-- आता है शिक्षक दिवस, एक साल के बाद। गुरुओं के सम्मान की, हमें दिलाने याद।। -- राधाकृष्णन आपको, करते नमन हजार। जिसने शिक्षक दिन दिया, भारत को उपहार।। -- धन्य हुए गुरुजन सभी, पाकर यह सौगात। आओ सब मिल कर करें, अध्यापक की बात।। -- जो कहलाता था कभी, प्रभु से अधिक महान। घटा आज क्यों देश में, शिक्षक का सम्मान।। -- अध्यापकदिन पर सभी, गुरुवर करें विचार। बन्द करें अपने यहाँ, ट्यूशन का व्यापार।। -- छात्र और शिक्षक अगर, सुधर जाएँगे आज। तो फिर से हो जाएगा, उन्नत देश-समाज।। |
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गुरुवार, 5 सितंबर 2024
दोहे "शिक्षक दिवस" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
सोमवार, 5 सितंबर 2022
दोहे "गुरुओं का सोपान" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
गुरुओं के सम्मान को, करता रहे समाज।। -- ज्ञानदायिनी मात के, सत् गुरु होते दूत।। देते हैं उस ज्ञान को, जो होता अनुभूत।। -- जो रचते साहित्य को, उनका होता नाम। दिखलाना सन्मार्ग को, सत् गुरुओं का काम।। -- जीवनभर मत छोड़ना, गुरुओं का सोपान। हर दम होना चाहिए, गुरुओं का सम्मान।। -- गुरुओं को भी चाहिए, करें न ऐसे काम। जिससे गरिमा ज्ञान की, हो जाये बदनाम।। -- अब तो महँगे दाम पर, घर-घर बिकता ज्ञान। हर ऊँची दूकान का, फीका है पकवान।। -- कहाँ पढ़ाएँ पाल्य को, अभिभावक हैरान। गली-गली में खुल गयीं, शिक्षा की दूकान।। -- शिक्षक दिन के पर्व पर, शिक्षक करें विचार। बन्द करें अपने यहाँ, ट्यूशन का व्यापार।। -- |
शुक्रवार, 4 सितंबर 2020
दोहे "गुरुओं का दिन" डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
|
--
राधाकृष्णन आपको, नमन हजारों बार।
शिक्षक दिन का आपने, दिया हमें उपहार।।
--
सच्ची निष्ठा से
सुखद, मिलते हैं परिणाम।
गुरुओं का दिन आ
गया, कर लो उन्हें प्रणाम।।
--
परम्परा मत समझना,
अध्यापक का वार।
पाँच सितम्बर को
करो, गुरुओं का आभार।।
--
मात-पिता आचार्य
का, करना आदर-मान।
गुरुओं की ही कृपा
से, मिलता है गुण-ज्ञान।।
--
जो गढ़ते हैं पात्र को, उनका होता नाम।
दिखलाना सन्मार्ग को, सत् गुरुओं का काम।।
--
भरे पड़े हैं आज
तो, जग में गुरुघंटाल।
गुरुओं पावन ताल
में, मत बनना घड़ियाल।।
--
सद्गुरु अपने
शिष्य का, दूर करे अज्ञान।
सद्गुरुओं गुरुओं
का कीजिए, पूजन-वन्दन ध्यान।।
--
जीवनरूपी नाव का, सद्गुरु
है पतवार।
भवसागर से शिष्य
को, करता है गुरु पार।।
--
कच्ची माटी से करे,
निर्मित सुन्दर पात्र।
सद्गुरुदेव कुम्हार सा, बाकी सब हैं छात्र।।
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मंगलवार, 4 सितंबर 2018
शिक्षक दिवस "बिकता है ज्ञान" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
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विद्याएँ लुप्तप्रायः
छात्र कहाँ जायें
शिक्षा का शोर
ट्यूशन का जोर
सजी हैं दूकानें
लोग लगे हैं कमाने-खाने
गुरू गायब
विद्यालयों की भरमार
जगत-गुरू के
अच्छे नही हैं आसार
जोर-शोर से मनाइए
सम्मान लुटाइए
ज्ञान की अमावस है
कल शिक्षक दिवस है
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शुक्रवार, 4 सितंबर 2015
दोहे "राधाकृष्णन-कृष्ण का, है अद्भुत संयोग" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
आता है शिक्षक दिवस, एक साल के बाद।
गुरुओं के सम्मान की, हमें दिलाने याद।।
--
राधाकृष्णन आपको, नमन हजारों बार।
शिक्षक-दिन का दे दिया, भारत को उपहार।।
--
धन्य हुए गुरुजन सभी, पाकर यह सौगात।
आओ सब मिल कर करें, अध्यापक की बात।।
--
जो कहलाता था कभी, प्रभु से अधिक महान।
आज घटा क्यों देश में, उस शिक्षक मान।।
--
अध्यापकदिन पर सभी, गुरुवर करें विचार।
बन्द करें अपने यहाँ, ट्यूशन का व्यापार।।
--
छात्र और शिक्षक अगर, सुधर जाएँगे आज।
तो फिर से हो जाएगा, उन्नत देश-समाज।।
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शुक्रवार, 5 सितंबर 2014
