कड़ुए-मीठे का जहाँ, होता है
संयोग। समझ लीजिए इश्क का, बस ऐसा ही
रोग।। -- नहीं बचे हैं इश्क से, ज्ञानी सन्त-महन्त। दुनिया में इस रोग का, होता कभी
न अन्त।। -- आशिकबाजी में फँसे, कितने
राम-रहीम। असफल रहे इलाज में, सारे
वैद्य-हकीम।। -- जितने भी अब तक हुए, जग में आशिकबाज। सबका होता है अलग, बातों का
अंदाज।। -- आशिकबाजी की नहीं, होती कोई जात। मजनूँ करते रसभरी, माशूकों से बात।। -- जालजगत है देवता, मुखपोथी
(फेसबुक) भगवान। बातें करने के लिए, गूगल है
वरदान।। बिना किसी हथियार के, सब करते
हैं वार। आभासी संसार में, उमड़ा झूठा प्यार।। -- |
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सादर नमस्कार ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कलरविवार(12-12-21) को अपने दिल के द्वार खोल दो"(चर्चा अंक4276)
पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
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कामिनी सिन्हा
सटीक दोहे 👏🏻👏🏻साथ युक्त।
जवाब देंहटाएंबढिया दोहे सर जी।
जवाब देंहटाएंसटीक अभिव्यक्ति आ0
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