आज ही वापिस लौटा हूँ।
प्रस्तुत कर रहा हूँ।
यदि सम्भव हुआ तो
देहरादून के कुदरती नज़ारे
और अब आ रहा है देहरादून से पहले
डोईवाला स्टेशन
28-08-2012 की शाम
उत्तराखण्ड सरकार में काबीना मन्त्री
मा.यशपाल आर्य के साथ
देहरादून में मेरी पौत्री प्राची
और ये हैं प्रियपौत्र प्रांजल
प्रांजल और प्राची अपने पापा के साथ
अरे वाह!
29 की दोपहर आकाश में
बादलों की आँख-मिचौली
शाम को हम लोग कार से घूमने भी गये।
डॉ. नूतन डिमरी गैरौला के निवास पर
उन्हें मैंने पुस्तकें भेंट कीं।
और ये है डॉ.साहिबा का ड्राइंगरूम।
अब शाम हो गई है
चलों अपने घर चलें।
डॉ.नूतन गैरौला ने इस अवसर पर
मुझे अपना काव्यसंकल भी भेंट किया!