क्या ब्लागर साहित्यकार नही होता है?
क्या साहित्यकार का सामान्य-ज्ञान शून्य होना चाहिए?
बीस अप्रैल को मैंने एक पोस्ट लगाई थी। जिसमें जरा बताइए तो शीर्षक से एक माथापच्ची थी।
चित्र उत्तराखण्ड की प्रसिद्ध दरगाह पीरान कलियर शरीफ का था।
साहित्य शारदा मंच, खटीमा की कार्यसमिति ने इसका उत्तर सबसे पहले देने वाले तीन विजेताओं को साहित्य शारदा मंच, के सर्वोच्च सम्मान ‘‘साहित्य-श्री’’ से पुरस्कृत करने का निर्णय किया।
एक बेनामी ने टिप्पणीकार ने इस पर अपना कमेंट निम्न रूप में किया-
बेनामी ने कहा…
श्रीमान जी, साहित्य श्री साम्मान का स्तर इतना मत गिराईये कि
एक पहेली के जवाब मे बंटने लग जाये। आगे आपकी मर्जी।
April 24, 2009 12:31 PM
उसका उत्तर मैंने निम्नवत् दिया-
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…
बेनामी जी।
इतना भी बता दें कि क्या ये तीन लोग आपकी नजर में साहित्यकार नहीं हैं।
भइया!
मेरी लिस्ट में तो ये साहित्यकार ही हैं। सोच-समझकर ही यह निर्णय किया गया है।
फिर रचना जी के निम्न दो कमेंट आये-
रचना ने कहा…
"इतना भी बता दें कि क्या ये तीन लोग आपकी नजर में साहित्यकार नहीं हैं।
"jee haan yae teen log saahitykaar nahin haen blogger haen
blog aur saahity do alag alag vidha haen ।
April 24, 2009 1:47
रचना ने कहा…
anaam kaemnt mera nahin haen yae bhi kehddena jaruri haen
April 24, 2009 1:53 PM
जिनका उत्तर मैंने रचना जी को इस रूप में दिया।
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…
वाह वाह रचना जी!
आपकी टिप्पणी पर तो आपको साहित्य-श्री के अतिरिक्त जो भी सम्मान हो वह दे देना चाहिए।
मैं इस व्यर्थ की चर्चा को आगे बढ़ाना नही चाहता था।
परन्तु आपने प्रेरित किया है या यों कहिए कि स्वाभिमान को ललकारा है,
तो मुझे अलग से इस पर एक पोस्ट लगानी पड़ेगी।
हर्ज ही क्या है ? एक खुली बहस तो हो ही जायेगी।
अरे, आप तो Comment की वर्तनी भी अशुद्ध लिखती हैं।
फिर आप ब्लागर को साहित्यकार कब स्वीकार करने वाली हैं
एक बार फिर बता दीजिए कि हिन्दी के धुरन्धर लिखाड़ क्या साहित्यकार नही होते हैं?
आशीष खण्डेलवाल एक कम्प्यूटरविद् हैं।
क्या आप कम्प्यूटर विज्ञान को साहित्य नही मानती है?
वन्दना अवस्थी दूबे जो इतना अच्छा लिख रही हैं।
आपकी दृष्टि में वो भी साहित्यकार नही हैं।
सबसे पुराने हिन्दी चिट्ठाकारों के रूप में आदरणीय समीरलाल को भी
आप साहित्यकार क्यों स्वीकार करेंगी?
जिनका साहित्य ब्लॉग-जगत से निकलकर अब पुस्तकों के रूप में आ चुका है।
इन सभी को आप साहित्यकार भले ही न मानें।
मैं तो इन्हें साहित्यकार मान कर इनका सम्मान करना अपना धर्म समझता हूँ।
April 24, 2009 3:42 PM
अब मैं ब्लाग जगत के सभी चिट्ठाकारों से निवेदन करना चाहता हूँ -
कि निम्न दो बिन्दुओं पर अपने-अपने विचार मुझे दिशा-निर्देश के रूप में देने की कृपा करें।
क्या ब्लागर साहित्यकार नही होता है?
क्या साहित्यकार का सामान्य-ज्ञान शून्य होना चाहिए?