-- मस्त फुहारें लेकर आया, मौसम हँसी-ठिठोली का। देख तमाशा होली का।। -- उड़ रहे पीले-हरे गुलाल, हुआ है धरती-अम्बर लाल, भरे गुझिया-मठरी के थाल, चमकते रंग-बिरंगे गाल, गोप-गोपियाँ खेल रहे हैं, खेला आँख-मिचौली का। देख तमाशा होली का।। मस्त फुहारें लेकर आया, मौसम हँसी-ठिठोली का। देख तमाशा होली का।। -- पिचकारी बच्चों के कर में, हुल्लड़ मचा हुआ घर-घर में, हुलियारे हैं गली-डगर में, प्यार बसा हर जिगर-नजर में, चारों ओर नजारा पसरा, फागुन की रंगोली का। देख तमाशा होली का।। मस्त फुहारें लेकर आया, मौसम हँसी-ठिठोली का। देख तमाशा होली का।। -- डाली-डाली है गदराई, बागों में छाई अमराई, गुलशन में कलियाँ मुस्काई, रंग-बिरंगी तितली आई, कानों को अच्छा लगता सुर, कोयलिया की बोली का। देख तमाशा होली का।। मस्त फुहारें लेकर आया, मौसम हँसी-ठिठोली का। देख तमाशा होली का।। -- गीत प्यार का आओ गाएँ, मीत हमारे सब बन जाएँ, बैर-भाव को दूर भगाएँ, मिल-जुलकर त्यौहार मनाएँ, साथ सुहाना मिले सभी को, होली में हमजोली का। देख तमाशा होली का।। मस्त फुहारें लेकर आया, मौसम हँसी-ठिठोली का। देख तमाशा होली का।। -- |
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गुरुवार, 21 मार्च 2024
होली गीत "देख तमाशा होली का" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
बुधवार, 20 मार्च 2024
होली गीत "मिल-जुलकर सब होली खेलो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
-- धूम मची है बाजारों में,रंग, अबीर-गुलाल की। मिल-जुलकर सब होली खेलो, जय बोलो नन्दलाल की।। -- सेमल-टेसू गदराये हैं, आम-नीम बौराया है। तिनके बीन-बीन चिड़िया ने, अपना नीड़ बनाया है। निर्मल नीर हुआ नदियों का, छटा अनोखी ताल की। -- मिल-जुलकर सब होली खेलो, जय बोलो नन्दलाल की।। -- झूमर जैसे लटक रहे, अंगूर झूमते बेलों पर। सिन्दूरी से सुमन सजे हैं, आँगन के सब केलों पर। शाम सुहानी लगती सबको, अब तो नैनीताल की। मिल-जुलकर सब होली खेलो, जय बोलो नन्दलाल की।। -- सरसों फूली है खेतों में, गेंहूँ न ली अँगड़ायी, दूर देश से पंख हिलाती, तितली बगिया में आयी, नहीं जरूरत है भँवरो को, गुंजन में सुर-ताल की। मिल-जुलकर सब होली खेलो, जय बोलो नन्दलाल की।। -- ऊनी वस्त्र उतारे सबने, हीटर-गीजर बन्द हुए, कवियों और गीतकारों के, मुखरित नूतन छन्द हुए, याद दिलाते मधुर तराने, राधा के गोपाल की। मिल-जुलकर सब होली खेलो, जय बोलो नन्दलाल की।। -- झड़े पुराने पात पेड़ के, नयी कोपलें आयी हैं उपवन की कलियाँ मस्ती में, झूम-झूम लहरायी हैं, नये “रूप” में
निखरी रंगत, गाँवों की चौपाल की। मिल-जुलकर सब होली खेलो, जय बोलो नन्दलाल की।। -- |
बुधवार, 8 मार्च 2023
होली गीत "मौसम हँसी-ठिठोली का" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
-- मस्त फुहारें लेकर आया, मौसम हँसी-ठिठोली का। देख तमाशा होली का।। -- उड़ रहे पीले-हरे गुलाल, हुआ है धरती-अम्बर लाल, भरे गुझिया-मठरी के थाल, चमकते रंग-बिरंगे गाल, गोप-गोपियाँ खेल रहे हैं, खेला आँख-मिचौली का। देख तमाशा होली का।। मस्त फुहारें लेकर आया, मौसम हँसी-ठिठोली का। देख तमाशा होली का।। -- पिचकारी बच्चों के कर में, हुल्लड़ मचा हुआ घर-घर में, हुलियारे हैं गली-डगर में, प्यार बसा हर जिगर-नजर में, चारों ओर नजारा पसरा, फागुन की रंगोली का। देख तमाशा होली का।। मस्त फुहारें लेकर आया, मौसम हँसी-ठिठोली का। देख तमाशा होली का।। -- डाली-डाली है गदराई, बागों में छाई अमराई, गुलशन में कलियाँ मुस्काई, रंग-बिरंगी तितली आई, कानों को अच्छा लगता सुर, कोयलिया की बोली का। देख तमाशा होली का।। मस्त फुहारें लेकर आया, मौसम हँसी-ठिठोली का। देख तमाशा होली का।। -- गीत प्यार का आओ गाएँ, मीत हमारे सब बन जाएँ, बैर-भाव को दूर भगाएँ, मिल-जुलकर त्यौहार मनाएँ, साथ सुहाना मिले सभी को, होली में हमजोली का। देख तमाशा होली का।। मस्त फुहारें लेकर आया, मौसम हँसी-ठिठोली का। देख तमाशा होली का।। -- |
होली गीत "हुए हैं रंग-बिरंगे गाल" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
-- कोई गावे मस्त रागनी, कोई ढोल बजावे, मस्ती में भर करके राधा अपना नाच दिखावे, बजाते ग्वाले हैं खड़ताल! खेलते होली मोहनलाल!! -- भोली बालाओं को, कान्हा बहलावें-फुसलावें, धोखे से आ करके उनके मुँह पर रंग लगावें, गोपियों के बिगड़े हैं हाल! खेलते होली मोहनलाल!! -- देवर-भाभी में होती है, जमकर आँख-मिचौली, गली-गाँव में घूम रहीं हैं हुलियारों की टोली, मचा है चारों ओर धमाल! खेलते होली मोहनलाल!! -- रंग-बिरंगी पिचकारी, गोपाल-बाल के कर मे, पकवानों की सोंधी-सोंधी गन्ध समाई घर में, सजे गुझिया-मठरी के थाल! खेलते होली मोहनलाल!! --जीजा-साली में होती है, मोहक हँसी-ठिठोली, खुशियों की सौगातें लेकर आई फिर से होली. हुए हैं रंग-बिरंगे गाल! खेलते होली मोहनलाल!! -- |
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