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शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

"गीतकार नीरज तुम्हें, नमन हजारों बार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


जिन्दादिल बनकर रहे, मन से सदा उदार।
गीतकार नीरज तुम्हें, नमन हजारों बार।।

स्वप्न झर गये फूल से, लुटा साज-शृंगार।
आँगन से वटवृक्ष का, मिटा आज आकार।।

दया नहीं करता कभी, क्रूर काल का पाश।
नीरज बिन सूना हुआ, हिन्दी का आकाश।।

आज शोक सन्तप्त है, हिन्दी का प्रासाद।
नीरज जी को कर रहे, हिन्दी प्रेमी याद।।

जीवनभर जिसने किया, हिन्दी का ही काम।
अमर रहेगा युगों तक, उस नीरज का नाम।।

गीत "गीत-छन्द लिखने का फैशन हुआ पुराना" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गद्य अगर कविता होगी तो,
कविता का क्या नाम धरोगे?
सूर-कबीर और तुलसी को,
किस श्रेणी में आप धरोगे?
तुकबन्दी औ’ गेय पदों का,
कुछ कहते हैं गया जमाना।
गीत-छन्द लिखने का फैशन,
कुछ कहते हैं हुआ पुराना।
जिसमें लय-गति-यति होती है,
परिभाषा ये बतलाती है।
याद शीघ्र जो हो जाती है,
वो ही कविता कहलाती है।
अपनी कमजोरी की खातिर,
कब तक तर्क-कुतर्क करोगे?
सूर-कबीर और तुलसी को
किस श्रेणी में आप धरोगे?

लिख करके आलेख-लेख को,
अनुच्छेद में बाँट रहे क्यों?
लगा टाट के पैबन्दों को,
काव्य गलीचा गाँठ रहे क्यों?
नहीं जानते पद्य अगर तो,
गद्य लिखो, स्वीकार हमें है।
गद्यकार का रूप तुम्हारा,
दिल से अंगीकार हमें है।
गीतों-ग़ज़लों की नौका में,
कब तक तुम सन्ताप भरोगे?
सूर-कबीर और तुलसी को,
किस श्रेणी में आप धरोगे?

लाओ नूतन शब्द गद्य में,
पावन जल से भरो सरोवर।
शुक्ल-हजारीलाल सरीखे,
बन जाओ तुम गद्य धरोहर।
गद्यकार कहलाने में भी,
घट जाता सम्मान नहीं है।
क्या उपदेशों-सन्देशों में?
मिलता कोई ज्ञान नहीं है।
कड़वी औषध रोग मिटाती,
 पीने में कब तलक डरोगे?
सूर-कबीर और तुलसी को,
किस श्रेणी में आप धरोगे?

गुरुवार, 19 जुलाई 2018

निन्दा प्रस्ताव "स्वामी अग्निवेश जी पर जानलेवा हमला"

आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान
स्वामी अग्निवेश जी पर जानलेवा हमला
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      झारखण्ड प्रदेश में जय श्री राम का नारा लगाने वाले कथित स्वयं सेवकों और भा.ज.पा. के कथित कार्यकर्ताओं ने भीड़ के साथ सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान स्वामी अग्निवेश जी पर जानलेवा हमला किया है। मैं इसकी भर्तस्ना करता हूँ।
      मैं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत तथा भा.ज.पा. के  राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी से माँग करता हूँ कि वह अपनी नीति को स्पष्ट करें या जय श्री राम का नारा लगाने वाले इन कथित स्वयं सेवकों और भा.ज.पा. के कथित कार्यकर्ताओं को अपने संगठन से निकाल बाहर करें।
         इस प्रकार के ओछे और कायराना आचरण से आप हिन्दुत्व बदनाम बदनाम हो रहा है। इससे बढ़कर कायरता क्या होगी कि एक 80 साल के निहत्थे संन्यासी पर कोई भीड़ टूट पड़े ? उसे डंडे और पत्थरों से मारे ? उसके कपड़े फाड़ डाले, उसकी पगड़ी खोल दे, उसे जमीन पर पटक दे ?
       स्वामी अग्निवेश तेलुगुभाषी परिवार की संतान हैं और हिंदी के कट्टर समर्थक हैं। महर्षि दयानंद के वे अनन्य भक्त हैं और कट्टर आर्यसमाजी हैं। वे संन्यास लेने के पहले कलकत्ते में प्रोफेसर थे। वे एक अत्यंत सम्पन्न और सुशिक्षित परिवार के बेटे होने के बावजूद संन्यासी बने। उन्हें पाकिस्तान का एजेंट कहना और गोमांस-भक्षण का समर्थक कहना किसी पाप से कम नहीं है।
       उत्तराखण्ड के समस्त आर्य परिवारों की ओर से मैं इस घटना की निन्दा करता हूँ।
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक


