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गुरुवार, 23 अप्रैल 2009

‘जरा बताइए तो’ माथापच्ची के विजेता।


उच्चारण पर ‘जरा बताइए तो’ शीर्षक से माथापच्ची पोस्ट लगाई थी।

इसमें एक चित्र प्रकाशित किया था।

जिसके बारे में स्थान बताते हुए उसका नाम बताना था।

इसका सही उत्तर था-

पीरान कलियर शरीफ दरगाह, रुड़की, उत्तराखण्ड।

इस पर 5 ब्लॉगर्स के सही उत्तर प्राप्त हुए थे।

सबसे पहले स्थान पर रहे-


सर्व श्री आशीष खण्डेलवाल जी।

दूसरे स्थान पर रहीं



माननीया वन्दना अवस्थी दूबे।

तृतीय स्थान पर रहे जाने माने ब्लॉगर




सर्व श्री समीर लाल (उड़न-तश्तरी)।

उपरोक्त को साक्षात्कार के प्रश्न शीघ्र ही प्रेषित किये जायेंगे।

आशा है कि आप सब मेरा

यह निमन्त्रण स्वीकार करने की कृपा करेंगे।

प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने

वालों को साहित्य शारदा मंच,खटीमा की ओर से

साहित्य-श्री

की सर्वोच्च उपाधि से अलंकृत किया जायेगा।

सही उत्तर देने वाले चौथे और पाँचवें ब्लॉगर्स

सर्व श्री ताऊ रामपुरिया

और श्री रावेंद्रकुमार रवि रहे।

उच्चारण की ओर से मैं डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’

सही उत्तर देने वाले इन सब ब्लॉगर्स को

हार्दिक बधायी प्रेषित करता हूँ ।

16 टिप्‍पणियां:

  1. सभी को बहुत बधाई और आपका आभार.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  2. श्रीमान जी, साहित्य श्री साम्मान का स्तर इतना मत गिराईये कि एक पहेली के जवाब मे बंटने लग जाये. आगे आपकी मर्जी.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेनामी जी।
    इतना भी बता दें कि क्या ये तीन लोग आपकी नजर में साहित्यकार नहीं हैं।
    भइया।
    मेरी लिस्ट में तो ये साहित्यकार ही हैं।
    सोच-समझकर ही यह निर्णय किया गया है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. "इतना भी बता दें कि क्या ये तीन लोग आपकी नजर में साहित्यकार नहीं हैं।"

    jee haan yae teen log saahitykaar nahin haen blogger haen

    blog aur saahity do alag alag vidha haen .

    उत्तर देंहटाएं
  5. बधाई आशीष भाई... और अन्य विजेताओं को भी।

    ---
    तकनीक दृष्टा

    उत्तर देंहटाएं
  6. शास्त्री जी का आभार एवं विजेताओं को बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  7. शास्त्री जी, मेरी मानों तो आप इन झंझटों में मत पडो.
    अब ये बताइए कि अगली पहेली मेरा मतलब माथापच्ची कब छाप रहे हैं?

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह वाह रचना जी!
    आपकी टिप्पणी पर तो आपको साहित्य-श्री के अतिरिक्त जो भी सम्मान हो वह दे देना चाहिए।
    मैं इस व्यर्थ की चर्चा को
    आगे बढ़ाना नही चाहता था।
    परन्तु आपने प्रेरित किया है या यों कहिए कि स्वाभिमान को ललकारा है,
    तो मुझे अलग से इस पर एक पोस्ट लगानी पड़ेगी।
    हर्ज ही क्या है ?
    एक खुली बहस तो हो ही जायेगी।
    अरे, आप तो Comment की वर्तनी भी
    अशुद्ध लिखती हैं।
    फिर आप ब्लागर को साहित्यकार
    कब स्वीकार करने वाली हैं।
    एक बार फिर बता दीजिए कि
    हिन्दी के धुरन्धर लिखाड़
    क्या साहित्यकार नही होते हैं।
    आशीष खण्डेलवाल एक कम्प्यूटरविद् हैं।
    क्या आप कम्प्यूटर विज्ञान को
    साहित्य नही मानती है?
    वन्दना अवस्थी दूबे जो इतना अच्छा लिख रही हैं। आपकी दृष्टि में वो भी साहित्यकार नही हैं।
    सबसे पुराने हिन्दी चिट्ठाकारों के रूप में आदरणीय समीरलाल को भी आप साहित्यकार क्यों स्वीकार करेंगी।
    जिनका साहित्य ब्लॉग-जगत से निकलकर अब पुस्तकों के रूप में आ चुका है।
    इन सभी को आप साहित्यकार भले ही न मानें।
    मैं तो इन्हें साहित्यकार मान कर इनका सम्मान करना अपना धर्म समझता हूँ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. यह पोस्ट देर से देख पाया हूँ।

    रचना जी से इतना जरूर कहना चाहूँगा
    कि ब्लॉग और साहित्य विधाएँ नहीं हैं!

    और

    बेनामी जी अगर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करते तो अधिक प्रभावी हो सकती थी!

    उत्तर देंहटाएं
  10. मराठी में तो पाक विधियों को भी साहित्य में ही गिना जाता है। संस्कृत परम्परा में बात करें तो जो हित करे, वह साहित्य है।

    क्यों व्यर्थ विवाद में फंसें। जिस तरह से कलाकार शब्द का प्रयोग सहजता से होता है वैसा ही साहित्यकार शब्द के साथ भी होना चाहिए।

    शास्त्री जी ने जो सोचा है, उसमें कुछ भी ग़लत नहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  11. ...न सिर्फ पाक विधियां, बल्कि सामग्री भी साहित्य में गिनी जाती है। मसलन फलां फलां चीज़ को बनाने में क्या क्या साहित्य लगता है।

    उत्तर देंहटाएं
  12. ...रचना जी ने अभिव्यक्ति-माध्यम के तौर पर साहित्य या ब्लाग को विधा लिख कर कोई गलती नहीं की है। विधा का सीधा सरल और समझ में आने वाला अर्थ शैली, तरीका, विधि, फारमेंट, प्रकार, आदि से ही है। साहित्य और ब्लाग भी इसके अंतर्गत हैं। सूक्ष्मता में जाकर साहित्य की और भी विधाएं और ब्लाग की भी और विधाएं सामने आती हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  13. उच्चारण के साथ यदि व्याकरण भी सही हो तो सोने पर सुहागा होगा। सर्वश्री का प्रयोग एक से अधिक लोगों को सम्बोधित करने के लिए होता है। एक व्यक्ति के लिए श्री ही काफी है।

    उत्तर देंहटाएं

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