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योगिराज का
सारे जग में, इतना मत अपमान करो।
कृष्णचन्द्र को
रासरचैया, कहकर मत बदनाम करो।।
कर्म
प्रधान बताया जिसने, गीता का शुभज्ञान दिया,
भाई-बहन के पावन
सम्बन्धों का जिसने मान किया,
मानवता के उस पालक का, जी भरकर गुणगान करो।
जिसने जीवनभर दुष्टों का, इस धरती पर हनन किया,
कर्तव्यों का बोध करा कर, मन में चिन्तन-मनन दिया,
मात-पिता, आचार्य-बुजुर्गों का, जीवन भर मान करो।
प्रहरी बनकर मातृभूमि की, रक्षा में सब सजग रहें,
अन्यायी-अत्याचारी की, बर्बरता को नहीं सहें,
जीव-आत्मा अजर-अमर है, मन में इतना ध्यान करो।
जिसने गौओं की सेवा कर, गोपालक पद पाया है,
शाकाहारी बनने का, गुरुमन्त्र हमें बतलाया है,
माखन-दुग्ध-दही को खाकर, तन-मन को बलवान करो।
योगिराज का सारे जग में इतना मत अपमान करो।
कृष्णचन्द्र को रासरचैया कहकर मत बदनाम करो।।
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मंगलवार, 27 अगस्त 2013
"रासरचैया कहकर मत बदनाम करो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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