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शुक्रवार, 10 अप्रैल 2009

"सोच समझ कर करना वोट" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


सोच समझ कर करना वोट,

सही समय पर करना चोट।


कभी नही देखी हों जिसने, काँटो की पथरीली राहें।

सुख वैभव के मधु-आकर्षण, कैसे छोड़ सकेगा?

सोच समझ कर करना वोट,

सही समय पर करना चोट।


जिसने खाये हो विदेश के मोहन-मोदक,

रूखी-सूखी से कैसे, वो नाता जोड़ सकेगा?

सोच समझ कर करना वोट,

सही समय पर करना चोट।


जो विमान के पलने में, अब तक हो झूला,

भारत की निर्धन सड़कों पर, कैसे दौड़ सकेगा?

सोच समझ कर करना वोट,

सही समय पर करना चोट।


जो विदेश की दुल्हनिया पर हो लालायित,

खादी की देशी-चादर को कैसे ओढ़ सकेगा?

सोच समझ कर करना वोट,

सही समय पर करना चोट।


ए.सी. के पिंजड़े में रटता, भूख और आजादी,

उग्रवादियों का वो कैसे भाण्डा फोड़ सकेगा?

सोच समझ कर करना वोट,

सही समय पर करना चोट।


वोट माँगने को हिन्दी और संसद में अंग्रेजी,

वो अंग्रेजी की गरदन को कैसे तोड़ सकेगा?

सोच समझ कर करना वोट,

सही समय पर करना चोट।

9 टिप्‍पणियां:

  1. kahi to aapne satya baat hai ab dekhte hain kitne percent janta manti hai.

    जवाब देंहटाएं
  2. जी बात तो ठीक है पर किस पर चोट करें? एक तरफ़ नागनाथ और दूसरी तरफ़ सांपनाथ?

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत खूब....

    सोच समझ कर करेंगे वोट
    सही समय पर करेगें चोट

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत दमदार...सार्थक
    और विचारणीय रचना.
    ==================
    डॉ.चन्द्रकुमार जैन

    जवाब देंहटाएं
  5. sachchai par chot karti hui aapki kavita bahut achchha laga ....abhar

    जवाब देंहटाएं
  6. चुनाव के समय सार्थक सन्देश देती अच्छी रचना

    जवाब देंहटाएं
  7. bahut shaandaar rachanaa.badhaai aapko.
    happy friendship day

    "ब्लोगर्स मीट वीकली {३}" के मंच पर सभी ब्लोगर्स को जोड़ने के लिए एक प्रयास किया गया है /आप वहां आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/ हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। सोमवार०८/०८/11 को
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