होगा जब नियमित नहीं, पुस्तक से सम्वाद। तब तक पुस्तक का दिवस, नहीं रहेगा याद।। -- जहाँ पुस्तकों से अधिक, बस्ते का हो भार। होगा बच्चों को भला, कैसे इनसे प्यार।। -- अभिरुचियाँ समझे बिना, रहे पौध को रोप। नन्हे मन पर शान से, देते कुण्ठा थोप।। -- बालक की रुचियाँ समझ, देते नहीं सुझाव। बेमतलब की पुस्तकें, भर देती उलझाव।। -- |
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पुस्तकों का महत्व बताते और आज के समाज पर प्रासंगिक टिप्पणी करते दोहे....
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया लिखा है आपने 🌻
जवाब देंहटाएंअभिरुचियाँ समझे बिना, रहे पौध को रोप।
जवाब देंहटाएंनन्हे मन पर शान से, देते कुण्ठा थोप।।
जी बिल्कुल...उनकी अभिरूचियों को किनारा कर दिया जाता है।
जिम्मेदारियों तले जिंदगी, देख रहा किताब
कुछ पात्र गुजर गयें, गम ले रहा खिताब
बहुत अच्छी, बहुत उपयोगी, बहुत यथार्थपरक अभिव्यक्ति है यह शास्त्री जी आपकी। इसके एक-एक दोहे का भाव सभी अभिभावकों तथा शिक्षा नीति नियंताओं को आत्मसात् करना चाहिए।
जवाब देंहटाएंसुंदर बोध देती रचना
जवाब देंहटाएंजहाँ पुस्तकों से अधिक, बस्ते का हो भार।
जवाब देंहटाएंहोगा बच्चों को भला, कैसे इनसे प्यार।।
अभी तो बच्चों का बोझ किसी कोने में धूल फांक रहा है
बहुत अच्छी सार्थक चिंतन
बहुत सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंPrernadayak aur Sarthak post
जवाब देंहटाएंaadarniy Shastri ji
सुंदर दोहे।
जवाब देंहटाएंहर मौके पर आपकी सामायिक प्रस्तुति मनमोहक होती है आदरणीय।
जवाब देंहटाएंसुंदर सृजन।
बहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंअभिरुचियाँ समझे बिना, रहे पौध को रोप।
जवाब देंहटाएंनन्हे मन पर शान से, देते कुण्ठा थोप।।
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बालक की रुचियाँ समझ, देते नहीं सुझाव।
बेमतलब की पुस्तकें, भर देती उलझाव।।
...बहुत सही कहा आपने शास्त्री जी,सार्थक सृजन ।
वन्दन
जवाब देंहटाएंशीघ्र स्वस्थ्य हों
बेमतलब की पुस्तके देती बस उलझाव.....अच्छे दोहे हैं
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार
बहुत सुन्दर दोहे हैं सभी ...
जवाब देंहटाएंआपका स्वस्थ अब कैसा है ... लज्दी ही स्वस्थ हो के आयें ...
आदरणीय शास्त्रीजी, कल कामिनी बहन से पता चला आपकी अस्वस्थता के बारे में। ईश्वर से आपके अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करती हूँ। आप जल्दी ही पूर्ण स्वस्थ हो जाएँ। सादर प्रणाम।
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी कोई रचना बुधवार , 12 मई 2021 को साझा की गई है ,
जवाब देंहटाएंपांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
संगीता स्वरूप
बहुत सुन्दर.
जवाब देंहटाएंवन्दन
जवाब देंहटाएंशानदार लेखन
बहुत सुंदर।
जवाब देंहटाएंकल रथ यात्रा के दिन " पाँच लिंकों का आनंद " ब्लॉग का जन्मदिन है । आपसे अनुरोध है कि इस उत्सव में शामिल हो कृतार्थ करें ।
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी कोई रचना सोमवार 12 जुलाई 2021 को साझा की गई है ,
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।