तुम पंचदेव में महादेव!! -- तुम विघ्नविनाशक के ताता जो तुमको मन से है ध्याता उसका सब संकट मिट जाता भोले-भण्डारी महादेव! तुम पंचदेव में महादेव!! -- कर्ता-धर्ता-हर्ता सुधीर तुम सुरसेना के महावीर दुर्गम पर्वतवासी सुबीर हे निराकार-साकार देव! तुम पंचदेव में महादेव!! -- नन्दी तुमको लगता प्यारा माथे पर शशि को है धारा धरती पर सुरसरि को तारा हे कालकूट हे महादेव! तुम पंचदेव में महादेव!! -- त्रिशूल. जटा, डमरूधारी दुष्टों के हो तुम संहारी बाघम्बरधारी वनचारी हे दुष्टदलन, हे महादेव! तुम पंचदेव में महादेव!! जो शंकर की पूजा करता पापकर्म से वो है डरता भवसागर से वो ही तरता उस पर करते तुम कृपा देव! तुम पंचदेव में महादेव!!
|
| "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। मित्रों! आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। |

ॐ नम: शिवाय .
जवाब देंहटाएंबहुत भावपूर्ण गीत . मन बस शिवमय हो गया
ॐ नम: शिवाय
जवाब देंहटाएंMere Blog Par Aapka Swagat Hai.
बहुत सुंदर भोलेशंकर का गुणगान करती अनुपम रचना..
जवाब देंहटाएंसुंदर भगवंत भक्ति में रचा-बसा पावन सृजन।
जवाब देंहटाएंसादर।
अद्भुत गीत प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंसादर नमन