अपकर्ष है इस वर्ष का, उस वर्ष का उत्कर्ष है. दे रहा दस्तक हमारे द्वार पर नव-वर्ष है। लायेगा आनन्द खुशियों से भरे होंगे सदन, इसलिए सबके दिलों में भर गया नव-हर्ष है।। |
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सोमवार, 21 दिसंबर 2009
"मुक्तक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
शुक्रवार, 11 दिसंबर 2009
"विपत्ति जब सताती है, नमन शैतान करते है।" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
गुरुवार, 19 मार्च 2009
आप माने या न मानें: ब्लॉगर मित्रों को मेरा सुझाव (डॉ.रुपचन्द्र शास्त्री मयंक)
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कई मित्र टिप्पणी अक्सर, सब रचनाओं पर कर देते हैं, सुन्दर, बढ़िया लिख करके, निज जान छुड़ा भर लेते है। कुछ तो बिना पढ़े ही, केवल कापी-पेस्ट किया करते हैं, सबको खुश करने को, वे प्रतिदान दिया करते है। भाई मेरे, रचना के बारे में, भी लिख दिया करो। आँख मूँद कर, एक तरह की, नही टिप्पणी किया करो। |
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