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लगा हुआ ठेले पर ढेर।
गली-गली में बिकते बेर।।
रहते हैं ये काँटों के संग।
मनमोहक हैं बेरों के रंग।।
जो हरियल हैं, वे कच्चे हैं।
जो पीले हैं, वे पक्के हैं।।
ये सबके मन को ललचाते।
हम बच्चों को बहुत लुभाते।।
शंकर जी को भोग लगाओ।
व्रत में तुम बेरों को खाओ।।
बेरी कितनी गदरायी है।
ऋतु बसन्त की मन भायी है।।
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बुधवार, 5 फ़रवरी 2020
बालकविता "गली-गली में बिकते बेर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
गुरुवार, 23 जनवरी 2020
बालकविता "हो विकास भारत के अन्दर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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तीन रंग का झण्डा न्यारा।
हमको है प्राणों से प्यारा।।
त्याग और बलिदानों का वर।
रंग केसरिया सबसे ऊपर।।
इसके बाद श्वेत रंग आता।
हमें शान्ति का ढंग सुहाता।।
सबसे नीचे रंग हरा है।
हरी-भरी यह वसुन्धरा है।।
बीचों-बीच चक्र है सुन्दर।
हो विकास भारत के अन्दर।।
गाओ कौमी आज तराना।
भारत में विकास है लाना।।
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सोमवार, 4 नवंबर 2019
बाल कविता "मेरी प्यारी पोती" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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इतनी जल्दी क्या है बिटिया,
सिर पर पल्लू लाने की। अभी उम्र है गुड्डे-गुड़ियों के संग, समय बिताने की।।
मम्मी-पापा तुम्हें देख कर,
मन ही मन हर्षाते हैं।
जब वो नन्ही सी बेटी की,
छवि आखों में पाते है।।
जब आयेगा समय सुहाना,
देंगे हम उपहार तुम्हें। तन मन धन से सब सौगातें, देंगे बारम्बार तुम्हें।। दादी-बाबा की प्यारी, तुम सबकी राजदुलारी हो। घर आंगन की बगिया की, तुम मनमोहक फुलवारी हो।। सबकी आँखों में बसती हो, इस घर की तुम दुनिया हो। प्राची तुम हो बड़ी सलोनी, मेरी प्यारी मुनिया हो।। |
शनिवार, 22 जून 2019
बालकविता "मत पंछी पिंजडे में धरना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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तोता पेड़ों का बासिन्दा।
कहलाता आजाद परिन्दा।।
आसमान जिनका संसार।
वो ही उड़ते पंख पसार।।
जब कोई भी थक जाता है।
डाली पर वो सुस्ताता है।।
खाने का सामान धरा है।
पर मन में अवसाद भरा है।।
लोहे का हो या कंचन का।
बन्धन दोनों में जीवन का।।
अत्याचार कभी मत करना।
मत पंछी पिंजडे में धरना।।
जेल नहीं होती सुखदायी।
कारावास बहुत दुखदायी।।
मत देना इसको अवसाद।
करना तोते को आज़ाद।।
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शनिवार, 15 अक्टूबर 2016
"बालकविता-सब बच्चों का प्यारा मामा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
शरदपूर्णिमा है जब आती।
चमक चाँद की तब बढ़ जाती।।
धरती पर अमृत टपकाता।
इसका सबको “रूप” सुहाता।।
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नभ में कैसा दमक रहा है।
चन्दा कितना चमक रहा है।।
कभी बड़ा मोटा हो जाता।
और कभी छोटा हो जाता।।
करवा-चौथ पर्व जब आता।
चन्दा का महत्व बढ़ जाता।।
महिलाएँ छत पर जाकर के।
इसको तकती हैं जी-भर के।।
यह सुहाग का शुभ दाता है।
इसीलिए पूजा जाता है।।
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जब भी बादल छा जाता है।
तब मयंक शरमा जाता है।।
लुका-छिपी का खेल दिखाता।
छिपता कभी प्रकट हो जाता।।
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धवल चाँदनी लेकर आता।
आँखों को शीतल कर जाता।।
सारे जग से न्यारा मामा।
सब बच्चों का प्यारा मामा।।
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शनिवार, 30 अप्रैल 2016
"अब गर्मी पर चढ़ी जवानी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
रविवार, 22 फ़रवरी 2015
"फिर से बालक मुझे बना दो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
बच्चों का संसार निराला।।
बचपन सबसे होता अच्छा।
बच्चों का मन होता सच्चा।
पल में रूठें, पल में मानें।
बैर-भाव को ये क्या जानें।।
प्यारे-प्यारे सहज-सलोने।
बच्चे तो हैं स्वयं खिलौने।।
बच्चों से नारी है माता।
ममता से है माँ का नाता।।
बच्चों से है दुनियादारी।
बच्चों की महिमा है न्यारी।।
कोई बचपन को लौटा दो।
फिर से बालक मुझे बना दो।।
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बुधवार, 29 मई 2013
"गैस सिलेण्डर है वरदान" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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गैस सिलेण्डर कितना प्यारा।
मम्मी की आँखों का तारा।।
रेगूलेटर अच्छा लाना।
सही ढंग से इसे लगाना।।
गैस सिलेण्डर है वरदान।
यह रसोई-घर की है शान।।
दूघ पकाओ-चाय
बनाओ।
मनचाहे पकवान बनाओ।।
बिजली अगर नहीं है घर में।
यह प्रकाश देता पल भर में।।
बाथरूम में इसे लगाओ।
गर्म-गर्म पानी को पाओ।।
बीत गया है वक्त पुराना।
अब आया है नया जमाना।।
कण्डे-लकड़ी अब मत लाना।
बड़ा सहज है गैस जलाना।।
किन्तु सुरक्षा को अपनाना।
इसे कार में नही लगाना।
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शुक्रवार, 24 मई 2013
"खीरा गर्मी में वरदान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
तन-मन की जो हरता पीरा
वो ही कहलाता है खीरा
चाहे इसका रस पी जाओ
आधा कड़ुआ, आधा मीठा
संकर खीरा हरा पपीता
दो देशी खीरा होता है
स्वाद बहुत है इसका अच्छा
खीरे को भी करना याद
खीरा गर्मी में वरदान
इसके गुण को लो पहचान
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गुरुवार, 18 अप्रैल 2013
"टॉम-फिरंगी प्यारे-प्यारे..." (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
मित्रों!
यह रचना आज से डेढ़ साल पहले लिखी थी!
कल हमारा टॉम हमसे विदा हो चुका है।
आज उस को इंगित करके लिखी गयी
टॉम-फिरंगी प्यारे-प्यारे।
दोनों चौकीदार हमारे।।
हमको ये लगते हैं अच्छे।
दोनों ही हैं सीधे-सच्चे।।
![]()
जब हम इनको हैं नहलाते।
ये खुश हो साबुन मलवाते।।
बाँध चेन में इनको लाते।
बाबा कंघी से सहलाते।।
इन्हें नहीं कहना बाहर के।
संगी-साथी ये घरभर के।।
ये दोनों हैं बहुत सलोने।
सुन्दर से जीवन्त खिलौने।।
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