हनुमान जयन्ती की
सभी भक्तों को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।
धीर-वीर, रक्षक प्रबल, बलशाली-हनुमान।
जिनके हृदय-अलिन्द में, रचे-बसे श्रीराम।।
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महासिन्धु को लाँघकर, नष्ट किये वन-बाग।
असुरों को आहत किया, लंका मे दी आग।।
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कभी न टाला राम का, जिसने था आदेश।
सीता माता को दिया, रघुवर का सन्देश।।
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लछमन को शक्ति लगी, शोकाकुल थे राम।
पवन वेग की चाल से, पहुँचे पर्वत धाम।।
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संजीवन के शैल को, उठा लिया तत्काल।
बूटी खा जीवित हुए, दशरथ जी के लाल।।
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बिगड़े काम बनाइए, बनकर कृपा निधान।
कोटि-कोटि वन्दन तुम्हे, पवनपुत्र हनुमान।।
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शनिवार, 4 अप्रैल 2015
"बलशाली-हनुमान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ' मयंक')
मंगलवार, 23 अप्रैल 2013
"हनुमान जयन्ती" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
सभी भक्तों को हनुमान जयन्ती की
अग्रिम शुभकामनाएँ प्रेषित कर रहा हूँ!
धीर-वीर, रक्षक प्रबल, बलशाली-हनुमान।
जिनके हृदय-अलिन्द में, रचे-बसे श्रीराम।।
--
महासिन्धु को लाँघकर, नष्ट किये वन-बाग।
असुरों को आहत किया, लंका मे दी आग।।
--
कभी न टाला राम का, जिसने था आदेश।
सीता माता को दिया, रघुवर का सन्देश।।
--
लछमन को शक्ति लगी, शोकाकुल थे राम।
पवन वेग की चाल से, पहुँचे पर्वत धाम।।
--
संजीवन के शैल को, उठा लिया तत्काल।
बूटी खा जीवित हुए, दशरथ जी के लाल।।
--
बिगड़े काम बनाइए, बनकर कृपा निधान।
कोटि-कोटि वन्दन तुम्हे, पवनपुत्र हनुमान।।
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सोमवार, 18 अप्रैल 2011
"हनुमान जयन्ती की शुभकामनाएँ।" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ' मयंक')
| धीर-वीर, रक्षक प्रबल, बलशाली-हनुमान। जिनके हृदय-अलिन्द में, रचे-बसे श्रीराम।। -- महासिन्धु को लाँघकर, नष्ट किये वन-बाग। असुरों को आहत किया, लंका मे दी आग।। -- कभी न टाला राम का, जिसने था आदेश। सीता माता को दिया, रघुवर का सन्देश।। -- लछमन को शक्ति लगी, शोकाकुल थे राम। पवन वेग की चाल से, पहुँचे पर्वत धाम।। -- संजीवन के शैल को, उठा लिया तत्काल। बूटी खा जीवित हुए, दशरथ जी के लाल।। -- बिगड़े काम बनाइए, बनकर कृपा निधान। कोटि-कोटि वन्दन तुम्हे, पवनपुत्र हनुमान।। -- हनुमान जयन्ती की सभी भक्तों को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। |
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