भारी
धोखा दे गया, हमको फिर विज्ञान। दुर्घटना
की भेंट में, चढ़ा
विशेष विमान। जनरल रावत का हुआ असमय में अवसान। -- भारत भू में शोक से, सदमें में हैं
लोग। दुर्घटना की जाँच को, गठित हुआ आयोग।। -- लील लिए है काल ने, अपने योद्धा वीर।
हंस उड़ गया छोड़कर, नश्वर देह शरीर। -- रोके से रुकता नहीं, भावनाओं का
ज्वार। वीरों को हैं देश के, नमन हजारों
बार।। -- वसुन्धरा
पर देखकर, कुदरत के जुल्मात। |
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शुक्रवार, 10 दिसंबर 2021
दोहे "छाया भारी शोक" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2019
श्रद्धांजलि "अमन चाँदपुरी"
हिन्दी साहित्य का
उभरता हुआ युवा सितारा
अमन चाँदपुरी नहीं रहा...
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मेरे लिए यह व्यक्तिगत क्षति है।
11 अप्रैल, 2016 कौ मैंने
खटीमा में आयोजित दोहाकार समागम में
उन्हें “दोहा शिरोमणि से अलंकृत किया था।
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श्रद्धांजलि स्वरूप उन्हीं की एक क्षणिका प्रस्तुत है-
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अमन चाँदपुरी की छणिका
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'मानव जीवन'
कागज की कस्ती-सा है!
मानव का जीवन! पानी में बडे अराम से चले! पानी (कठिनाई) गर बरसे! देह गले! फिर चिता जले!
--- अमन चाँदपुरी
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शनिवार, 28 जुलाई 2018
दोहे "श्रद्धांजलि-प्रेरक नाम कलाम" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
![]()
भारत माँ की कोख से, जन्मा पूत कलाम।
करते श्रद्धा-भाव से, उसको आज सलाम।।
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दुनिया में जाना गया, वह मिसाइल-मैन।
उसके जाने से सभी, कितने हैं बेचैन।।
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जिसने जीवन भर किया, मानवता का काम।
भारत का सर्वोच्च-पद, हुआ उसी के नाम।।
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बचपन जिया अभाव में, कभी न मानी हार।
दुनिया में विज्ञान को, दिया सबल आधार।।
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कुदरत को मञ्जूर जो, वो ही तो है होय।
क्रूर काल के चक्र से, बचा नहीं है कोय।।
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जीव आत्मा अमर है, मरता तुच्छ शरीर।
अपने उत्तम कर्म से, अमर रहेंगे वीर।।
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युगों-युगों तक रहेगा, दुनियाभर में नाम।
गूँजेगा संसार में, प्रेरक नाम कलाम।।
--
भावप्रवण श्रद्धा-सुमन, करूँ समर्पित आज।
शोकाकुल है शोक से, देश-विदेश-समाज।।
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रविवार, 20 नवंबर 2011
"यह क्षण माता जी के जीवन में अब कभी नहीं आयेंगे।" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
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