झूम-झूमकर मच्छर आते। कानों में गुञ्जार सुनाते।। -- नाम ईश का जपते-जपते। सुबह-शाम को खूब निकलते।। बैठा एक हमारे सिर पर। खून चूसता है जी भर कर।। -- नहीं यह बिल्कुल भी डरता। लाल रक्त से टंकी भरता।। कैसे मीठी निंदिया आये? मक्खी-मच्छर नहीं सतायें। -- मच्छरदानी को अपनाओ। चैन-अमन से सोते जाओ।। -- |
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शनिवार, 1 जून 2024
बालकविता "मच्छरदानी को अपनाओ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013
"मच्छरदानी को अपनाओ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
![]()
जिसमें
नींद चैन की आती।
वो
मच्छर-दानी कहलाती।।
लाल-गुलाबी
और हैं धानी।
नीली-पीली
बड़ी सुहानी।।
छोटी, बड़ी और दरम्यानी।
कई
तरह की मच्छर-दानी।।
इसको
खोलो और लगाओ।
बिस्तर
पर सुख से सो जाओ।।
जब
ठण्डक कम हो जाती है।
गरमी
और बारिश आती है।।
तब
मच्छर हैं बहुत सताते।
भिन-भिन
करके शोर मचाते।।
![]()
खून
चूस कर दम लेते हैं।
डेंगू-फीवर
कर देते हैं।।
मच्छर
से छुटकारा पाओ।
मच्छरदानी
को अपनाओ।।
|
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