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बुधवार, 4 मई 2011

"सारे अनुबन्ध साँचों में ढल जायेंगे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

आज ब्लॉग पर नया लगाने को तो कुछ भी नहीं है
मगर मेरे इस पुराने गीत को मेरी मुँहबोली भतीजी
अर्चना चावजी ने दोबारा से गाया है!
आप भी इस गीत का आनन्द लीजिए!


आप इक बार ठोकर से छू लो हमें,
हम कमल हैं चरण-रज से खिल जायेगें!
प्यार की ऊर्मियाँ तो दिखाओ जरा,
संग-ए-दिल मोम बन कर पिघल जायेंगे!!

फूल और शूल दोनों करें जब नमन,
खूब महकेगा तब जिन्दगी का चमन,
आप इक बार दोगे निमन्त्रण अगर,
दीप खुशियों के जीवन में जल जायेंगे!
प्यार की ऊर्मियाँ तो दिखाओ जरा,
संग-ए-दिल मोम बन कर पिघल जायेंगे!!

हमने पारस सा समझा सदा आपको,
हिम सा शीतल ही माना है सन्ताप को,
आप नज़रें उठाकर तो देखो जरा,
सारे अनुबन्ध साँचों में ढल जायेंगे!
प्यार की ऊर्मियाँ तो दिखाओ जरा,
संग-ए-दिल मोम बन कर पिघल जायेंगे!!

झूठा ख़त ही हमें भेज देना कभी,
आजमा कर हमें देख लेना कभी,
साज-संगीत को छेड़ देना जरा,
हम तरन्नुम में भरकर ग़ज़ल गायेंगे!
प्यार की ऊर्मियाँ तो दिखाओ जरा,
संग-ए-दिल मोम बन कर पिघल जायेंगे!!

17 टिप्‍पणियां:

  1. जितना सुन्दर गीत उतना ही सुन्दर गायन... शाश्त्री जी और अर्चनाजी दोनों को बधाई...

    उत्तर देंहटाएं
  2. फिर अच्छा लगा सुनना/पढ़ना.

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (5-5-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  4. हमने तो पहली बार सुना अच्छा लगा आप दोनों को बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी रचना को दोबारा पढ़ा और सुना भी, अच्छा लगा। अर्चना जी की आवाज़ मुतास्सिर करती है।
    शुक्रिया।

    http://mankiduniya.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  6. खूबसूरत गीत , सुमधुर आवाज़.

    उत्तर देंहटाएं
  7. जितना सुन्दर गीत उतना ही सुन्दर गायन..

    उत्तर देंहटाएं
  8. is abhinav geet ko kitni baar bhi padhen...man nahin bharta

    sachmuch sundar rachna !

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुन्दर गीत का मधुर गायन, आप दोनों को बहुत बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  10. शब्द और स्वर दोनों प्रभावित करते हैं..... आपको और अर्चना जी को बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  11. bahut hi sunder geet hai maine to pahli baar hi suna hai.saraahniye,rochak.

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत बहुत आभार आपका...

    उत्तर देंहटाएं
  13. साँचों में ढल जायेंगे!प्यार की ऊर्मियाँ तो दिखाओ जरा,संग-ए-दिल मोम बन कर पिघल जायेंगे!!
    ...वाह! खूबसूरत गीत.. सुमधुर आवाज़...प्रस्तुति के लिए आभार

    उत्तर देंहटाएं
  14. शास्‍त्री जी, इस प्रस्‍तुति के लिये आपको एवं अर्चना जी को बहुत-बहुत बधाई आपको पढ़ना एवं सुनना दोनो ही मन को बेहद भाया ...शुभकामनाएं ।

    उत्तर देंहटाएं
  15. वाह, आनन्द आ गया। मैं तो अब खुद भी यही गुनगुना रहा हूँ।

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  16. आदरणीय शास्त्री जी आपकी कलम को सादर नमन - अर्चना जी की आवाज में सुनकर कैसा लगा फिर कभी बताऊंगा - धन्यवाद्

    उत्तर देंहटाएं

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