पुनर्जन्म की
प्रक्रिया (कोरोना से पूर्व मेरा स्वास्थ्य) मित्रों! उस दिन 2021 की 23 अप्रैल थी। मुझे अचानक तीव्र खाँसी और बुखार की शिकायत हो गयी। मैंने इसे बहुत हल्के में लिया और प्रतिदिन की भाँति अपने चिकित्सालय में भी बैठा। मेरे बिल्कुल पड़ोस में एक सर्जन का अस्पताल है। वो जैसे ही 11 बजे अपने घर से हास्पीटल की ओर जाने लगे तो दुआ-सलाम हुई। मैंने उनसे कहा कि मुझे कल से खाँसी और बुखार जैसा लग रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं, आप एजिथ्रोमाइसिन-500 की गोली लीजिए। मैंने उनकी सलाह मानी लेकिन बीमारी बहुत बढ़ गयी। पता लगा कि कोरोना हुआ है। मेरे कारण ही परिवार में सभी को कोरोना हो गया लेकिन वो सब 10-12 दिन में ठीक हो गये। कोविड उन दिनों चरम पर था और हास्पीटलों
में जगह नहीं थी। खैर प्रयास करने पर स्थानीय स्वास्तिक अस्पताल के कोविड वार्ड
में मुझे आई.सी.यू. में भर्ती कर लिया गया। अस्पताल के मालिक डॉ. विपिन अग्रवाल
ने बताया कि आप हमारे दादा जी स्व. घनश्याम दास जी के मित्रों में रहे हैं।
इसलिए मैंने आपको अस्पताल में भर्ती किया है। तीन-चार दिन अस्पताल की आई.सी.यू. में रहने के बाद मेरी हालत में सुधार होने लगा तो मुझे जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। 12 दिन में वहाँ मैं कोरोना से मुक्त हो गया और अस्पताल से डिस्चार्ज होकर अपने घर आ गया। लेकिन भूख बिल्कुल समाप्त हो गयी थी। ऑक्सीजन के सिलिंडर और दूध के बल पर 2 महीने गुजर गये। उसके बाद ऑक्सीजन का सिलिंडर तो हट गया। लेकिन स्वास्थ्य बहुत गिर गया। मैं बिल्कुल चल नहीं पाता था। किन्तु मेरे सफाई कर्मचारी ने पुत्र से भी बढ़कर मेरी मेरी सब तरह से सेवा की और मैं अब थोड़ा-थोड़ा चलने लगा हूँ। (वर्तमान में मेरा स्वास्थ्य) यदि आज मैं जीवित हूँ तो अपने ज्येष्ठ पुत्र नितिन के
कारण हूँ। जिसने अपनी सेहत की परवाह न करते हुए रात दिन मेरी सेवा की है। शायद मेरा यह
पुनर्जन्म था। |
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शुक्रवार, 10 सितंबर 2021
संस्मरण "मेरा पुनर्जन्म" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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