आयेगा इस वर्ष
भी, नया-नवेला साल।
आशाएँ फिर से
जगीं, सुधरेंगे अब हाल।।
--
नव-वर्ष खड़ा
द्वारे-द्वारे!
नव-वर्ष खड़ा
द्वारे-द्वारे!
गधे चबाते हैं
काजू,
महँगाई खाते
बेचारे!!
काँपे माता
काँपे बिटिया, भरपेट न जिनको भोजन है,
क्या सरोकार
उनको इससे, क्या नूतन और पुरातन है,
सर्दी में फटे
वसन फटे सारे!
नव-वर्ष खड़ा
द्वारे-द्वारे!!
जो इठलाते हैं
दौलत पर, वो खूब मनाते नया-साल,
जो करते श्रम
का शीलभंग,वो खूब कमाते द्रव्य-माल,
वाणी में केवल
हैं नारे!
नव-वर्ष खड़ा
द्वारे-द्वारे!!
नव-वर्ष हमेशा
आता है, सुख के निर्झर अब तक न बहे,
सम्पदा न लेती
अंगड़ाई, कितने दारुण दुख-दर्द सहे,
मक्कारों के
वारे-न्यारे!
नव-वर्ष खड़ा
द्वारे-द्वारे!!
रोटी-रोजी के
संकट में, नही गीत-प्रीत के भाते हैं,
कहने को अपने
सारे हैं, पर झूठे रिश्ते-नाते हैं,
सब स्वप्न हो
गये अंगारे!
नव-वर्ष खड़ा
द्वारे-द्वारे!!
टूटा तन-मन भी
टूटा है, अभिलाषाएँ बस जिन्दा हैं,
आयेगीं जीवन
में बहार, यह सोच रहा कारिन्दा हैं,
कब चमकेंगें नभ
में तारे!
नव-वर्ष खड़ा
द्वारे-द्वारे!!
|
| "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। मित्रों! आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। |
Linkbar
फ़ॉलोअर
शुक्रवार, 26 दिसंबर 2014
"नयासाल-एक दोहा और गीत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
सोमवार, 23 दिसंबर 2013
"सुधरेंगे बिगड़े हुए हाल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
![]()
चमकेगा अब गगन-भाल।
आने वाला है नया
साल।।
आशाएँ सरसती हैं मन
में,
खुशियाँ बरसेंगी
आँगन में,
सुधरेंगे बिगड़े
हुए हाल।
आने वाला है नया
साल।।
होंगी सब दूर
विफलताएँ,
आयेंगी नई सफलताएँ,
जन्मेंगे फिर से
पाल-बाल।
आने वाला है नया
साल।।
सिक्कों में नहीं
बिकेंगे मन,
सत्ता ढोयेंगे पावन
जन,
अब नहीं चलेंगी
वक्र-चाल।
आने वाला है नया
साल।।
हठयोगी, पण्डे और ग्रन्थी,
हिन्दू-मुस्लिम, कट्टरपन्थी,
अब नहीं बुनेंगे
धर्म-जाल।
आने वाला है नया
साल।।
|
सोमवार, 2 जनवरी 2012
"आया जीवन में नया साल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
इतिहास बन गया, गया साल। आया जीवन में, नया साल।। फिर स्वप्न सलोने टूटेंगे, कुछ मीत पुराने कुछ रूठेंगे, लेकिन जीवन के उपवन में, आशा के अंकुर फूटेंगे, खुशियों का होगा फिर धमाल। आया जीवन में, नया साल।। अब समय सुहाना आयेगा, सुख का सूरज मुस्कायेगा, जब अमराई बौराएगी, कोकिल स्वर भरकर गायेगा, अपना उत्तर देगा सवाल। आया जीवन में, नया साल।। भँवरे फिर से मँडरायेंगे, गुन-गुन गुंजार सुनायेंगे, खिल जाएँगे फिर सरस-सुमन, हँस-हँस मकरन्द लुटाएँगे, दूषित नहीं होगा कोई ताल। आया जीवन में, नया साल।। |
लोकप्रिय पोस्ट
-
लगभग 24 वर्ष पूर्व मैंने एक स्वागत गीत लिखा था। इसकी लोक-प्रियता का आभास मुझे तब हुआ, जब खटीमा ही नही इसके समीपवर्ती क्षेत्र के विद्यालयों म...
-
दोहा और रोला और कुण्डलिया दोहा दोहा , मात्रिक अर्द्धसम छन्द है। दोहे के चार चरण होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम तथा तृतीय) मे...
-
नये साल की नयी सुबह में, कोयल आयी है घर में। कुहू-कुहू गाने वालों के, चीत्कार पसरा सुर में।। निर्लज-हठी, कुटिल-कौओं ने,...
-
समास दो अथवा दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हुए नए सार्थक शब्द को कहा जाता है। दूसरे शब्दों में यह भी कह सकते हैं कि ...
-
आज मेरे छोटे से शहर में एक बड़े नेता जी पधार रहे हैं। उनके चमचे जोर-शोर से प्रचार करने में जुटे हैं। रिक्शों व जीपों में लाउडस्पीकरों से उद्घ...
-
इन्साफ की डगर पर , नेता नही चलेंगे। होगा जहाँ मुनाफा , उस ओर जा मिलेंगे।। दिल में घुसा हुआ है , दल-दल दलों का जमघट। ...
-
आसमान में उमड़-घुमड़ कर छाये बादल। श्वेत -श्याम से नजर आ रहे मेघों के दल। कही छाँव है कहीं घूप है, इन्द्रधनुष कितना अनूप है, मनभावन ...
-
"चौपाई लिखिए" बहुत समय से चौपाई के विषय में कुछ लिखने की सोच रहा था! आज प्रस्तुत है मेरा यह छोटा सा आलेख। यहाँ ...
-
मित्रों! आइए प्रत्यय और उपसर्ग के बारे में कुछ जानें। प्रत्यय= प्रति (साथ में पर बाद में)+ अय (चलनेवाला) शब्द का अर्थ है , पीछे चलन...
-
“ हिन्दी में रेफ लगाने की विधि ” अक्सर देखा जाता है कि अधिकांश व्यक्ति आधा "र" का प्रयोग करने में बहुत त्र...

