-- परम्परा मत समझना, राखी का त्यौहार। रक्षाबन्धन में निहित, होता पावन प्यार।। -- राखी लेकर आ गयी, बहना बाबुल-द्वार। भाई देते खुशी से, बहनों को उपहार।। -- रक्षाबन्धन पर्व का, दिन है सबसे खास। जिनके बहनें हैं नहीं, वो हैं आज उदास।। -- ममता की इस डोर में, उमड़ा रहा है प्यार। भावनाओं से बँधें हैं, सम्बन्धों के तार।। -- अपनी बहनों से कभी, मत होना नाराज। भइया रक्षा-सूत्र की, रखना हरदम लाज।। -- धागे कच्चे हों भले, ममता है मजबूत। लेकिन भाई का हृदय , कर देते अभिभूत।। -- जरी-सूत या जूट के, धागे हैं अनमोल। गौरव के इतिहास से, सज्जित है भूगोल।। -- राखी के दिन देश में, उमड़ा प्यार-अपार। रिश्ते-नातों की चहक, देख रहा संसार।। -- निश्छल पावन प्यार का, होता जहाँ निवेश। न्यारा सारे जगत से, मेरा भारत देश।। |
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गुरुवार, 11 अगस्त 2022
दोहे "सम्बन्धों के तार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
बुधवार, 10 अगस्त 2022
गीत "भाई-बहन का प्यार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
-- आया राखी का त्यौहार!! अमर रहा है, अमर रहेगा, राखी का त्यौहार।। आया राखी का त्यौहार!! जितनी ममता होती है, माता की मृदु लोरी में, उससे भी ज्यादा ममता है, राखी की डोरी में, भरा हुआ कच्चे धागों में, भाई-बहन का प्यार। अमर रहा है, अमर रहेगा, राखी का त्यौहार।। आया राखी का त्यौहार!! -- भाई को जा करके बाँधें, प्यारी-प्यारी राखी, हर बहना की यह ही इच्छा राखी के दिन जागी, उमड़ा है भगिनी के मन में श्रद्धा-प्रेम अपार! अमर रहा है, अमर रहेगा, राखी का त्यौहार।। आया राखी का त्यौहार!! -- खेल-कूदकर जिस अँगने में, बीता प्यारा बचपन, कैसे याद भुलाएँ उसकी, जो मोहक था जीवन, कभी रूठते और कभी करते थे, आपस में मनुहार। अमर रहा है, अमर रहेगा, राखी का त्यौहार।। आया राखी का त्यौहार!! -- गुज़रे पल की याद दिलाने, आई बहना तेरी, रक्षा करना मेरे भइया, विपदाओं में मेरी, दीर्घ आयु हो हर भाई की, ऐसा वर दे दो दातार। अमर रहा है, अमर रहेगा, राखी का त्यौहार।। आया राखी का त्यौहार!! -- रक्षाबन्धन पर भाई की, सूनी न हो कलाई, पहुँचा देना मेरी राखी, अरे डाकिए भाई, बहुत दुआएँ दूँगी तुझको, तेरा मानूँगी उपकार! अमर रहा है अमर रहेगा, राखी का त्यौहार!! आया राखी का त्यौहार!! -- |
शनिवार, 21 अगस्त 2021
रक्षाबन्धन "भावनाओं से हैं बँधें, सम्बन्धों के तार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ बहनों को मत भूलना, याद दिलाता पर्व। रक्षाबन्धन पर्व पर, भारत को है गर्व।। -- परम्परा मत समझना, राखी का त्यौहार। रक्षाबन्धन में निहित, होता पावन
प्यार।। -- राखी लेकर आ गयी, बहना
बाबुल-द्वार। भाई देते खुशी से, बहनों को उपहार।। -- रक्षाबन्धन पर्व का, दिन है सबसे खास। जिनके बहनें हैं नहीं, वो हैं आज उदास।। -- ममता की इस डोर में, उमड़ा रहा है
प्यार। भावनाओं से हैं बँधें, सम्बन्धों के
तार।। -- अपनी बहनों से कभी, मत होना नाराज। भइया रक्षा-सूत्र की, रखना हरदम लाज।। -- कच्चे धागों में छिपी, ममता है मजबूत। जो भाई के हृदय को, कर देती अभिभूत।। -- जरी-सूत या जूट के, धागे हैं अनमोल। गौरव के इतिहास से, सज्जित है
भूगोल।। -- राखी के दिन देश में, उमड़ा
प्यार-अपार। रिश्ते-नातों की चहक, देख रहा संसार।। -- निश्छल पावन प्यार का, होता जहाँ निवेश। सबसे न्यारा जगत में, मेरा भारत देश।। -- |
सोमवार, 3 अगस्त 2020
दोहे "सिसक रहे हैं तार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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सभी कोरियर बन्द हैं, पत्रालय लाचार।
कोरोना में कैद है, राखी का त्यौहार।।