ग़ज़ल "रूप हमें दिखलाते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जो प्यासी धरती की, अपने जल से प्यास बुझाते हैं।
आसमान में जो उगते हैं, वो बादल कहलाते हैं।१।
जो मुद्दत से तरस से थे, जल के बिना अधूरे थे,
उन सूखे नदिया-नालों को, निर्मल नीर पिलाते हैं।
 आसमान में जो उगते हैं, वो बादल कहलाते हैं।२।

चरैवेति का पाठ पढ़ाने, जो धरती पर आकर के,
पतित-पावनी गंगा को, जो सागर तक ले जाते हैं।
आसमान में जो उगते हैं, वो बादल कहलाते हैं।३।

जोर-शोर के साथ गरजकर, अपना नाद सुनाते हैं,
बंजर वसुन्धरा में जो, हरियाली लेकर आते हैं।
आसमान में जो उगते हैं, वो बादल कहलाते हैं।४।

जिन्हें देखकर पागल-मधुकर, गुंजन करने को आते,
वीराने उपवन में भी, जो सुन्दर सुमन खिलाते हैं।
आसमान में जो उगते हैं, वो बादल कहलाते हैं।५।

आहट से बादल की, जन-जीवन में सुख भर जाता है,
मुरझाये चेहरे भी जिनको, देख-देख मुस्काते हैं।
आसमान में जो उगते हैं, वो बादल कहलाते हैं।६।

पौध धान की तो बारिश के, इन्तजार में रहती है,
श्रमिक-किसानों के जीवन में, रोज़गार को लाते हैं।
आसमान में जो उगते हैं, वो बादल कहलाते हैं।७।

जल ही जिनका जीवन है, वो नभ को तकते रहते हैं,
दादुर-मोर-पपीहा के, जीवन में खुशियाँ लाते हैं।
आसमान में जो उगते हैं, वो बादल कहलाते हैं।८।

बादल से ही इन्द्रदेव का, नाम हमेशा जुड़ा हुआ,
इन्द्रधनुष का चौमासे में, “रूप” हमें दिखलाते हैं।
आसमान में जो उगते हैं, वो बादल कहलाते हैं।९।

बुधवार, 18 जुलाई 2018

दोहे "ढोंगी और कुसन्त" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

बने हुए बहुरूपिए, ढोंगी और कुसन्त।
जिनका बारहमास ही, होता रोज बसन्त।।

थोड़े से गद्दार हैं, थोड़े से मक्कार।
नैतिकता का देश में, खिसक रहा आधार।।

गंगा बहती झूठ की, गिरी सत्य पर गाज। 
बढ़ते जाते पाप हैं, दूषित हुआ समाज।।

समझो खारे नीर का, कुछ तो मोल-महत्व। 
सागर से कम है नहीं, आँसू का अस्तित्व।।

हारा है कर्तव्य से, दुनिया में अधिकार। 
श्रम-निष्ठा से ही सदा, बनता है आधार।।

विरह तभी है जागता, जब दिल में हो आग। 
विरह-मिलन के मूल में, होता है अनुराग।।

किया-धरा कुछ भी नहीं, बनते लोग नवाब। 
योगदान जिनका नहीं, पूछें वही हिसाब।।

प्यार-प्रीत की राह में, आया है व्यापार। 
महकेगा कैसे भला, नैसर्गिक शृंगार।।

क्यों बेटों की चाह में, रहे बेटियाँ मार। 
अगर न होती बेटियाँ, थम जाता संसार।।

संविधान में कीजिए, अब ऐसे बदलाव। 
माँ बहनों के साथ में, बुरा न हो वर्ताव।।

लुटे नहीं अब देश में, माँ-बहनों की लाज। 
बेटी को शिक्षित करो, उन्नत करो समाज।।

मंगलवार, 17 जुलाई 2018

रपट "पत्रिका एवं पुस्तकों का विमोचन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

