रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ -- बहनों को मत भूलना, याद दिलाता
पर्व। रक्षाबन्धन पर्व पर, भारत को है
गर्व।। -- परम्परा मत समझना, राखी का त्यौहार। रक्षाबन्धन में निहित, होता पावन प्यार।। -- राखी लेकर आ गयी, बहना बाबुल-द्वार। भाई देते खुशी से, बहनों को उपहार।। -- रक्षाबन्धन पर्व का, दिन है सबसे खास। जिनके बहनें हैं नहीं, वो हैं आज उदास।। -- ममता की इस डोर में, उमड़ा रहा है प्यार। भावनाओं से हैं बँधें, सम्बन्धों के तार।। -- अपनी बहनों से कभी, मत होना नाराज। भइया रक्षा-सूत्र की, रखना हरदम लाज।। -- कच्चे धागों में छिपी, ममता है मजबूत। जो भाई के हृदय को, कर देती अभिभूत।। -- जरी-सूत या जूट के, धागे हैं अनमोल। गौरव के इतिहास से, सज्जित है भूगोल।। -- राखी के दिन देश में, उमड़ा प्यार-अपार। रिश्ते-नातों की चहक, देख रहा संसार।। -- निश्छल पावन प्यार का, होता जहाँ निवेश। सबसे न्यारा जगत में, मेरा भारत देश।। -- |
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बुधवार, 30 अगस्त 2023
दोहे "सम्बन्धों के तार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
गुरुवार, 11 अगस्त 2022
दोहे "सम्बन्धों के तार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
-- परम्परा मत समझना, राखी का त्यौहार। रक्षाबन्धन में निहित, होता पावन प्यार।। -- राखी लेकर आ गयी, बहना बाबुल-द्वार। भाई देते खुशी से, बहनों को उपहार।। -- रक्षाबन्धन पर्व का, दिन है सबसे खास। जिनके बहनें हैं नहीं, वो हैं आज उदास।। -- ममता की इस डोर में, उमड़ा रहा है प्यार। भावनाओं से बँधें हैं, सम्बन्धों के तार।। -- अपनी बहनों से कभी, मत होना नाराज। भइया रक्षा-सूत्र की, रखना हरदम लाज।। -- धागे कच्चे हों भले, ममता है मजबूत। लेकिन भाई का हृदय , कर देते अभिभूत।। -- जरी-सूत या जूट के, धागे हैं अनमोल। गौरव के इतिहास से, सज्जित है भूगोल।। -- राखी के दिन देश में, उमड़ा प्यार-अपार। रिश्ते-नातों की चहक, देख रहा संसार।। -- निश्छल पावन प्यार का, होता जहाँ निवेश। न्यारा सारे जगत से, मेरा भारत देश।। |
शनिवार, 21 अगस्त 2021
रक्षाबन्धन "भावनाओं से हैं बँधें, सम्बन्धों के तार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ बहनों को मत भूलना, याद दिलाता पर्व। रक्षाबन्धन पर्व पर, भारत को है गर्व।। -- परम्परा मत समझना, राखी का त्यौहार। रक्षाबन्धन में निहित, होता पावन
प्यार।। -- राखी लेकर आ गयी, बहना
बाबुल-द्वार। भाई देते खुशी से, बहनों को उपहार।। -- रक्षाबन्धन पर्व का, दिन है सबसे खास। जिनके बहनें हैं नहीं, वो हैं आज उदास।। -- ममता की इस डोर में, उमड़ा रहा है
प्यार। भावनाओं से हैं बँधें, सम्बन्धों के
तार।। -- अपनी बहनों से कभी, मत होना नाराज। भइया रक्षा-सूत्र की, रखना हरदम लाज।। -- कच्चे धागों में छिपी, ममता है मजबूत। जो भाई के हृदय को, कर देती अभिभूत।। -- जरी-सूत या जूट के, धागे हैं अनमोल। गौरव के इतिहास से, सज्जित है
भूगोल।। -- राखी के दिन देश में, उमड़ा
प्यार-अपार। रिश्ते-नातों की चहक, देख रहा संसार।। -- निश्छल पावन प्यार का, होता जहाँ निवेश। सबसे न्यारा जगत में, मेरा भारत देश।। -- |
गुरुवार, 23 अगस्त 2018
दोहे "सम्बन्धों के तार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
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गौरव के इतिहास पर, आधारित भूगोल।
जरी-सूत या जूट के, धागे हैं अनमोल।।
ममता की इस डोर में, उमड़ रहा है प्यार।
भावनाओं से हैं बँधे, सम्बन्धों के तार।।
राखी के हर तार में, छिपी हुई है प्रीत।
जब तक सूरज-चाँद हैं, अमर रहेगी रीत।।
कच्चे धागों से बँधा, राखी का त्यौहार।
रोली, अक्षत-तिलक में, छिपा बहन का प्यार।।
अपनी बहनों से कभी, मत होना नाराज।
रक्षा के इस सूत्र की, रखना हरदम लाज।।
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