कौन है अंजाना?
समाजवाद का चेहरा है,
जाना-पहचाना?
--
डाका, राहजनी, और चोरी,
सुरसा के मुँह के समान-
बढ़ रही है,रिश्वतखोरी।
देख रहे हैं-
गरीब और मजदूर,
होता जा रहा है,
चिकित्सा और न्याय-
उनसे दूर।
--
बढ़ता जा रहा है-
भ्रष्टाचार, व्यभिचार और शोषण,
नेतागण कर रहे हैं-
अपने परिवार का पोषण।
--
क्या समाजवाद-
सबके हित की-आवाज है?
क्या देश में दीन-दुखी,
आम आदमी का राज है?
पछता रहे हैं,
गरीब और कमजोर,
क्यों भेजा था उन्होंने संसद में-
एक निकम्मा-कामचोर?
--
आज केवल-
नेता ही आबाद है,
जनता
आज भी बरबाद है।
क्या यही समाजवाद है?
हाँ यही समाजवाद है।