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शुक्रवार, 6 मई 2011

"मेरे मन को भाते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


वो अनजाने से परदेशी!
मेरे मन को भाते हैं।
भाँति-भाँति के कल्पित चेहरे,
सपनों में घिर आते हैं।। 
पतझड़ लगता है वसन्त,
वीराना भी लगता मधुबन,
जब वो घूँघट में से अपनी,
मोहक छवि दिखलाते हैं।
भाँति-भाँति के कल्पित चेहरे,
सपनों में घिर आते हैं।। 
 उनकी आहट पाकर गुनगुन,
गाने लगता भँवरा गुंजन,
शोख-चटक कलिका बनकर,
वो उपवन में मुस्काते हैं।
भाँति-भाँति के कल्पित चेहरे,
सपनों में घिर आते हैं।।
 चकाचौंध कर देने वाली,
होती उनकी चमक निराली,
आसमान की छाती पर,
जब काले बादल छाते हैं।
भाँति-भाँति के कल्पित चेहरे,
सपनों में घिर आते हैं।।
अँखियाँ देतीं मौन निमन्त्रण,
बिन पाती का है आमन्त्रण,
सपनों की दुनिया को छोड़ो,
मन से तुम्हे बुलाते हैं।
भाँति-भाँति के कल्पित चेहरे,
सपनों में घिर आते हैं।। 

17 टिप्‍पणियां:

  1. वाह वाह्…………आज तो बहुत ही मधुर और मनमोहक रचना लगाई है जो गुनगुनाई जा सकती है…………शानदार्।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत खूब सुरत है आज की रचना शास्त्री जी --मुझे अंदाजा नही था की आप इतनी अच्छी कविता भी लिख सकते है ---आपका बहुत -बहुत आभार !धन्यवाद ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. 'अंखियाँ देती मौन निमंत्रण'

    आपने इतनी अच्छी बात सुनाई भी तो ऐसे मौके पर जबकि कल हम लखनऊ जा रहे हैं । अब आपकी पंक्तियों पर आचरण तो हम लौटकर ही कर पाएँगे ।
    धन्यवाद ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. स्वप्नों में आ जाने वाले सच में भी आ जाते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सपनों की दुनिया को छोड़ो,
    मन से तुम्हे बुलाते हैं।
    बहुत ही मधुर और मनमोहक रचना आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  6. waah bahut hi utam ebam khusurat rachna....badhai...kre siwkar

    उत्तर देंहटाएं
  7. बरबस गाने-गुनगुनाने को जी कर रहा है - अति सुंदर - शास्त्री जी बधाई स्वीकारें

    उत्तर देंहटाएं
  8. saras saumya rachana -

    भाँति-भाँति के कल्पित चेहरे,
    सपनों में घिर आते हैं।।

    sunder ...
    aabhar .

    उत्तर देंहटाएं
  9. भांति-भांति के कल्पित चेहरे सपनों में आ जाते हैं ।
    सुन्दर कविता...

    उत्तर देंहटाएं
  10. ब्लॉग जगत में पहली बार एक ऐसा सामुदायिक ब्लॉग जो भारत के स्वाभिमान और हिन्दू स्वाभिमान को संकल्पित है, जो देशभक्त मुसलमानों का सम्मान करता है, पर बाबर और लादेन द्वारा रचित इस्लाम की हिंसा का खुलकर विरोध करता है. साथ ही धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कायरता दिखाने वाले हिन्दुओ का भी विरोध करता है.
    इस ब्लॉग पर आने से हिंदुत्व का विरोध करने वाले कट्टर मुसलमान और धर्मनिरपेक्ष { कायर} हिन्दू भी परहेज करे.
    समय मिले तो इस ब्लॉग को देखकर अपने विचार अवश्य दे
    .
    जानिए क्या है धर्मनिरपेक्षता
    हल्ला बोल के नियम व् शर्तें

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