-- जीवन में से घट रहा, एक सुहाना साल। क्या खोया क्या पा लिया, करता हूँ पड़ताल।। -- मना रहा है जन्मदिन, मेरा कुल परिवार। सब अपने ही ढंग से, लायेंगे उपहार।। -- जीवन-साथी चल रहा, थाम हाथ में हाथ। चार दशक से अधिक से, हम दोनों हैं साथ।। -- धीरे-धीरे कट गये, यूँ ही कितने साल। प्यार और तकरार में, हुआ न कभी बवाल।। -- होते घर-परिवार में, कभी-कभी मतभेद। किन्तु नहीं अब तक हुए, आपस में मनभेद। -- सुख सरिता में हो रहा, सीधा-सरल बहाव। पार करे भवसिन्धु को, जीवन की ये नाव।। -- ज्यादातर तो कट गयी, थोड़ी है अवशेष। मन में मैं रखता नहीं, कभी किसी से द्वेष।। -- जगतनियन्ता आपसे, इतना है अनुरोध। जब तक इस जग में रहूँ, रखना मुझे सुबोध।। -- होते बढ़ती उमर में, शिथिल सभी के अंग। मेधा मेरे भाल से, ईश न करना भंग।। -- भगवन कर देना कृपा, लगे न कोई रोग। अन्तसमय तक अंग सब, मेरे रहें निरोग।। -- बीत गये सुख के यहाँ, कितने आज बसन्त। देने को शुभकामना, आये हैं श्रीमन्त।। -- दिल से निकली भावना, है सच्चा उपहार। जन्मदिवस पर सभी का, करता हूँ आभार।। |
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