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कोरोना में रह गया, अब मन में संकल्प।
राखी प्रेषण का नहीं, कोई कहीं विकल्प।।
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पावन-प्रेम प्रतीक के, सिसक रहे हैं
तार।
फोन और सन्देश में, सिमट गया है प्यार।।
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दूर-दूर बहनें बसीं, भाई हैं लाचार।
आना-जाना बन्द है, कैसे दें उपहार।।
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आया जीवन में नहीं, कभी निगोड़ा साल।
पर्व और त्यौहार का, बुरा हो गया हाल।।
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सिद्ध हो गया जगत में, चीन आज गद्दार।
पापी ड्रैगन-चीन को, कोस रहा संसार।।
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मानवीयता के किये, जिसने मानक ध्वस्त।
उसके क्रूर मजाक से, सारी दुनिया त्रस्त।।
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गुरुवार, 18 अगस्त 2016
गीत "भाई-बहन का प्यार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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हरियाला सावन ले आया, नेह भरा उपहार।
आया राखी का त्यौहार!
आया राखी का त्यौहार!!
यही कामना करती मन में, गूँजे घर में शहनाई,
खुद चलकर बहना के द्वारे, आये उसका भाई,
कच्चे धागों में उमड़ा है भाई-बहन का प्यार।
आया राखी का त्यौहार!
आया राखी का त्यौहार!!
तिलक लगाती और खिलाती, उसको स्वयं मिठाई,
आज किसी के भइया की, ना सूनी रहे कलाई,
भाई के ही कन्धों पर, होता रक्षा का भार।
आया राखी का त्यौहार!
आया राखी का त्यौहार!!
पौध धान के जैसी बिटिया, बढ़ी कहीं पर-कहीं पली,
बाबुल के अँगने को तजकर, अन्जाने के संग चली,
रस्म-रिवाज़ों ने खोला है, नूतन घर का द्वार।
आया राखी का त्यौहार!
आया राखी का त्यौहार!!
रखती दोनों घर की लज्जा, सदा निभाती नाता,
राखी-भइयादूज, बहन-बेटी की याद दिलाता,
भइया मुझको भूल न जाना, विनती बारम्बार।
आया राखी का त्यौहार!
आया राखी का त्यौहार!!
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बुधवार, 17 अगस्त 2016
दोहे "रंग-बिरंगे तार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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कितना अद्भुत है यहाँ, रिश्तों का संसार।
जीवन जीने के लिए, रिश्ते हैं आधार।१।
--
केवल भारत देश में, रिश्तों का सम्मान।
रक्षाबन्धन पर्व की, अलग अनोखी शान।२।
--
कच्चे धागों से बँधी, रक्षा की पतवार।
रोली-अक्षत-तिलक में, छिपा हुआ है प्यार।३।
--
भाई की लम्बी उमर, ईश्वर करो प्रदान।
बहनें भाई के लिए, माँग रहीं वरदान।४।
--
सदा बहन की मदद को, भइया हों तैयार।
रक्षा का यह सूत्र है, राखी का उपहार।५।
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चाहे युग बदलें भले, बदल जाय संसार।
अमर रहेगा हमेशा, यह पावन त्यौहार।६।
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राखी के ही तार में, छिपी हुई है प्रीत।
जब तक चन्दा-सूर हैं, अमर रहेगी रीत।७।
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राखी के दिन किसी का, सूना रहे न हाथ।
प्रेम-प्रीत की रीत का, छूटे कभी न साथ।८।
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रेशम-जरी-कपास के, रंग-बिरंगे तार।
ले करके बहना चली, अब बाबुल के द्वार।९।
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शुक्रवार, 13 नवंबर 2015
“आज बहनों की हैं ये ही आराधना” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
| भइया दूज के पावन अवसर पर अपना एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ! |
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