|
-- मुझको मेरी मम्मी प्यारी। मैं हूँ उसकी
राजदुलारी।। -- पापा भी हैं
प्यारे-प्यारे। दुनियाभर में सबसे
न्यारे।। -- जब मैं हँसती हूँ खुल करके। खुश हो जाते वो जी
भरके।। -- दादा-दादी, ताऊ-ताई। मुझे खिलाते दूध-मलाई।। -- भइया-दीदी मुझे खिलाते। दोनों मुझको खूब
हँसाते।। -- दिनभर झूला मुझे झुलाते। सबको मेरे बोल रिझाते।। -- |
| "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। मित्रों! आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। |
Linkbar
फ़ॉलोअर
बुधवार, 24 सितंबर 2025
बालकविता "मुझको मेरी मम्मी प्यारी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
शुक्रवार, 16 मई 2025
बालकविता "कौओं का जोड़ा कितना प्यारा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
-- काले रंग का चतुर-चपल, पंछी है सबसे न्यारा। डाली पर बैठा कौओं का, जोड़ा कितना प्यारा। -- नजर घुमाकर देख रहे ये, कहाँ मिलेगा खाना। जिसको खाकर कर्कश स्वर में, छेड़ें राग पुराना।। -- काँव-काँव का इनका गाना, सबको नहीं सुहाता। लेकिन बच्चों को कौओं का, सुर है बहुत लुभाता।। -- कोयलिया की कुहू-कुहू, बच्चों को रास न आती। कागा की प्यारी सी बोली, इनका मन बहलाती।। -- देख इसे आँगन में, शिशु ने बोला औआ-औआ। खुश होकर के काँव-काँवकर, चिल्लाया है कौआ।। -- |
गुरुवार, 28 नवंबर 2024
बालकविता "गैस सिलेण्डर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
-- गैस सिलेण्डर कितना प्यारा। मम्मी की आँखों का तारा।। -- रेगूलेटर अच्छा लाना। सही ढंग से इसे लगाना।। -- गैस सिलेण्डर है वरदान। यह रसोई-घर की है शान।। -- दूघ पकाओ, चाय बनाओ। मनचाहे पकवान बनाओ।। -- बिजली अगर नही है घर में। यह प्रकाश देता पल भर में।। -- बाथरूम में इसे लगाओ। गर्म-गर्म पानी से न्हाओ।। -- बीत गया है वक्त पुराना। अब आया है नया जमाना।। -- जंगल से लकड़ी मत लाना। बड़ा सहज है गैस जलाना।। -- सदा सुरक्षा को अपनाना। इसे कार में नही लगाना।। -- |
रविवार, 24 नवंबर 2024
बालकविता "घर भर की तुम राजदुलारी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" से ![]() घर भर की तुम राजदुलारी ![]() -- प्यारी-प्यारी गुड़िया जैसी, बिटिया तुम हो कितनी प्यारी। मोहक है मुस्कान तुम्हारी, घर भर की तुम राजदुलारी।। -- नये-नये परिधान पहनकर, सबको बहुत लुभाती हो। अपने मन का गाना सुनकर, ठुमके खूब लगाती हो।। -- निष्ठा तुम प्राची जैसी ही, चंचल-नटखट बच्ची हो। मन में मैल नहीं रखती हो, देवी जैसी सच्ची हो।। -- दिनभर के कामों से थककर, जब घर वापिस आता हूँ। तुमसे बातें करके सारे, कष्ट भूल मैं जाता हूँ।। -- मेरे घर-आगँन की तुम तो, नन्हीं कलिका हो सुरभित। हँसते-गाते देख तुम्हें, मन सबका हो जाता हर्षित।। -- |
शनिवार, 23 नवंबर 2024
बालकविता "खरगोश" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" से ![]() "खरगोश" -- रूई जैसा कोमल-कोमल, लगता कितना प्यारा है। बड़े-बड़े कानों वाला, सुन्दर खरगोश हमारा है।। -- बहुत प्यार से मैं इसको, गोदी में बैठाता हूँ। बागीचे की हरी घास, मैं इसको रोज खिलाता हूँ।। -- मस्ती में भरकर यह लम्बी-लम्बी दौड़ लगाता है। उछल-कूद करता-करता, जब थोड़ा सा थक जाता है।। -- तब यह उपवन की झाड़ी में, छिप कर कुछ सुस्ताता है। ताज़ादम हो करके ही, मेरे आँगन में आता है।। -- नित्य-नियम से सुबह-सवेरे, यह घूमने जाता है। जल्दी उठने की यह प्राणी, सीख हमें दे जाता है।। -- |
शुक्रवार, 22 नवंबर 2024
बालकविता "मैं भी जागा, तुम भी जागो" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
गुरुवार, 21 नवंबर 2024
बालकविता "बिन वेतन का सजग सिपाही" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
