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नहीं कभी जो जानते, क्या होता उपकार।
बदले में अहसान के, वो करते हैं वार।।
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केवल मतलब के लिए, करते आकर बात।
मकसद पूरा जब हुआ, तब भूले औकात।।
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नहीं इशारा समझते, दुनिया में नादान।
ओछी हरकत से कभी, बनते नहीं महान।।
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अपने कहने से नहीं, कोई होता पाक।
सारी दुनिया जानती, पाक बहुत नापाक।।
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खुशहाली को देखकर, रोता रहता ठूँठ।
तिरछी चाल न भूलता, कभी खेल में ऊँट।।
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जम्मू से लद्दाख तक, अब अपनी जागीर।
लेंगे पाकिस्तान से, बाकी भी कशमीर।।
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हुआ न सत्तर साल में, अब तक ऐसा काम।
लेकिन मोदी ने किया, जग में ऊँचा नाम।।
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धरती पर कशमीर की, दिया तिरंगा गाड़।
लिया हमारा पाक ने, कुछ भी नहीं उखाड़।।
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