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तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।। निन्दिया में आभासी दुनिया, कितनी सच्ची लगती है, परियों की रसवन्ती बतियाँ, सबसे अच्छी लगती हैं, जन्नत की मृदुगन्ध हमारे, तन-मन को महकाती है। तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।। दिखा दिया है कोना-कोना, घुमा-घुमाकर उपवन में, बिछा दिया है सुखद बिछौना, अरमानों के आँगन में, अब तो दिन में भी आँखों की, पलकें बन्द हो जातीं हैं। तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।। दबे पाँव वो आ जाती हैं, बिना किसी भी आहट के, सुन्दर सुमन खिला जाती हैं, वो अलिन्द में चाहत के, चम्पा की कलियाँ बनकर वो, मन्द-मन्द मुस्काती हैं। तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।। |
बहुत बढ़िया सर!
जवाब देंहटाएंसादर
बहुत खूबसूरत कविता ......तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से ,स्वप्न सलोने लाती हैं ....beautiful ...वाह ....
जवाब देंहटाएंआप के ब्लॉग में follower बनने का लिंक नहीं है क्या ???
अजित
shrangar ras me doob kar likhi hai yeh adbhut rachna.swapn aur kalpana ki anokhi udaan hai.
जवाब देंहटाएंनिन्दिया में आभासी दुनिया, कितनी सच्ची लगती है,
जवाब देंहटाएंपरियों की रसवन्ती बतियाँ, सबसे अच्छी लगती हैं,
बहुत खूबसूरत कविता.........
निन्दिया में आभासी दुनिया, कितनी सच्ची लगती है,
जवाब देंहटाएंपरियों की रसवन्ती बतियाँ, सबसे अच्छी लगती हैं,
जन्नत मृदुगन्ध हमारे, तन-मन को महकाती है।
तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।
आपका फ़ोटो सामने न हो तो कोई यह नहीं कह सकता कि इतनी सारी रचनाएं इतनी गति के साथ लिखने वाला एक उम्रदराज़ आदमी है। आपके कलाम के साथ आपकी गति और ऊर्जा भी प्रशंसनीय है।
कमाल का भाव और सुंदर प्रभाव !
धन्यवाद !
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दबे पाँव वो आ जाती हैं, बिना किसी भी आहट के,
जवाब देंहटाएंसुन्दर सुमन खिला जाती हैं, वो अलिन्द में चाहत के,
बहुत सुंदर भावों से सजी रचना ...कोमल अहसासों को सामने लाती है ....आपका आभार
बहुत खूबसूरत कविता| धन्यवाद|
जवाब देंहटाएंनिन्दिया में आभासी दुनिया, कितनी सच्ची लगती है,
जवाब देंहटाएंपरियों की रसवन्ती बतियाँ, सबसे अच्छी लगती हैं,
जन्नत की मृदुगन्ध हमारे, तन-मन को महकाती है।
तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।।
बहुत ही खूबसूरत रचना ...
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ji aapaki rachana mand-2..ne naturopath ko natur ki sair karwadi sir sadhuwad swikar kare sir
जवाब देंहटाएंनिन्दिया में आभासी दुनिया, कितनी सच्ची लगती है,
जवाब देंहटाएंपरियों की रसवन्ती बतियाँ, सबसे अच्छी लगती हैं,
जन्नत की मृदुगन्ध हमारे, तन-मन को महकाती है।
तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।।
बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।
सुंदर, सरस गीत।
जवाब देंहटाएंबढ़िया गीत!
जवाब देंहटाएंsurmayee geet....
जवाब देंहटाएंदबे पाँव वो आ जाती हैं, बिना किसी भी आहट के,
जवाब देंहटाएंसुन्दर सुमन खिला जाती हैं, वो अलिन्द में चाहत के,
चम्पा की कलियाँ बनकर वो, मन्द-मन्द मुस्काती हैं।
तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से, स्वप्न सलोने लाती हैं।।
kyaa khub surt baat kahi he --
स्वप्न सलोने यूँ ही सजते रहें।
जवाब देंहटाएंउत्तम गीत...
जवाब देंहटाएंवाह, बहुत सुन्दर गीत
जवाब देंहटाएंनिन्दिया में आभासी दुनिया, कितनी सच्ची लगती है,
जवाब देंहटाएंपरियों की रसवन्ती बतियाँ, सबसे अच्छी लगती हैं,
बहुत खूबसूरत कविता.........
बेहतरीन...
जवाब देंहटाएंनिन्दिया में आभासी दुनिया, कितनी सच्ची लगती है,
जवाब देंहटाएंपरियों की रसवन्ती बतियाँ, सबसे अच्छी लगती हैं,
जन्नत की मृदुगन्ध हमारे, तन-मन को महकाती है।
क्या कह रहें है भाया जी आप.लगता है भाभी जी को नहीं पता कि 'आपको परियों की रसवंती बतियाँ अब सबसे अच्छी लगती हैं'. सब छिपा छिपा कर ही तो नहीं चल रहा न.
आपका 'रूप'तो अब निखर निखर सब को लुभा रहा हैं.
शांत मन को भी तरंगित कर झुमा झुमा रहा है.