-- तन में होली, मन में होली। बुरा न मानो आयी होली।। -- कोई गोरा-कोई काला, होली का दस्तूर निराला, खूब थिरकती है रंगोली।। बुरा न मानो आयी होली।। -- भाभी ले आयी पिचकारी, जिसकी मार बहुत है भारी, भइया बोले अब हद हो ली। बुरा न मानो आयी होली।। -- चुपके देवर ने आकर, रंग लगाया है चेहरे पर, जमकर होती हँसी-ठिठोली। बुरा न मानो आयी होली।। -- बच्चे-बूढ़े सब मतवाले, मस्ती में हैं साली-साले, खेल रहे सब आँखमिचौली। बुरा न मानो आयी होली।। -- |
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सोमवार, 25 मार्च 2024
होलीगीत "बुरा न मानो होली है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
बुधवार, 13 मार्च 2024
होलीगीत "मौसम ने मादकता घोली" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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-- गूँज रही है मन-उपवन में कोयलिया की बोली। वासन्ती सपनों को लेकर फिर से आई होली।। -- रंग-बिरंगे कुसुम खिले हैं, बगिया और
चमन में, अँगारे जैसे दहके हैं, टेसू फिर
से वन में, मन्द-सुगन्ध पवन ने, तन में
मादकता सी घोली। वासन्ती सपनों को लेकर फिर से आई होली।। -- रंग, अबीर-गुलाल, शान से
हँसते-मुस्काते हैं, लोग-लुगाई प्रणय-गीत खुश हो करके गाते हैं, अपनी धुन में बौराए से थिरक रहे हमजोली। वासन्ती सपनों को लेकर फिर से आई होली।। -- मन में दबी हुई गाँठों के गठबन्धन को खोलें, प्रेम-प्रीत के रंगों से सब गिले-शिकायत धो
लें, अपनेपन के अरमानों से भर जाएगी झोली। वासन्ती सपनों को लेकर फिर से आई होली।। -- सबके घर-आँगन में फिर से बौझारें बरसेंगी, बच्चों के हाथों में फिर से पिचकारी
सरसेंगी, देवर और भाभी में जमकर होगी हँसी-ठिठोली। वासन्ती सपनों को लेकर फिर से आई होली।। -- क्रूर होलिका होली की लपटों में जल जाएगी, प्रिय प्रह्लाद की अशुभ घड़ी भी फिर से टल
जाएगी, झूम-झूमकर फिर से गलियों में निकलेंगी
टोली। वासन्ती सपनों को लेकर फिर से आई होली।। -- |
शुक्रवार, 18 मार्च 2022
होलीगीत "फागुन की रंगोली" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
![]() मस्त फुहारें लेकर आया, मौसम हँसी-ठिठोली का। देख तमाशा होली का।। उड़ रहे पीले-हरे गुलाल, हुआ है धरती-अम्बर लाल, भरे गुझिया-मठरी के थाल, चमकते रंग-बिरंगे गाल, गोप-गोपियाँ खेल रहे हैं, खेला आँख-मिचौली का। देख तमाशा होली का।। मस्त फुहारें लेकर आया, मौसम हँसी-ठिठोली का। देख तमाशा होली का।। पिचकारी बच्चों के कर में, हुल्लड़ मचा हुआ घर-घर में, हुलियारे हैं गली-डगर में, प्यार बसा हर जिगर-नजर में, चारों ओर नजारा पसरा, फागुन की रंगोली का। देख तमाशा होली का।। मस्त फुहारें लेकर आया, मौसम हँसी-ठिठोली का। देख तमाशा होली का।। डाली-डाली है गदराई, बागों में छाई अमराई, गुलशन में कलियाँ मुस्काई, रंग-बिरंगी तितली आई, कानों को अच्छा लगता सुर, कोयलिया की बोली का। देख तमाशा होली का।। मस्त फुहारें लेकर आया, मौसम हँसी-ठिठोली का। देख तमाशा होली का।। -- गीत प्यार का आओ गाएँ, मीत हमारे सब बन जाएँ, बैर-भाव को दूर भगाएँ, मिल-जुलकर त्यौहार मनाएँ, साथ सुहाना मिले सभी को, होली में हमजोली का। देख तमाशा होली का।। मस्त फुहारें लेकर आया, मौसम हँसी-ठिठोली का। देख तमाशा होली का।। -- |
