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रखना है सदभाव का, भारत में परिवेश। अब मजहब के नाम पर, नहीं बँटेगा देश।१। -- राजद्रोह में लिप्त है, जिन्ना की औलाद। पूजागृह के नाम पर, करती वाद-विवाद।२। -- शैतानी करतूत पर, आती है अब घिन्न। भूल गये औकात अब, कट्टरपन्थी जिन्न।३। -- रक्तबीज सी हो गई, मौमिन की सन्तान। मत-मजहब की देश में, चला रही दूकान।४। -- कदम-कदम पर कुचलते, हिन्दू रिति-रिवाज। आस्तीन के साँप का, उग्र हुआ अन्दाज।५। -- नक्शे पर से मेट दो, रोज-रोज की राड़। न्यायालय-आदेश से, कब्जे देओ उखाड़।६। -- हठधर्मी पर जब अड़े, मुल्ला और इमाम। ऐसे में कानून को, करना होगा काम।७। -- पग-पग पर जो कर रहे, लोगों को जो तंग। उन लोगों के लिए क्यों, उठती तरल-तरंग।८। -- |
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