-- छोटे पुत्र विनीत का, जन्मदिवस है आज। बादल नभ में खुशी से, बजा रहा है साज।। -- पूरे किये विनीत ने, आज छियालिस साल। जीवन सुखमय हो गया, सुधर गयें हैं हाल।। -- दो हजार पच्चीस में, बरसी हैं सौगात। पसरा है परिवार में, खुशियों का अनुपात।। -- जन्मी पन्द्रह साल में, देवी सी सन्तान। किलकारी से गूँजता, अब यह कुंज-वितान।। -- अनुकम्पा का ईश की, कैसे करूँ बखान। सेवारत सरकार में, मेरी हैं सन्तान।। -- इस पड़ाव में उमर के, नहीं मुझे कुछ चाह। बस मुझको परिवार की, मिलती रहे पनाह।। -- देता शुभ आशीष मैं, तुमको सौ-सौ बार। रहना घर-परिवार में, बनकर सदा उदार।। -- अभ्यागत के लिए तुम, बन्द न करना द्वार। कभी किसी भी मोड़ पर, होना मत लाचार।। -- |
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शनिवार, 21 जून 2025
जन्मदिन "पूरे किये विनीत ने, आज छियालिस साल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
शुक्रवार, 13 सितंबर 2024
जन्मदिन "मेरे ज्येष्ठ पुत्र का जन्मदिन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
मित्रों! आज मेरे ज्येष्ठ पुत्र नितिन का जन्मदिन है। अपनी शुभकामनाओं के साथ मैं नितिन के कुछ दुर्लभ चित्र प्रस्तुत कर रहा हूँ। -- जीवन के क्रीड़ांगन में, तुम रहो विजेता। जन्मदिवस की बेला पर, आशीष तुम्हें मैं देता। -- आदर्शों की नींव हमेशा, अपने बच्चों में डालो। जैसे मैंने पाला तुमको, वैसे ही तुम भी पालो।। -- जीवनसाथी के संग में तुम, वाद-विवाद न पनपाना। आदर्शो की बेल हमेशा, घर-आँगन में उपजाना।। -- दादा-दादी, मात-पिता की सेवा करना मन से। कभी अनुज को अलग न करना, बेटा अपने जीवन से।। -- सच्चाई के साथ हमेशा निष्ठा से तुम काम करो। लम्बा जीवन जियो, और दुनिया में अपना नाम करो।। -- |
रविवार, 4 फ़रवरी 2024
जन्मदिन-गीत "ज़िन्दगी की जेल में, मैं पल रहा हूँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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-- जन्मदिन का जश्न है केवल
छलावा, लोग कहते हैं अँधेरे को
सवेरा।। घट गया इक साल मेरी उम्र का, लोग कहते जन्मदिन है आज
मेरा।। -- आस का दामन पकड़कर चल रहा
हूँ, ज़िन्दगी की जेल में, मैं पल
रहा हूँ, इस धरा की एक ढलती शाम हूँ
मैं क्या पता कब उजड़ जाए ये
बसेरा। लोग कहते जन्मदिन है आज
मेरा।। -- टिमटिमाता हुआ सा खद्योत
हूँ मैं, सिन्धु में ठहरा हुआ जलपोत
हूँ मैं, सबल लहरों से भला कब तक
लड़ूँगा, तिमिर ने चारों तरफ से आज
घेरा। लोग कहते जन्मदिन है आज
मेरा।। -- कब तलक लंगर सम्भाले मैं
रहूँगा, कब तलक इस रोग की पीड़ा
सहूँगा, है सफर की आखिरी मंजिल अज़ल, चाँदनी के बाद आता है
अँधेरा। लोग कहते जन्मदिन है आज
मेरा।। -- |
मंगलवार, 14 मार्च 2023
"चौदह मार्च-मेरी पौत्री का जन्मदिन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
-- मेरी पोती कितनी प्यारी।। -- जन्मदिवस है आज तुम्हारा, चहक रहा है आँगन सारा, मेरी पोती कितनी प्यारी।। -- चाँद-सितारे और दिवाकर, साज बजाते हैं रत्नाकर, सुनकर बिटिया की किलकारी। मेरी पोती कितनी प्यारी।। -- बिटिया की महिमा अनन्त है, बिटिया से घर में बसन्त है, बिटिया से महकी फुलवारी। मेरी पोती कितनी प्यारी।। -- वसुन्धरा की प्यारी मूरत, अम्बा सी कन्या की सूरत, जगदम्बा का जग आभारी। मेरी पोती कितनी प्यारी।। -- |
गुरुवार, 29 सितंबर 2022
मेरी जीवन संगिनी का जन्मदिन "साथ तुम मझधार में मत छोड़ देना" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
-- जन्मदिन पर मैं सतत् उपहार दूँगा। प्यार जितना है हृदय में, प्यार दूँगा।। साथ में रहते जमाना हो गया है, “रूप” भी अब तो पुराना हो गया