यह है अपना चिंकू प्यारा। पूरे घर का राजदुलारा।। मन का अच्छा तन का काला। घर भर का सच्चा रखवाला।। हरदम रहता है चौकन्ना। बड़े प्यार से खाता गन्ना।। खुश हो करके नित्य नहाता। अंडा-मांस नहीं ये खाता।। लगता है भोला-भण्डारी। पर दुश्मन चोरों का भारी।। कभी न करता लापरवाही। बिन वेतन का सजग सिपाही।। |
मंगलवार, 19 नवंबर 2024
बालकविता "तीखी-मिर्च कभी मत खाओ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
-- तीखी-तीखी और चर्परी। हरी मिर्च थाली में पसरी।। -- तोते इसे प्यार से खाते। मिर्च देखकर खुश हो जाते।। -- सब्ज़ी का यह स्वाद बढ़ाती। किन्तु पेट में जलन मचाती।। -- जो ज्यादा मिर्ची खाते हैं। सुबह-सुबह वो पछताते हैं।। -- दूध-दही बल देने वाले। रोग लगाते, मिर्च-मसाले।। -- शाक-दाल को घर में लाना। थोड़ी मिर्ची डाल पकाना।। -- तीखी-मिर्च कभी मत खाओ। सदा सुखी जीवन अपनाओ।। -- |
सोमवार, 18 नवंबर 2024
बालकविता "आयी रेल-आयी रेल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
बुधवार, 9 अक्टूबर 2024
बालकविता "राम नाम है सबसे प्यारा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
-- जो करता है अच्छे काम। उसका ही होता है नाम।। -- मर्यादा जो सदा निभाता। उसको राम पुकारा जाता। -- राम नाम है सबसे प्यारा। निर्बल का है एक सहारा।। -- सदाचार होता सुखदायक। जिससे राम बने गणनायक।। -- समता का व्यवहार किया। जीवन का आधार दिया।। -- जब आई सम्मुख अच्छाई।। हुई पराजित सकल बुराई।। -- करो न कुंठित प्रतिभाओं को। करो साक्षर ललनाओं को।। -- हो हर बालक राम जब। विश्वगुरू हो देश तब।। -- |
शुक्रवार, 20 सितंबर 2024
बालकविता "पुरखों तक भोजन पहुँचाता" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
बुधवार, 5 जून 2024
बालकविता "आम और लीची" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
-- आम फलों का राजा होता लीची होती रानी गुठली ऊपर गूदा होता छिलका है बेमानी -- जब बागों में कोयलिया ने, अपना राग सुनाया आम और लीची का समझो, तब मौसम है आया
-- पीले, लाल-हरे रंग पर, सब ही मोहित हो जाते ये खट्टे-मीठे फल सबके, मन को बहुत लुभाते --
लीची पक जाती है पहले, आम बाद में आते बच्चे, बूढ़े-युवा प्यार से, इनको जमकर खाते -- ठण्डी छाँव, हवा के झोंके, अगर चाहते पाना घर के आँगन में फलवाले, बिरुए आप लगाना -- |
लोकप्रिय पोस्ट
-
लगभग 24 वर्ष पूर्व मैंने एक स्वागत गीत लिखा था। इसकी लोक-प्रियता का आभास मुझे तब हुआ, जब खटीमा ही नही इसके समीपवर्ती क्षेत्र के विद्यालयों म...
-
दोहा और रोला और कुण्डलिया दोहा दोहा , मात्रिक अर्द्धसम छन्द है। दोहे के चार चरण होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम तथा तृतीय) मे...
-
नये साल की नयी सुबह में, कोयल आयी है घर में। कुहू-कुहू गाने वालों के, चीत्कार पसरा सुर में।। निर्लज-हठी, कुटिल-कौओं ने,...
-
समास दो अथवा दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हुए नए सार्थक शब्द को कहा जाता है। दूसरे शब्दों में यह भी कह सकते हैं कि ...
-
आज मेरे छोटे से शहर में एक बड़े नेता जी पधार रहे हैं। उनके चमचे जोर-शोर से प्रचार करने में जुटे हैं। रिक्शों व जीपों में लाउडस्पीकरों से उद्घ...
-
इन्साफ की डगर पर , नेता नही चलेंगे। होगा जहाँ मुनाफा , उस ओर जा मिलेंगे।। दिल में घुसा हुआ है , दल-दल दलों का जमघट। ...
-
आसमान में उमड़-घुमड़ कर छाये बादल। श्वेत -श्याम से नजर आ रहे मेघों के दल। कही छाँव है कहीं घूप है, इन्द्रधनुष कितना अनूप है, मनभावन ...
-
"चौपाई लिखिए" बहुत समय से चौपाई के विषय में कुछ लिखने की सोच रहा था! आज प्रस्तुत है मेरा यह छोटा सा आलेख। यहाँ ...
-
मित्रों! आइए प्रत्यय और उपसर्ग के बारे में कुछ जानें। प्रत्यय= प्रति (साथ में पर बाद में)+ अय (चलनेवाला) शब्द का अर्थ है , पीछे चलन...
-
“ हिन्दी में रेफ लगाने की विधि ” अक्सर देखा जाता है कि अधिकांश व्यक्ति आधा "र" का प्रयोग करने में बहुत त्र...
















