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रविवार, 15 मई 2011

"पाँच दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

जिनके बँगलों में रहें, सुन्दर-सुन्दर श्वान।
उनको कैसे भायेंगे, निर्धन,श्रमिक,किसान।।

जन-गण-मन को भूलकर, भरते खुद का पेट।
मक्कारों ने कर दिया, भारत मटियामेट।।

राजनीति है वोट की, खोट-नोट भरमार।
पढ़े-लिखों को हाँकते, अनपढ़, ढोल-गवाँर।।

बढ़ी हुई मँहगाई से, जन-जीवन है त्रस्त।
बैठे ये सरकार में, होकर कितने मस्त।।

बिन ईंधन चलती वहीं, बाइक मोटर-कार।
साईकिल से जाइए, गाँव-गली-बाजार।।

29 टिप्‍पणियां:

  1. इतना सच भी मत लिखिए शास्त्री जी ... 'युवराज' नाराज़ हो जायेंगे !

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (16-5-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  3. यथार्थ उजागर करते दोहे.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बढ़ी हुई मँहगाई से, जन-जीवन है त्रस्त।
    बैठे ये सरकार में, होकर कितने मस्त।।

    sach kaha aapne janab .

    उत्तर देंहटाएं
  5. श्वान तो हमारे घर में भी हैं, पता नहीं गरीबों का दर्द समझ में आयेगा या नहीं।।

    उत्तर देंहटाएं
  6. समसामयिक दोहे... कहाँ सरकार पार फरक पड़ता है इन दिनों...

    उत्तर देंहटाएं
  7. पांच दोहों में शास्त्री जी,आपने किया कमाल
    कच्चा चिठ्ठा खोल सभी का,खूब बताया हाल
    सुन्दर शिक्षा देकर आपने हमें किया है निहाल
    साईकिल पर चलें तो, सेहत से जीवन हों खुशहाल

    उत्तर देंहटाएं
  8. बढ़ी हुई मँहगाई से, जन-जीवन है त्रस्त।
    बैठे ये सरकार में, होकर कितने मस्त।।
    यथार्थ .......

    उत्तर देंहटाएं
  9. बिन ईंधन चलती नहीं, बाइक मोटर-कार।
    साईकील से जाइये, गाँव गली बाजार।।
    गाँव गली बाजार, मगर साईकल ना छोड़ें
    पलक झपकते चोर, उसे भी लेकर दौड़ें

    हा हा बहुत जबरदस्त शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  10. kyaa baat hai saari duniya ko in dohon me bhr daala hai behtrin behtrin mubark ho ...akhtar khan akela kota rajsthan

    उत्तर देंहटाएं
  11. त्रस्त होने की इंतिहा है

    उत्तर देंहटाएं
  12. atoot sachchaai se paripoorn dohe.atiuttam.maja aa gaya padhkar.

    उत्तर देंहटाएं
  13. आज की परिस्थिति पर अच्छे दोहे ... अब तो लोग साईकिल पर चलें तो बेहतर होगा .. पेट्रोल के दाम जो बढ़ गए हैं .

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  14. सही कहा , अब साईकल का ही ज़माना आ गया है ।

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  15. जिनके बँगलों में रहें, सुन्दर-सुन्दर श्वान।
    उनको कैसे भायेंगे, निर्धन,श्रमिक,किसान।।
    sahi baat babu ji...bahut khoob doohe..aabhar

    उत्तर देंहटाएं
  16. राजनीति है वोट की, खोट-नोट भरमार।
    पढ़े-लिखों को हाँकते, अनपढ़, ढोल-गवाँर।।

    हम भी तो अपना लाभ देख कर इन के आगे जी हाजूरी करते हे, काम निकलने पर इन्हे गालिया देते हे,
    अति सुंदर रचना धन्यवाद

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  17. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  18. बहुत सुन्दर भावपूर्ण सटीक रचना ...आभार

    उत्तर देंहटाएं
  19. राजनीति है वोट की, खोट-नोट भरमार।
    पढ़े-लिखों को हाँकते, अनपढ़, ढोल-गवाँर।।
    बिल्कुल सही लिखा है आपने! सच्चाई को आपने बखूबी प्रस्तोत किया है! हर शेर लाजवाब लगा!

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  20. वाह ... बहुत खूब कहा है आपने ।

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  21. बहुत ही अच्छे लगे दोहे....

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  22. साईकिल से जाइए, गाँव-गली-बाजार।।
    कसरत भी और ईंधन की बचत भी ।
    हर दोहा विचारणीय और सुंदर । शुभकामनाएँ ।

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  23. साइकल से तो जाएँ पर रास्ता भी तो बताएँ!

    उत्तर देंहटाएं

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