पत्रिका एवं पुस्तकों का विमोचन
       खटीमा (ऊधमसिंहनगर) 15 जुलाई, 2018 को साहित्य शारदा मंच, खटीमा द्वारा ब्लॉक सभागार, खटीमा (ऊधमसिंहनगर) में अपराह्न 2 बजे से पुस्तक विमोचन एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' के व्यक्तित्व-कृतित्व पर केन्द्रित विशेषांक राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका "ट्रू मीडिया" जुलाई - 2018 अंक का विमोचन तत्पश्चात श्रीमती राधा तिवारी (राधेगोपाल) द्वारा रचित सृजन कुंज” (काव्य संग्रह) एवं जीवन का भूगोल” (दोहा संग्रह) का भी सैकड़ों नागरिकों के मध्य विमोचन किया गया। 
जिसमें खटीमा के माननीय विधायक पुष्कर सिंह धामी, खटीमा फाइबर्स के सी.एम.डी. डॉ. आर सी रस्तोगी एवं श्री विजय नाथ शुक्ल उपजिलाधिकारी खटीमा मुख्य अभ्यागत थे। कार्यक्रम का संचालन संस्था के महासचिव डॉ. महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ने किया।
       इस अवसर पर डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक को ड्रूमीडिया के सम्पादक श्री ओमप्रकाश प्रजापति, अशोक कुमार एवं मनोज शर्मा कामदेव ने पगड़ी पहनाकर ड्रूमीडिया गौरव 2018 के सम्मान से अलंकृत किया। मुख्य अभ्यागत डॉ. राकेश चन्द्र रस्तोगी, उपजिलाधिकारी विजयनाथ शुक्ल, विधायक पुष्कर सिंह धामी का अभिनन्दन पत्र के साथ तथा पुस्तकों में अभिमत लिखने वाले व्यक्तियों को शाल ओढ़ा कर सम्मानित किया गया।
     कार्यक्रम में प्रभारी खंडशिक्षा अधिकारी सतीश चन्द्र गुप्ता, राणाप्रताप के प्रबन्धक गीताराम बंसल, दयानन्द इंटर कालेज टनकपुर के रामदेव आचार्य, सवौरा हाईस्कूल के प्रधानाचार्य मनीराम शास्त्री, जिला मन्त्री अरविन्द चौधरी, डॉ. मुकेश कुमार, पूर्व प्रधानाचार्य सुदर्शन वर्मा, गोपालदत्ततिवारी, ट्रूमीडिया के सम्पादक ओमप्रकाश, अशोक कुमार, मनोज कामदेव, प्रधानाचार्य रामदत्त जोशी, नितिन शास्त्री, श्रीमती कविता, श्रीमती अमर भारती, विनीत शास्त्री, श्रीमती पल्लवी, कमलकान्त आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में दिल्ली के सिद्ध साहित्यकार और चित्रकार श्री संजय कुमार गिरि द्वारा बनाया गया डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री का पेंसिल स्कैच भी उनको भेंट किया गया।
उसके बाद कवि गोष्ठी का प्रारम्भ किया गया जिसका संचालन जगदीश कुमुद ने किया जिसमें सरस्वती वन्दना श्री श्रीभगवान मिश्र, श्रीमती राधा तिवारी, अनिल शुक्ल, नरेश तिवारी, डॉ. सिद्धेश्वर सिंह, नबी अहमद मंसूरी, मनोज कामदेव, डॉ. रावेन्दर कौर, रामदेव आर्य, रामचन्द्र प्रेमी, रामरतन यादव, डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री, शहाना कुरैशी, महेन्द्र पांडेय नन्द, कैलाश पांडेय, आकाश कुमार, विपिन जोशी ने काव्य पाठ किया। जिसका प्रसारण ट्रू मीडिया द्वारा चैनल पर प्रसारित किया गया।


























सोमवार, 16 जुलाई 2018

उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर “हरेला” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

“आज हरेला है”
उत्तराखण्ड की संस्कृति की धरोहर 
“हरेला” 
उत्तराखण्ड का प्रमुख त्यौहार है!