है, मैं तुम्हें फिर भी नवल उद्गार दूँगा। प्यार जितना है हृदय में, प्यार दूँगा।। एक पथ के पथिक ही हम और तुम हैं, एक रथ के चक्र भी हम और तुम हैं, नाव जब भी डगमगायेगी भँवर में, हाथ में अपनी तुम्हें पतवार दूँगा। प्यार जितना है हृदय में, प्यार दूँगा।। साथ तुम मझधार में मत छोड़ देना, प्रीत की तुम डोर को मत तोड़ देना, सुमन कलियों से सुसज्जित चमन में, फैसले का मैं तुम्हें अधिकार दूँगा। प्यार जितना है हृदय में, प्यार दूँगा।। ज़िन्दग़ी में नित-नये आग़ाज़ होंगे, दिन पुराने और नये अन्दाज़ होंगे, प्राण तन में जब तलक मेरे रहेंगे, मैं तुम्हें अपना सबल आधार दूँगा। प्यार जितना है हृदय में, प्यार दूँगा।। -- |
शुक्रवार, 17 सितंबर 2021
दोहे "जन्मदिन-नरेन्द्र मोदी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
-- गाँधी और पटेल ने, जहाँ लिया अवतार। मोदी का गुजरात ने, दिया हमें उपहार।। -- देवताओं से कम नहीं, होता है देवेन्द्र। सौ सालों के बाद में, पैदा हुआ नरेन्द्र।। -- साधारण परिवार का, किया चमन गुलजार। मोह छोड़ संसार का, त्याग दिया घर-बार।। -- युगों-युगों के बाद में, लेते जन्म सपूत। दयानन्द की धरा के, मोदी स्वयं सुबूत।। -- समझौता जिसको नहीं, बैरी से स्वीकार। उस मोदी के हाथ में, भारत की पतवार।। -- दामोदर नर इन्द्र से, ऊँचा माँ का भाल। अभिनन्दन जग कर रहा, ले पूजा का थाल।। -- जन्म-दिवस पर आपको, नमन हजारों बार। दीर्घ आयु की कामना, करता दोहाकार।। -- |
रविवार, 21 जून 2020
दोहे "छोटे पुत्र विनीत का, जन्मदिवस है आज"
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छोटे पुत्र विनीत का, जन्मदिवस है आज।
बादल नभ में खुशी से, बजा रहा है साज।।
--
पूरे किये विनीत ने, इकतालीस बसन्त।
खुशियाँ कुल परिवार में, पसरी हैं अत्यन्त।।
--
अपने-अपने ढंग से, लाये सब उपहार।
इस अवसर पर दे रहा, मैं तो प्यार अपार।।
--
मेरे कर्मों का दिया, प्रभु ने ये प्रतिदान।
पढ़-लिख करके बन गये, दोनों पुत्र महान।।
--
अनुकम्पा का ईश की, कैसे करूँ बखान।
सेवारत सरकार में, मेरी हैं सन्तान।।
--
इस पड़ाव में उमर के, नहीं मुझे कुछ चाह।
बस मुझको परिवार की, मिलती रहे पनाह।।
--
देता शुभ आशीष मैं, तुमको सौ-सौ बार।
रहना घर-परिवार में, बनकर सदा उदार।।
--
अभ्यागत के लिए तुम, बन्द न करना द्वार।
कभी किसी भी मोड़ पर, होना मत लाचार।।
--
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मंगलवार, 4 फ़रवरी 2020
दोहे "जीवन की ये नाव" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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--
जीवन से कम हो गया, एक सुहाना
साल।
क्या खोया क्या पा लिया, करे कौन
पड़ताल।।
--
मना रहे हैं जन्मदिन, इष्ट मित्र परिवार।
अपने-अपने ढंग से, लाये सब
उपहार।।
--
जीवन-साथी चल रहा, थाम हाथ
में हाथ।
चार दशक से अधिक से, हम दोनों
हैं साथ।।
--
धीरे-धीरे कट गये, ये उनहत्तर
साल।
प्यार और तकरार में, हुआ न कभी
बबाल।।
--
होते घर-परिवार में, कभी-कभी
मतभेद।
किन्तु न होने चाहियें, आपस में
मनभेद।
--
सुख सरिता में हो सदा, सीधा-सरल
बहाव।
पार करे भवसिन्धु को, जीवन की ये
नाव।।
--
ज्यादातर तो कट गयी, थोड़ी है
अवशेष।
गुज़र जाय वो शान से, जितनी भी
है शेष।।
--
जगतनियन्ता आपसे, इतना है
अनुरोध।
जब तक इस जग में रहूँ, रखना मुझे
सुबोध।।
--
होते बढ़ती उमर में, शिथिल सभी
के अंग।
किन्तु बुद्धि को भाल से, ईश न करना
भंग।।
--
ईश सदा करना कृपा, लगे न मुझको
रोग।
अन्तसमय तक अंग सब, मेरे रहें
निरोग।।
--
सुख से बीते आज तक, मेरे सभी
बसन्त।
देने को शुभकामना, आते हैं
श्रीमन्त।।
--
दिल से निकली भावना, है सच्चा
उपहार।
जन्मदिवस पर सभी का, करता हूँ
आभार।।
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