
    अजित

    उत्तर देंहटाएं
  2. shrangar ras me doob kar likhi hai yeh adbhut rachna.swapn aur kalpana ki anokhi udaan hai.

    उत्तर देंहटाएं
  3. निन्दिया में आभासी दुनिया, कितनी सच्ची लगती है,
    परियों की रसवन्ती बतियाँ, सबसे अच्छी लगती हैं,

    बहुत खूबसूरत कविता.........

    उत्तर देंहटाएं
  4. निन्दिया में आभासी दुनिया, कितनी सच्ची लगती है,
    परियों की रसवन्ती बतियाँ, सबसे अच्छी लगती हैं,
    जन्नत मृदुगन्ध हमारे, तन-मन को महकाती है।
    तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।

    आपका फ़ोटो सामने न हो तो कोई यह नहीं कह सकता कि इतनी सारी रचनाएं इतनी गति के साथ लिखने वाला एक उम्रदराज़ आदमी है। आपके कलाम के साथ आपकी गति और ऊर्जा भी प्रशंसनीय है।
    कमाल का भाव और सुंदर प्रभाव !
    धन्यवाद !

    जागरण जंक्शन की नई सुविधा है 'Best Web Blogs'

    उत्तर देंहटाएं
  5. दबे पाँव वो आ जाती हैं, बिना किसी भी आहट के,
    सुन्दर सुमन खिला जाती हैं, वो अलिन्द में चाहत के,


    बहुत सुंदर भावों से सजी रचना ...कोमल अहसासों को सामने लाती है ....आपका आभार

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत खूबसूरत कविता| धन्यवाद|

    उत्तर देंहटाएं
  7. निन्दिया में आभासी दुनिया, कितनी सच्ची लगती है,
    परियों की रसवन्ती बतियाँ, सबसे अच्छी लगती हैं,
    जन्नत की मृदुगन्ध हमारे, तन-मन को महकाती है।
    तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।।

    बहुत ही खूबसूरत रचना ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ji aapaki rachana mand-2..ne naturopath ko natur ki sair karwadi sir sadhuwad swikar kare sir

    उत्तर देंहटाएं
  9. निन्दिया में आभासी दुनिया, कितनी सच्ची लगती है,
    परियों की रसवन्ती बतियाँ, सबसे अच्छी लगती हैं,
    जन्नत की मृदुगन्ध हमारे, तन-मन को महकाती है।
    तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।।

    बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं
  10. दबे पाँव वो आ जाती हैं, बिना किसी भी आहट के,
    सुन्दर सुमन खिला जाती हैं, वो अलिन्द में चाहत के,
    चम्पा की कलियाँ बनकर वो, मन्द-मन्द मुस्काती हैं।
    तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।।

    kyaa khub surt baat kahi he --

    उत्तर देंहटाएं
  11. स्वप्न सलोने यूँ ही सजते रहें।

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाह, बहुत सुन्दर गीत

    उत्तर देंहटाएं
  13. निन्दिया में आभासी दुनिया, कितनी सच्ची लगती है,
    परियों की रसवन्ती बतियाँ, सबसे अच्छी लगती हैं,

    बहुत खूबसूरत कविता.........

    उत्तर देंहटाएं
  14. निन्दिया में आभासी दुनिया, कितनी सच्ची लगती है,
    परियों की रसवन्ती बतियाँ, सबसे अच्छी लगती हैं,
    जन्नत की मृदुगन्ध हमारे, तन-मन को महकाती है।

    क्या कह रहें है भाया जी आप.लगता है भाभी जी को नहीं पता कि 'आपको परियों की रसवंती बतियाँ अब सबसे अच्छी लगती हैं'. सब छिपा छिपा कर ही तो नहीं चल रहा न.

    आपका 'रूप'तो अब निखर निखर सब को लुभा रहा हैं.
    शांत मन को भी तरंगित कर झुमा झुमा रहा है.

    उत्तर देंहटाएं

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