-- धरा-दिवस पर कीजिए, यही
प्रतिज्ञा आज। भू पर पेड़ लगाइए, जीवित
रहे समाज।१। -- हरितक्रान्ति से ही मिटे, धरती का
सन्ताप। पर्यावरण बचाइए, बचे
रहेंगे आप।२। -- पेड़ लगाकर कीजिए, अपने पर
उपकार। करो हमेशा यत्न से, धरती का
सिंगार।३। -- खाली रहे न कहीं भी, अब
खेतों की मेढ़। सड़क किनारे मित्रवर, लगा
दीजिए पेड़।४। -- प्राणवायु हमको सदा, देते पीपल-नीम। दुनियाभर में हैं यही, सबसे
बड़े हकीम।५। -- बातों से होता नहीं, धरा-दिवस
साकार। यत्न करोगे तो तभी, बेड़ा
होगा पार।६। -- धरती माता तुल्य है, देती
प्यार-अपार। संचित है सबके लिए, धरती
में भण्डार।७। -- |
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मंगलवार, 23 अप्रैल 2024
दोहे-भूमिदिवस "धरती का सिंगार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018
धरती का सिंगार (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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करने में उपकार को, नहीं मानता हार।
बाँट रहा है गन्ध को, सबको हर सिंगार।।
--
केसरिया टीका लगा, हँसता हरसिंगार।
अमल-धवल ये सुमन है, , कुदरत का उपहार।।
--
नतमस्तक होकर सदा, करता है मनुहार।
धरती पर बिखरा हुआ, लुटा रहा है प्यार।।
--
वैद्यराज के रूप में, हरता सबके रोग।
वातव्याधि को दूर कर, करता बदन निरोग।।
--
कलम बना कर डाल की, मिट्टी में दो गाड़।
नित्य नेह से सींचिए, उग जायेगा झाड़।।
--
माटी कैसी भी रहे, नहीं इसे परहेज।
बिरुआ हरसिंगार का, रखना सदा सहेज।।
--
कुछ वर्षों के बाद में, तन इसका गदराय।
पौधा हरसिंगार का, महावृक्ष बन जाय।।
--
सबके मन को मोहते, सुन्दर-सुन्दर फूल।
पादप की नित-नियम से, सदा सींचना मूल।।
--
शस्यश्यामला धरा पर, करना यह उपकार।
पेड़ लगाकर कीजिए, धरती का सिंगार।।
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