चराग़ लेके मुकद्दर तलाश करता हूँ
मैं कायरों में सिकन्दर तलाश करता हूँ
मिला नही कोई गम्भीर-धीर सा आक़ा
मैं सियासत में समन्दर तलाश करता हूँ
लगा लिए है मुखौटे शरीफजादों के
विदूषकों में कलन्दर तलाश करता हूँ
सजे हुए हैं महल मख़मली गलीचों से
रईसजादों में रहबर तलाश करता हूँ
मिला नहीं है मुझे आजतक कोई पत्थर
अन्धेरी रात में चकमक तलाश करता हूँ
पहन लिए है सभी ने लक़ब के दस्ताने
मैं इनमें “रूप” सुखनवर तलाश करता हूँ
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