"शिक्षक दिवस-कुछ दोहे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
![]() |
आता है शिक्षक दिवस, एक साल के बाद।
गुरुओं के सम्मान की, हमें दिलाने याद।।
सर्वपल्ली को आज हम, करते नमन हजार।
जिसने शिक्षक दिन दिया, भारत को उपहार।।
धन्य हुए गुरुजन सभी, पाकर यह सौगात।
आओ सब मिल कर करें, अध्यापक की बात।।
जो कहलाता था कभी, प्रभु से अधिक महान।
घटा आज क्यों देश में, शिक्षक का सम्मान।।
अध्यापकदिन पर सभी, गुरुवर करें विचार।
बन्द करें अपने यहाँ, ट्यूशन का व्यापार।।
छात्र और शिक्षक अगर, सुधर जाएँगे आज।
तो फिर से हो जाएगा, उन्नत देश-समाज।।
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गुरुवार, 4 सितंबर 2014
बुधवार, 4 सितंबर 2013
"शिक्षक का सम्मान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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गुरु की महिमा का करें, कैसे शब्द बखान।
जग में मिलता है नहीं, बिना गुरू के ज्ञान।।
अन्तस को दे रौशनी, गुरू ज्योति का पुंज।
गुरु के शुभ आशीष से, सुरभित होय निकुंज।।
चला रहे अनपढ़ जहाँ, शिक्षा की दूकान।
अब कैसे मिल पायेगा, अज्ञानी से ज्ञान।।
सतगुरु ही तो शिष्य का, करता है कल्याण।
गुरू बिना होता नहीं, जीवन का उत्थान।।
संस्कार देता गुरू, पाता सिख अमिताभ।
बिना दीक्षा के नहीं, शिक्षा का कुछ लाभ।।
एक दिवस ही क्यों करें, शिक्षक का सम्मान।
प्रतिदिन करना चाहिए, अपने गुरु का मान।।
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बुधवार, 5 सितंबर 2012
दोहे "शिक्षक दिवस" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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आता है शिक्षक दिवस, एक साल के बाद। गुरुओं के सम्मान की, हमें दिलाने याद।। सर्वपल्ली को आज हम, करते नमन हजार। जिसने शिक्षक दिन दिया, भारत को उपहार।। धन्य हुए गुरुजन सभी, पाकर यह सौगात। आओ सब मिल कर करें, अध्यापक की बात।। जो कहलाता था कभी, प्रभु से अधिक महान। घटा आज क्यों देश में, शिक्षक का सम्मान।। अध्यापकदिन पर सभी, गुरुवर करें विचार। बन्द करें अपने यहाँ, ट्यूशन का व्यापार।। छात्र और शिक्षक अगर, सुधर जाएँगे आज। तो फिर से हो जाएगा, उन्नत देश-समाज।। |
मंगलवार, 4 सितंबर 2012
"गुरू प्रथम सोपान है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
अध्यापक का सबसे ज्यादा भारत में सम्मान है। गोविन्द तक पहुँचाने वाला गुरू प्रथम सोपान है।। गुरू ज्ञान का शक्ति पुंज है, गुरू ही करुणा का निधान है, विद्याओं का यह निकुंज है, सबल राष्ट्र का महाप्राण है, कंचन सा कर देने वाला गुरू पारस पाषाण है। गोविन्द तक पहुँचाने वाला गुरू प्रथम सोपान है।। माँ ने दी सुन्दर सी काया, शिक्षक ने जीना सिखलाया, सामाजिकता कैसे आती, गुरू ने बालक को बतलाया, गुरू चरणों की रज में रचते-बसते चारों धाम हैं। गोविन्द तक पहुँचाने वाला गुरू प्रथम सोपान है।। आज हमारे हाथों में है, रोली, अक्षत और चन्दन, तन से मन से धन से हम, करते शिक्षक का अभिनन्दन, पाँच सितम्बर को भारत में, शिक्षक का सम्मान है। गोविन्द तक पहुँचाने वाला गुरू प्रथम सोपान है।। |
रविवार, 4 सितंबर 2011
"शिक्षक दिवस" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
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आता है शिक्षक दिवस, एक साल के बाद। गुरुओं के सम्मान की, हमें दिलाने याद।। सर्वपल्ली को आज हम, करते नमन हजार। जिसने शिक्षक दिन दिया, भारत को उपहार।। धन्य हुए गुरुजन सभी, पाकर यह सौगात। आओ सब मिल कर करें, अध्यापक की बात।। जो कहलाता था कभी, प्रभु से अधिक महान। घटा आज क्यों देश में, शिक्षक का सम्मान।। अध्यापकदिन पर सभी, गुरुवर करें विचार। बन्द करें अपने यहाँ, ट्यूशन का व्यापार।। छात्र और शिक्षक अगर, सुधर जाएँगे आज। तो फिर से हो जाएगा, उन्नत देश-समाज।। |
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