उत्तराखण्ड के परिवेश और खेती के साथ 
इसका सम्बन्ध विशेषरूप से जुड़ा हुआ है! 
हरेला पर्व वैसे तो वर्ष में तीन बार आता है- 
1- चैत्र मास में!
(प्रथम दिन बोया जाता है तथा नवमी को काटा जाता है!)
2- श्रावण मास में
(सावन लगने से नौ दिन पहले आषाढ़ में बोया जाता है और दस दिन बाद श्रावण के प्रथम दिन काटा जाता है!)
3- आश्विन मास में!
(आश्विम मास में नवरात्र के पहले दिन बोया जाता है और दशहरा के दिन काटा जाता है!)   
किन्तु उत्तराखण्ड में श्रावण मास में पड़ने वाले हरेला को ही अधिक महत्व दिया जाता है! क्योंकि श्रावण मास शंकर भगवान जी को विशेष प्रिय है। यह तो सर्वविदित ही है कि उत्तराखण्ड एक पहाड़ी प्रदेश है और पहाड़ों पर ही भगवान शंकर का वास माना जाता है। इसलिए भी उत्तराखण्ड में श्रावण मास में पड़ने वाले हरेला का अधिक महत्व है!  
सावन लगने से नौ दिन पहले आषाढ़ में हरेला बोने के लिए किसी थालीनुमा पात्र या टोकरी का चयन किया जाता है। इसमें मिट्टी डालकर गेहूँ, जौ, धान, गहत, भट्ट, उड़द, सरसों आदि 5 या 7 प्रकार के बीजों  को बो दिया जाता है। नौ दिनों तक इस पात्र में रोज सुबह को पानी छिड़कते रहते हैं। दसवें दिन इसे काटा जाता है। 
4 से 6 इंच लम्बे इन पौधों को ही हरेला कहा जाता है।
घर के सदस्य इन्हें बहुत आदर के साथ अपने शीश पर रखते हैं।
घर में सुख-समृद्धि के प्रतीक के रूप में हरेला बोया व काटा जाता है!
इसके मूल में यह मान्यता निहित है कि हरेला जितना बड़ा होगा उतनी ही फसल बढ़िया होगी! साथ ही प्रभू से  फसल अच्छी होने की कामना भी की जाती है! 

आज हरेला है !
उत्तराखण्ड के इस पावन पर्व पर  
मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ!!

रविवार, 15 जुलाई 2018

"विमोचन एवं काव्य गोष्ठी"


आज 15 जुलाई, 2018 को अपराह्न् 2 बजे से साहित्य शारदा मंच, खटीमा द्वारा ब्लॉग सभागार, खटीमा (ऊधमसिंहनगर) में
समय-अपराह्न 2 बजे से पुस्तक विमोचन एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें-
श्रीमती राधा तिवारी (राधेगोपाल) द्वारा रचित सृजन कुंज” (काव्य संग्रह) एवं जीवन का भूगोल” (दोहा संग्रह) का विमोचन तथा
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' के व्यक्तित्व-कृतित्व पर केन्द्रित विशेषांक राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका "ट्रू मीडिया" जुलाई - 2018 अंक का सैकड़ों नागरिकों के मध्य विमोचन किया गया। 
जिसमें खटीमा के माननीय विधायक पुष्कर सिंह धामी, खटीमा फाइबर्स के सी.एम.डी. डॉ. आर सी रस्तोगी एवं श्री विजय नाथ शुक्ल उपजिलाधिकारी खटीमा मुख्य अभ्यागत थे। कार्यक्रम का संचालन संस्था के महासचिव डॉ. महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ने किया।
--
तत्पश्चात कवि गोष्ठी
जिसका प्रसारण ट्रू मीडिया द्वारा चैनल पर होगा।
विस्तृत विवरण कल तक प्रस्तुत किया जायेगा।



शनिवार, 14 जुलाई 2018

बाल कविता "बच्चों का मन होता सच्चा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सीधा-सादा. भोला-भाला।
बच्चों का संसार निराला।।

बचपन सबसे होता अच्छा।
बच्चों का मन होता सच्चा।

पल में रूठें, पल में मानें।
बैर-भाव को ये क्या जानें।।

प्यारे-प्यारे सहज-सलोने।
बच्चे तो हैं स्वयं खिलौने।।

बच्चों से नारी है माता।
ममता से है माँ का नाता।।

बच्चों से है दुनियादारी।
बच्चों की महिमा है न्यारी।।

कोई बचपन को लौटा दो।
फिर से बालक मुझे बना दो।।

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