मंगलवार, 15 मार्च 2022
होलीगीत "खूब थिरकती है रंगोली" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
तन में होली, मन में होली। बुरा न मानो आयी होली।। कोई गोरा-कोई काला, होली का दस्तूर निराला, खूब थिरकती है रंगोली।। बुरा न मानो आयी होली।। भाभी ले आयी पिचकारी, जिसकी मार बहुत है भारी, भइया बोले अब हद हो ली। बुरा न मानो आयी होली।। चुपके देवर ने आकर, रंग लगाया है चेहरे पर, जमकर होती हँसी-ठिठोली। बुरा न मानो आयी होली।। बच्चे-बूढ़े सब मतवाले, मस्ती में हैं साली-साले, खेल रहे सब आँखमिचौली। बुरा न मानो आयी होली।। |
सोमवार, 14 मार्च 2022
होलीगीत "खिलता फागुन आया" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
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शनिवार, 27 मार्च 2021
होलीगीत "फागुन की रंगोली का" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
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मस्त
फुहारें लेकर आया,
मौसम
हँसी-ठिठोली का। देख
तमाशा होली का।। -- उड़
रहे पीले-हरे गुलाल, हुआ
है धरती-अम्बर लाल, भरे
गुझिया-मठरी के थाल, चमकते
रंग-बिरंगे गाल, गोप-गोपियाँ
खेल रहे हैं, खेला
आँख-मिचौली का। देख तमाशा होली का।। मस्त
फुहारें लेकर आया, मौसम
हँसी-ठिठोली का। देख
तमाशा होली का।। -- पिचकारी
बच्चों के कर में, हुल्लड़
मचा हुआ घर-घर में, हुलियारे
हैं गली-डगर में, प्यार
बसा हर जिगर-नजर में, चारों
ओर नजारा पसरा, फागुन
की रंगोली का। देख तमाशा होली का।। मस्त
फुहारें लेकर आया, मौसम
हँसी-ठिठोली का। देख
तमाशा होली का।। -- डाली-डाली
है गदराई, बागों
में छाई अमराई, गुलशन
में कलियाँ मुस्काई, रंग-बिरंगी
तितली आई, कानों
को अच्छा लगता सुर, कोयलिया
की बोली का। देख तमाशा होली का।। मस्त
फुहारें लेकर आया, मौसम
हँसी-ठिठोली का। देख
तमाशा होली का।। -- गीत
प्यार का आओ गाएँ, मीत
हमारे सब बन जाएँ, बैर-भाव
को दूर भगाएँ, मिल-जुलकर
त्यौहार मनाएँ, साथ
सुहाना मिले सभी को, होली
में हमजोली का। देख तमाशा होली का।। मस्त
फुहारें लेकर आया, मौसम
हँसी-ठिठोली का। देख
तमाशा होली का।। -- |
गुरुवार, 25 मार्च 2021
होलीगीत "आई होली, आई होली रे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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रविवार, 8 मार्च 2020
होलीगीत "महके है मन में फुहार! चलो होली खेलेंगे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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आई बसन्त-बहार,
चलो होली खेलेंगे!! रंगों का है त्यौहार, चलो होली खेलेंगे!! --
बागों में कुहु-कुहु बोले कोयलिया,
धरती ने धारी है, धानी चुनरिया, पहने हैं फुलवा के हार, चलो होली खेलेंगे!! --
हाथों में खन-खन, खनके हैं चुड़ियाँ,
पावों में छम-छम, छनके पैजनियाँ, चहके हैं सोलह सिंगार,
चलो होली खेलेंगे!!
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कल-कल बहती है, नदिया की धारा,
सजनी को लगता है साजन प्यारा, मुखड़े पे आया निखार, चलो होली खेलेंगे!! --
उड़ते अबीर-गुलाल भुवन में,
सिन्दूरी-सपने पलते सुमन में, महके है मन में फुहार! चलो होली खेलेंगे!!
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