![]() दुर्गम पथरीला पथ है, आगे बढ़ना आसान नहीं। ऊँची पर्वत-मालाओं पर, चढ़ना है आसान नहीं।। पहले पढ़ना-लिखना फिर, जीविका कमाना पड़ता है, कदम-कदम पर यहाँ बहुत से, कष्ट उठाना पड़ता है। दुनियादारी एक हक़ीक़त, ये गुड़ियों का खेल नहीं- घास-फूस-तिनके चुन कर, घर-बार बनाना पड़ता है। जीवन तो है एक साधना, तप करना आसान नहीं। ऊँची पर्वत-मालाओं पर, चढ़ना है आसान नहीं।। हाड़ कँपाती सर्दी लू के, थप्पड़ खाना पड़ता है, आँधी-पानी में खेतों में, पौध लगाना पड़ता है। स्वयं परिश्रम करना पड़ता, नहीं हाट में ये मिलता, मक्कारों, बे-ईमानों को, सबक सिखाना पड़ता है। सत्य-अहिंसा की राहों पर, चलना है आसान नहीं। ऊँची पर्वत-मालाओं पर, चढ़ना है आसान नहीं।। |
